क्या आप जानते हैं? भारत में PPF से अधिक लोकप्रिय हैं KVP और NSC जैसी योजनाएं

भारतीय परिवारों में निवेश को लेकर क्या सोच है और वे किन योजनाओं पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं, इसे लेकर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने एक दिलचस्प सर्वे पेश किया है। सेबी इन्वेस्टर सर्वे 2025 के अनुसार, आज भी भारत के अधिकांश घरों में पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं का बोलबाला है। हैरानी की बात यह है कि किसान विकास पत्र और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट जैसी पारंपरिक योजनाओं के बारे में लोग पब्लिक प्रोविडेंट फंड या ईपीएफ से कहीं ज्यादा जानते हैं।
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पारंपरिक योजनाओं पर अटूट भरोसा

सर्वे रिपोर्ट बताती है कि फिक्स्ड डिपॉजिट और जीवन बीमा के बारे में लगभग हर भारतीय परिवार जानता है। इसके बाद नंबर आता है पोस्ट ऑफिस की योजनाओं का। लगभग 75 प्रतिशत परिवारों को किसान विकास पत्र और एनएससी की जानकारी है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि दशकों से चली आ रही ये योजनाएं आज भी भारतीय बचत संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा बनी हुई हैं।

इसके विपरीत, पीपीएफ और ईपीएफ जैसे रिटायरमेंट फंड्स के बारे में जागरूकता का स्तर काफी कम है। सर्वे के मुताबिक, 30 प्रतिशत से भी कम परिवार इन योजनाओं के बारे में जानते हैं। यही हाल क्रिप्टोकरेंसी जैसे नए जमाने के निवेश विकल्पों का भी है, जो अभी भी आम लोगों की समझ से काफी दूर हैं।


शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की स्थिति

अगर हम सिक्योरिटीज मार्केट या शेयर बाजार की बात करें, तो यहां भी जागरूकता कुछ चुनिंदा उत्पादों तक ही सीमित है। म्यूचुअल फंड और ईटीएफ के बारे में 53 प्रतिशत परिवार जानते हैं, जबकि शेयर बाजार (लिस्टेड इक्विटी) की जानकारी 49 प्रतिशत परिवारों को है।

दिलचस्प बात यह है कि जो लोग म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार को जानते हैं, उनमें से 67 प्रतिशत लोग दोनों के बारे में जानकारी रखते हैं। हालांकि, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस और रीट्स जैसे जटिल वित्तीय उत्पादों के मामले में जागरूकता का स्तर अभी भी बेहद कम है। उदाहरण के लिए, एफएंडओ के बारे में केवल 13 प्रतिशत और एआईएफ के बारे में मात्र 6 प्रतिशत परिवारों को ही पता है।


रियल एस्टेट और अन्य विकल्प

भारतीय घरों में रियल एस्टेट को आज भी एक मजबूत निवेश विकल्प माना जाता है, जिसके बारे में लगभग 46 प्रतिशत परिवार जागरूक हैं। वहीं नेशनल पेंशन स्कीम और चिट फंड जैसी योजनाओं की पहुंच मध्यम स्तर पर है, जिनके बारे में करीब 30 प्रतिशत लोग जानते हैं।

सेबी का यह सर्वे साफ तौर पर दिखाता है कि भारत में निवेश की समझ अभी भी सुरक्षित और पारंपरिक रास्तों की ओर ज्यादा झुकी हुई है। आधुनिक वित्तीय बाजारों और सुरक्षित रिटायरमेंट योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।