PM Vishwakarma Scheme 2026: 18 व्यवसायों को मिलेगा सरकारी सपोर्ट, आज ही करें ऑनलाइन आवेदन
केंद्र सरकार की पीएम विश्वकर्मा योजना भारत की पारंपरिक कला और शिल्प को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है। यदि आप जूता बनाने, कपड़े सिलने, बढ़ईगिरी या लोहे के औजार बनाने जैसे पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े हैं तो यह योजना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। जनवरी 2026 के ताज़ा अपडेट के अनुसार इस योजना के तहत सरकार न केवल आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करती है बल्कि टूलकिट के लिए 15,000 रुपये का अनुदान और व्यवसाय शुरू करने के लिए 3 लाख रुपये तक का सस्ता व बिना गारंटी वाला लोन भी देती है।
क्या है पीएम विश्वकर्मा योजना?
आज भी हमारे देश में लाखों लोग अपनी पारंपरिक कला के माध्यम से आजीविका कमाते हैं। हालांकि बदलते समय के साथ आधुनिक मशीनों और ग्लोबल मार्केट की नई मांगों के कारण ये कारीगर पीछे छूट रहे थे। इसी अंतर को पाटने के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शिल्पकारों के कौशल को निखारना, उन्हें डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है ताकि वे अपना खुद का बड़ा व्यवसाय खड़ा कर सकें। सरकार चाहती है कि हर 'विश्वकर्मा' को समाज में नई पहचान, सम्मान और आधुनिक तकनीक मिले ताकि उनकी कला लुप्त न हो।
प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता
इस योजना के तहत लाभार्थियों को बुनियादी (Basic) और उन्नत (Advanced) दो तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इसका मुख्य फोकस कारीगरों को आधुनिक मशीनों और बाजार के नए डिजाइनों के बारे में सिखाना है। प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों को आर्थिक नुकसान न हो इसके लिए सरकार 500 रुपये प्रतिदिन का वजीफा (Stipend) सीधे उनके बैंक खाते में भेजती है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अपने व्यवसाय को रफ्तार देने के लिए बेहतर टूलकिट खरीदने हेतु सरकार ई-वाउचर के रूप में 15,000 रुपये प्रदान करती है जिससे आप उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण खरीद सकते हैं।
बिना गारंटी के सस्ता लोन
पैसे की कमी अब आपके हुनर के आड़े नहीं आएगी। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत मिलने वाला लोन न केवल बिना गारंटी का है बल्कि इसकी ब्याज दर भी बहुत कम (केवल 5%) रखी गई है:
कौन कर सकता है आवेदन?
सरकार ने इस योजना में 18 अलग-अलग पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया है। यदि आप इनमें से किसी भी पेशे से जुड़े हैं तो इस सुनहरे अवसर का लाभ उठा सकते हैं:
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
योजना का लाभ लेने के लिए सही जानकारी के साथ आवेदन करना बेहद जरूरी है। लाभार्थी की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी सेवा में नहीं होना चाहिए। आपके पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक और एक सक्रिय मोबाइल नंबर होना अनिवार्य है। आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता जरूर जांच लें क्योंकि सही जानकारी के साथ किया गया पूर्ण आवेदन न केवल आपकी आय बढ़ाएगा बल्कि आपके काम को एक नई पहचान भी देगा।
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क्या है पीएम विश्वकर्मा योजना?
आज भी हमारे देश में लाखों लोग अपनी पारंपरिक कला के माध्यम से आजीविका कमाते हैं। हालांकि बदलते समय के साथ आधुनिक मशीनों और ग्लोबल मार्केट की नई मांगों के कारण ये कारीगर पीछे छूट रहे थे। इसी अंतर को पाटने के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शिल्पकारों के कौशल को निखारना, उन्हें डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है ताकि वे अपना खुद का बड़ा व्यवसाय खड़ा कर सकें। सरकार चाहती है कि हर 'विश्वकर्मा' को समाज में नई पहचान, सम्मान और आधुनिक तकनीक मिले ताकि उनकी कला लुप्त न हो। प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता
इस योजना के तहत लाभार्थियों को बुनियादी (Basic) और उन्नत (Advanced) दो तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इसका मुख्य फोकस कारीगरों को आधुनिक मशीनों और बाजार के नए डिजाइनों के बारे में सिखाना है। प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों को आर्थिक नुकसान न हो इसके लिए सरकार 500 रुपये प्रतिदिन का वजीफा (Stipend) सीधे उनके बैंक खाते में भेजती है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अपने व्यवसाय को रफ्तार देने के लिए बेहतर टूलकिट खरीदने हेतु सरकार ई-वाउचर के रूप में 15,000 रुपये प्रदान करती है जिससे आप उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण खरीद सकते हैं।बिना गारंटी के सस्ता लोन
पैसे की कमी अब आपके हुनर के आड़े नहीं आएगी। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत मिलने वाला लोन न केवल बिना गारंटी का है बल्कि इसकी ब्याज दर भी बहुत कम (केवल 5%) रखी गई है: - पहला चरण: अपना काम जमाने के लिए आपको 1 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है जिसे चुकाने के लिए 18 महीने का पर्याप्त समय मिलता है।
- दूसरा चरण: यदि आप पहला लोन समय पर चुका देते हैं तो आप अपनी यूनिट को और बड़ा करने के लिए 2 लाख रुपये के अतिरिक्त लोन के पात्र हो जाते हैं जिसकी पुनर्भुगतान अवधि 30 महीने है।
कौन कर सकता है आवेदन?
सरकार ने इस योजना में 18 अलग-अलग पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया है। यदि आप इनमें से किसी भी पेशे से जुड़े हैं तो इस सुनहरे अवसर का लाभ उठा सकते हैं: - बढ़ई, नाव बनाने वाले और अस्त्र बनाने वाले।
- लोहार, ताला बनाने वाले और हथौड़ा/टूलकिट निर्माता।
- सुनार, कुम्हार और मूर्तिकार (पत्थर तराशने वाले)।
- मोची, राजमिस्त्री और डलिया/चटाई/झाड़ू बनाने वाले।
- गुड़िया और पारंपरिक खिलौना निर्माता, नाई और माला बनाने वाले।
- धोबी, दर्जी और मछली का जाल बनाने वाले।









