PPF vs NPS Comparison: रिटायरमेंट के लिए कौन सी स्कीम देगी आपको सबसे ज्यादा मुनाफा

आज के समय में महंगाई जिस रफ्तार से बढ़ रही है उसे देखते हुए भविष्य की चिंता करना बहुत जरूरी हो गया है। भारत में लोग अपनी मेहनत की कमाई को ऐसी जगह लगाना चाहते हैं जहां पैसा सुरक्षित भी रहे और अच्छा मुनाफा भी मिले। रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को आसान बनाने के लिए सरकार की दो स्कीमें सबसे ज्यादा चर्चा में रहती हैं। इनमें से एक है पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ और दूसरी है नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस। ये दोनों ही स्कीमें लोगों को बुढ़ापे में आर्थिक मदद देने के लिए बनाई गई हैं लेकिन इनके काम करने का तरीका एकदम अलग है।

सुरक्षित निवेश का भरोसा पीपीएफ

अगर कोई बिना किसी डर के अपना पैसा जमा करना चाहता है तो PPF उसके लिए एक बेहतरीन रास्ता है। ये स्कीम उन लोगों के लिए बनी है जो बाजार के उतार चढ़ाव से दूर रहना चाहते हैं। PPF पूरी तरह से सरकारी गारंटी के साथ आती है इसलिए इसमें पैसा डूबने का कोई खतरा नहीं होता। ये एक ऐसी पारंपरिक स्कीम है जिस पर सालों से लोग भरोसा करते आ रहे हैं।

ब्याज दर और समय की सीमा

PPF में मिलने वाला ब्याज सरकार हर तीन महीने में तय करती है। फिलहाल इस पर 7.1 परसेंट की दर से सालाना ब्याज मिल रहा है। ये स्कीम 15 साल के लिए होती है लेकिन अगर कोई चाहे तो इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ा सकता है। इसमें साल भर में कम से कम 500 रुपये और ज्यादा से ज्यादा 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं। इस स्कीम की सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की रकम पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता।

किसके लिए है ये फायदेमंद

जो लोग रिस्क नहीं लेना चाहते और चाहते हैं कि उनका पैसा धीरे-धीरे लेकिन सुरक्षित तरीके से बढ़ता रहे उनके लिए ये बहुत काम की चीज है। बच्चों की पढ़ाई हो या उनकी शादी या फिर खुद का रिटायरमेंट, पीपीएफ एक सुरक्षित फंड बनाने में मदद करता है। इसमें टैक्स बचाने की सुविधा भी मिलती है जो मिडिल क्लास परिवारों के लिए एक बड़ा फायदा है।

एनपीएस की नई सोच

अब बात करते हैं एनपीएस की जो एक आधुनिक निवेश प्लान है। ये स्कीम उन लोगों के लिए है जो अपने पैसे पर थोड़ा ज्यादा रिटर्न चाहते हैं। ये पूरी तरह से बाजार पर टिकी हुई स्कीम है। इसमें जमा किया गया पैसा इक्विटी और डेब्ट जैसी जगहों पर लगाया जाता है। यही कारण है कि इसमें पीपीएफ के मुकाबले ज्यादा मुनाफा मिलने की उम्मीद रहती है।

रिटर्न और टैक्स की छूट

एनपीएस में ब्याज की कोई फिक्स दर नहीं होती क्योंकि ये मार्केट के हिसाब से चलता है। पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड देखें तो इसमें औसतन 8 से 10 परसेंट तक का रिटर्न मिला है। इसमें 60 साल की उम्र तक निवेश करना होता है जिसे जरूरत पड़ने पर 70 साल तक भी खींचा जा सकता है। एनपीएस में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। इसमें 1.5 लाख रुपये के अलावा 50 हजार रुपये की अलग से टैक्स छूट भी मिलती है जो इसे और भी खास बनाती है।

पैसा निकालने के नियम और रिस्क

NPS में एक बात ध्यान देने वाली है कि रिटायरमेंट के समय सारा पैसा एक साथ नहीं निकाला जा सकता। कुल जमा राशि का 60 परसेंट हिस्सा टैक्स फ्री निकाला जा सकता है लेकिन बाकी 40 परसेंट हिस्से से एन्युटी खरीदनी पड़ती है जिससे आपको हर महीने पेंशन मिलती रहे। चूंकि ये बाजार से जुड़ी स्कीम है इसलिए इसमें थोड़ा रिस्क भी रहता है। अगर बाजार अच्छा रहा तो मुनाफा बहुत ज्यादा होगा और अगर बाजार गिरा तो असर रिटर्न पर भी पड़ेगा।

सही स्कीम का चुनाव

PPF अैर NPS में से कौन सी स्कीम चुननी चाहिए ये पूरी तरह से आपकी पसंद और उम्र पर निर्भर करता है। अगर आप युवा हैं और थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो एनपीएस आपके लिए एक बड़ा फंड तैयार कर सकता है। वहीं अगर आप शांति से बिना किसी टेंशन के बचत करना चाहते हैं तो पीपीएफ सबसे अच्छा है। बहुत से समझदार लोग अपनी कमाई का कुछ हिस्सा पीपीएफ और कुछ एनपीएस में भी लगाते हैं ताकि रिस्क और सुरक्षा के बीच तालमेल बना रहे।
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