RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव, जानें आपकी EMI और लोन पर क्या होगा असर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर आम जनता और निवेशकों को बड़ी खबर दी है। आरबीआई ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। यह घोषणा आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजों की जानकारी देते हुए आज की।
यह मौजूदा वित्त वर्ष की पहली एमपीसी बैठक थी और ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहला बड़ा आर्थिक फैसला है। मौद्रिक नीति समिति ने अपना रुख 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ बनाए रखा है। गौरतलब है कि फरवरी में भी आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था, जबकि इससे पहले साल 2025 में दरों में कुल 125 आधार अंकों (bps) की कटौती की जा चुकी थी।
क्या होता है आपकी जेब पर असर?
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। जब इस दर में कटौती होती है, तो होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन की ईएमआई कम हो जाती है। हालांकि अर्थशास्त्रियों ने पहले ही अनुमान जताया था कि दरें स्थिर रहेंगी, लेकिन पश्चिम एशिया में युद्धविराम की खबरों के बीच कुछ लोग अचानक रेट कट की उम्मीद भी कर रहे थे। फिलहाल एमपीसी ने यथास्थिति बनाए रखने का विकल्प चुना है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीतिगत समीक्षा पेश करते हुए कहा कि भले ही पश्चिम एशिया के संकट ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था के बुनियादी सिद्धांत कई अन्य देशों की तुलना में काफी मजबूत हैं। उन्होंने संकेत दिया कि देश में आर्थिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
विकास दर और महंगाई का अनुमान
आरबीआई एमपीसी बैठक की मुख्य बातें:
यह मौजूदा वित्त वर्ष की पहली एमपीसी बैठक थी और ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहला बड़ा आर्थिक फैसला है। मौद्रिक नीति समिति ने अपना रुख 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ बनाए रखा है। गौरतलब है कि फरवरी में भी आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था, जबकि इससे पहले साल 2025 में दरों में कुल 125 आधार अंकों (bps) की कटौती की जा चुकी थी।
क्या होता है आपकी जेब पर असर?
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। जब इस दर में कटौती होती है, तो होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन की ईएमआई कम हो जाती है। हालांकि अर्थशास्त्रियों ने पहले ही अनुमान जताया था कि दरें स्थिर रहेंगी, लेकिन पश्चिम एशिया में युद्धविराम की खबरों के बीच कुछ लोग अचानक रेट कट की उम्मीद भी कर रहे थे। फिलहाल एमपीसी ने यथास्थिति बनाए रखने का विकल्प चुना है।भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीतिगत समीक्षा पेश करते हुए कहा कि भले ही पश्चिम एशिया के संकट ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था के बुनियादी सिद्धांत कई अन्य देशों की तुलना में काफी मजबूत हैं। उन्होंने संकेत दिया कि देश में आर्थिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। विकास दर और महंगाई का अनुमान
- GDP ग्रोथ: वित्त वर्ष 2027 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 6.9 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 6.8 प्रतिशत रह सकती है।
- महंगाई (Inflation): इस वित्त वर्ष में महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गवर्नर के अनुसार हेडलाइन इन्फ्लेशन फिलहाल नियंत्रण में है और यह बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास बनी हुई है। हालांकि, ऊर्जा की कीमतों में हालिया उछाल महंगाई के लिए एक जोखिम जरूर बन सकता है।
आरबीआई एमपीसी बैठक की मुख्य बातें:
- रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार, कोई बदलाव नहीं।
- मौद्रिक नीति समिति ने अपना तटस्थ रुख जारी रखा है।
- वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान।
- इस साल महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने की संभावना।
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