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PPF Scheme: रोज़ाना बचाएं 417 रुपये और पाएं 40 लाख रुपये, जानें पूरा गणित

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यह एक ऐसी योजना है जहाँ अगर कोई निवेशक रोज़ाना सिर्फ 417 रुपये बचाता है, तो यह छोटी सी रकम आगे चलकर 40 लाख रुपये से अधिक के टैक्स-फ्री फंड में बदल सकती है। यह कोई चमत्कार नहीं है, बल्कि 'पावर ऑफ कंपाउंडिंग' यानी चक्रवृद्धि ब्याज का जादू है। अगर इसका इस्तेमाल समझदारी से किया जाए, तो यह बड़े से बड़े सपनों को पूरा कर सकता है।
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क्या है 417 रुपये का फार्मूला?

पीपीएफ (PPF) नियमों के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में इस खाते में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश किया जा सकता है। अगर इस रकम को साल के 365 दिनों से विभाजित किया जाए, तो दैनिक निवेश लगभग 411 से 417 रुपये के बीच आता है।

इसका सीधा सा मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी रोज़मर्रा की कमाई से लगभग 417 रुपये अलग निकाल ले, तो वह साल भर में पीपीएफ की पूरी लिमिट यानी 1.5 लाख रुपये का निवेश कर सकता है। अगर इसे महीने के हिसाब से देखा जाए, तो यह राशि लगभग 12,500 रुपये प्रति माह होती है।


15 साल में कितना बढ़ जाएगा फंड?

मान लीजिए कि कोई निवेशक पीपीएफ में लगातार 15 वर्षों तक हर साल 1.5 लाख रुपये जमा करता है। इस अवधि के दौरान निवेशक द्वारा जमा की गई कुल राशि 22.50 लाख रुपये होगी। वर्तमान में इस योजना पर लगभग 7.1 प्रतिशत की दर से वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज मिल रहा है।


इस ब्याज दर के हिसाब से, 15 साल पूरे होने पर यह रकम बढ़कर लगभग 40.68 लाख रुपये हो जाएगी। इस निवेश की सबसे खास बात यह है कि मैच्योरिटी पर मिलने वाली यह पूरी रकम टैक्स-फ्री होती है। यानी सरकार इस मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं वसूलती।

15 साल बाद भी जारी रख सकते हैं निवेश

पीपीएफ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे 15 साल बाद बंद करना जरूरी नहीं है। अगर निवेशक को पैसों की तत्काल आवश्यकता नहीं है, तो इसे 5-5 साल के 'ब्लॉक' में आगे बढ़ाया जा सकता है।

अगर 15 साल के बाद भी निवेश जारी रखा जाता है, तो अगले 5 वर्षों में यह फंड बढ़कर लगभग 65 से 66 लाख रुपये तक पहुँच सकता है। वहीं, अगर कोई इसे कुल 25 वर्षों तक जारी रखता है, तो चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत से यह राशि एक करोड़ रुपये के करीब भी पहुँच सकती है। समय जितना ज्यादा होगा, कंपाउंडिंग का फायदा उतना ही बड़ा होगा।

पीपीएफ को क्यों माना जाता है सुरक्षित?

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भारत में निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन पीपीएफ को सबसे मजबूत और सुरक्षित माना जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह पूरी तरह से सरकार द्वारा समर्थित योजना है। इसमें जमा किया गया पैसा सीधा सरकार के पास जाता है, इसलिए डूबने का कोई जोखिम नहीं होता।

इसके अलावा, यह योजना 'EEE' (Exempt-Exempt-Exempt) श्रेणी में आती है। इसका मतलब है कि:

  1. निवेश की गई राशि पर टैक्स छूट मिलती है (सेक्शन 80C के तहत)।
  2. इस पर मिलने वाला ब्याज टैक्स-फ्री होता है।
  3. मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी राशि भी टैक्स-फ्री होती है।



निवेश का सही समय क्या है?

पीपीएफ में ब्याज का पूरा लाभ उठाने के लिए समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। नियमों के मुताबिक, ब्याज की गणना महीने की 5 तारीख और महीने के आखिरी दिन के बीच सबसे कम बैलेंस पर की जाती है। इसलिए, अगर कोई निवेशक हर महीने पैसा जमा कर रहा है, तो उसे 5 तारीख से पहले पैसा जमा कर देना चाहिए।


इसके अलावा, अगर कोई निवेशक साल भर का पैसा (1.5 लाख रुपये) एक साथ जमा करना चाहता है, तो उसे अप्रैल की 1 तारीख से 5 तारीख के बीच जमा करना सबसे फायदेमंद होता है। इससे पूरे साल का अधिकतम ब्याज मिलता है।

अगर कोई व्यक्ति अपने दैनिक खर्चों से 400-500 रुपये बचाने में सक्षम है, तो पीपीएफ उसके भविष्य और रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत सहारा बन सकता है। निवेश का मंत्र यही है कि रकम कितनी बड़ी है, यह मायने नहीं रखता, बल्कि यह मायने रखता है कि निवेश कितनी जल्दी शुरू किया गया और उसे कितने लंबे समय तक जारी रखा गया।



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