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Renting vs Buying Home: होम लोन सस्ता होने के बाद क्या अपना घर खरीदना सही है या किराए पर रहना ही बेहतर है

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हर इंसान का हमेशा से यही सपना होता है कि उसका अपना खुद का एक घर हो। एक ऐसा सुंदर घर जहां वे बिना किसी टेंशन के अपने परिवार के साथ आराम से रह सकें। अपना घर होने से मन को बहुत शांति मिलती है। बता दें कि पिछले एक साल के अंदर भारतीय रिज़र्व बैंक ने होम लोन के ब्याज दर में 1.25 प्रतिशत की कमी की है। Home loan सस्ता होने के बाद अब Renting vs Buying Home को लेकर बातचीत काफी बढ़ गई है। रिज़र्व बैंक के इस कदम के बाद बहुत सारे बैंकों ने अपना लोन और भी ज्यादा सस्ता कर दिया है। लोन सस्ता होने के कारण अब बहुत ज्यादा लोग अपना खुद का घर खरीदने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।

बड़े शहरों में प्रॉपर्टी के दाम

भले ही लोन सस्ता हो गया है, पर बड़े शहरों का हाल कुछ और ही है। बड़े और मुख्य शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ चुकी हैं। शहरों में जमीन और मकान के दाम आसमान छू रहे हैं। कई बड़ी जगहों पर मकान खरीदना अब एक आम आदमी की पहुंच से पूरी तरह बाहर हो गया है। आम इंसान के लिए बड़े शहर में घर लेना बहुत मुश्किल काम बन गया है। ऐसे हालात में हर किसी के मन में यही सवाल उठता है। सवाल ये है कि क्या आज के समय में घर खरीदना सच में फायदेमंद है या फिर किराए के मकान में रहना ही ज्यादा बेहतर रहेगा।

होम लोन से घर लेने के फायदे

अगर कोई इंसान होम लोन का इस्तेमाल करके अपना घर खरीदता है, तो उसे एक बहुत लंबे समय तक बैंक को ईएमआई (EMI) चुकानी होती है। बता दें कि आम तौर पर ये होम लोन 15 साल से लेकर 20 साल तक की लंबी अवधि के लिए होते हैं। घर खरीदने वाले को इतने सालों तक लगातार पैसे भरने होते हैं। समय बीतने के साथ साथ और पूरा लोन चुकाने के बाद वो घर पूरी तरह से उसका अपना हो जाता है। इसके साथ ही एक और अच्छी बात होती है कि समय के साथ साथ उस घर की कीमत भी बाजार में बढ़ती रहती है।

घर एक बेहतरीन निवेश

इसका साफ मतलब ये है कि घर सिर्फ रहने की एक जगह नहीं होता है। बल्कि एक घर किसी भी इंसान के लिए एक बहुत अच्छा निवेश भी बन जाता है। अपना खुद का घर होने के और भी बहुत सारे फायदे होते हैं। अगर कभी भविष्य में बहुत ज्यादा पैसों की जरूरत पड़े, तो घर का मालिक अपने घर को बेच कर पैसे ले सकता है। इसके अलावा वे अपने मकान को किराए पर भी दे सकते हैं और उससे हर महीने पैसे कमा सकते हैं। अपना घर होने का एक मजा ये भी है कि इसे पसंद के अनुसार बदला जा सकता है। घर के मालिक अपनी सजावट अपने मन के हिसाब से कर सकते हैं।

EMI चुकाने की जिम्मेदारी

घर को अपनी पसंद से सजाने के साथ साथ कुछ जिम्मेदारियां भी निभानी होती हैं। जी हां, अपना घर बनाने के लिए मकान मालिक को एक बहुत लंबी अवधि तक ईएमआई का भुगतान करना पड़ता है। ये एक ऐसा काम है जो लगातार कई सालों तक करना होता है। हर महीने अपनी आमदनी में से एक बड़ा हिस्सा बैंक को देना होता है।

किराए पर रहने के बड़े फायदे

किराए पर रहने के फायदे भी कम नहीं हैं। जो लोग किराए के मकान में रहना पसंद करते हैं, उन्हें ईएमआई जैसी कोई भी लंबी और बड़ी जिम्मेदारी नहीं उठानी पड़ती है। महीने की ईएमआई का टेंशन ना होने से उनके मासिक बजट पर दबाव काफी कम रहता है। इसके साथ ही प्रॉपर्टी की देखभाल और मरम्मत की जिम्मेदारी आम तौर पर मकान मालिक की ही होती है। इसलिए किराएदार को घर के रख रखाव की ज्यादा चिंता बिल्कुल नहीं करनी पड़ती है।

नौकरी बदलने वालों के लिए आसानी

वहीं कुछ लोगों का काम ऐसा होता है जिसमें उनकी नौकरी अक्सर बदलती रहती है। जिन लोगों की नौकरी बदलती है, उन्हें अलग अलग शहरों में जाना पड़ता है। उनके लिए किराए के मकान में रहना ज्यादा आसान और सही होता है। हर बार नया शहर जाने पर एक नए किराए के घर में रहना काफी आसान हो जाता है। ऐसे लोगों को प्रॉपर्टी की ईएमआई जैसी कोई भी बड़ी चिंता नहीं होती है। वे आसानी से अपनी नौकरी पर ध्यान दे सकते हैं।

आपका सही फैसला क्या होना चाहिए

अपना घर खरीदना है या किराए के मकान में रहना है, ये फैसला कई बातों पर टिका होता है। घर खरीदना एक बहुत बड़ा कदम होता है और किराए पर रहना एक अलग तरह की आजादी देता है। ये फैसला पूरी तरह से लोगों की अपनी सुविधा पर निर्भर करता है। इसके साथ ही नौकरी की स्थिरता और इंसान की आमदनी कितनी है, ये बात भी बहुत मायने रखती है। अगर आमदनी अच्छी है तो घर लेना आसान होता है। इसलिए अपने लिए एकदम सही रास्ता चुनना पूरी तरह से घर लेने वाले पर ही है। सभी लोग अपनी आमदनी, अपनी बचत और अपनी जरूरत को देखकर ही अपना सही फैसला ले सकते हैं।








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