Old Note Value: घर में रखा 1 रुपये का यह पुराना नोट दिला सकता है 7 लाख रुपये, जानें क्या है इसकी खासियत
बाजार में इन दिनों जिस नोट की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह ब्रिटिश काल का 1 रुपये का नोट है। यह नोट लगभग 1935 के आसपास जारी किया गया था और इस पर तत्कालीन गवर्नर जे.डब्ल्यू. के हस्ताक्षर हैं। करीब 90 साल पुराना यह नोट अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। करेंसी कलेक्टर्स के बीच इसकी मांग इतनी अधिक है कि कुछ मामलों में इसकी कीमत 7 लाख रुपये तक आंकी गई है।
आजादी के बाद भी इसका सफर जारी रहा, लेकिन 1994 में इसकी छपाई एक बार फिर बंद कर दी गई। करीब दो दशकों के अंतराल के बाद, 2015 में 1 रुपये के नोट की छपाई एक बार फिर शुरू हुई। यही कारण है कि बीच के वर्षों में छपे या उससे पहले के ब्रिटिश कालीन नोट अब बहुत कम देखने को मिलते हैं।
हालांकि, यहाँ एक महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखना आवश्यक है। भारतीय रिजर्व बैंक आधिकारिक तौर पर पुराने नोटों और सिक्कों की खरीद-बिक्री की अनुमति नहीं देता है और न ही इसमें कोई मध्यस्थता करता है। अक्सर आरबीआई द्वारा इस संबंध में चेतावनी भी जारी की जाती है। इसलिए, इस तरह का कोई भी लेनदेन पूरी तरह से खरीदार और विक्रेता की अपनी जिम्मेदारी और जोखिम पर होता है। ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए पूरी सावधानी बरतना जरूरी है।
अगर किसी के पास पुराने सिक्कों या नोटों का संग्रह है, तो उसे एक बार अपनी तिजोरी जरूर चेक करनी चाहिए। मुमकिन है कि जिसे लोग महज कागज का पुराना टुकड़ा समझ रहे हों, वह अंतरराष्ट्रीय बाजार या कलेक्टर्स की नजर में लाखों का खजाना हो।
क्यों खास है ब्रिटिश काल का यह नोट?
यह नोट न केवल पुराना है बल्कि ऐतिहासिक भी है। यह उस दौर की याद दिलाता है जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था और देश की आर्थिक व्यवस्था अलग तरीके से काम करती थी। नोट पर मौजूद गवर्नर के हस्ताक्षर, इसकी छपाई की गुणवत्ता और इसकी सीमित संख्या इसे और भी कीमती बनाती है। ऐसे नोटों की ऊंची कीमत आमतौर पर तभी मिलती है जब वे अच्छी स्थिति में हों और उनमें कोई कट या खराबी न हो। कलेक्टर्स अक्सर 'मिंट कंडीशन' (बिल्कुल नई जैसी स्थिति) वाले नोटों की तलाश में रहते हैं।1 रुपये का नोट लाखों में क्यों बिकता है?
इस 1 रुपये के नोट की ऊंची कीमत का सबसे बड़ा कारण इसकी दुर्लभता है। लंबे समय तक इसकी छपाई बंद रही, जिससे यह आम जनता की पहुंच से दूर हो गया। जैसे-जैसे समय बीतता गया, इसकी उपलब्धता कम होती गई और इसकी वैल्यू बढ़ती गई। विशेष रूप से, आजादी से पहले के नोटों को संग्रहकर्ता बहुत मूल्यवान मानते हैं। इसके अलावा, जिन नोटों में विशेष सीरियल नंबर (जैसे 786) या कोई प्रिंटिंग त्रुटि होती है, उनके दाम और भी अधिक हो सकते हैं।You may also like
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1 रुपये के नोट का दिलचस्प इतिहास
1 रुपये के नोट का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। भारतीय मुद्रा प्रणाली में 1 रुपये का नोट पहली बार 1917 में पेश किया गया था। उस समय इस नोट पर ग्रेट ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम की तस्वीर छपी होती थी। हालांकि, 1926 में इसकी छपाई रोक दी गई थी, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान की जरूरतों को देखते हुए 1940 में इसे फिर से जारी किया गया।आजादी के बाद भी इसका सफर जारी रहा, लेकिन 1994 में इसकी छपाई एक बार फिर बंद कर दी गई। करीब दो दशकों के अंतराल के बाद, 2015 में 1 रुपये के नोट की छपाई एक बार फिर शुरू हुई। यही कारण है कि बीच के वर्षों में छपे या उससे पहले के ब्रिटिश कालीन नोट अब बहुत कम देखने को मिलते हैं।
कैसे बेचे जाते हैं पुराने नोट?
आज के डिजिटल युग में पुराने नोटों और सिक्कों की नीलामी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी होती है। 'कॉइन बाजार' और 'क्विकर' जैसे प्लेटफॉर्म पर कई लोग ऐसे दुर्लभ नोटों को खरीदने के लिए ऊंची बोली लगाते हैं। यहाँ विक्रेता अपने नोट की साफ तस्वीर और विवरण अपलोड करके खरीदारों से संपर्क कर सकते हैं।हालांकि, यहाँ एक महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखना आवश्यक है। भारतीय रिजर्व बैंक आधिकारिक तौर पर पुराने नोटों और सिक्कों की खरीद-बिक्री की अनुमति नहीं देता है और न ही इसमें कोई मध्यस्थता करता है। अक्सर आरबीआई द्वारा इस संबंध में चेतावनी भी जारी की जाती है। इसलिए, इस तरह का कोई भी लेनदेन पूरी तरह से खरीदार और विक्रेता की अपनी जिम्मेदारी और जोखिम पर होता है। ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए पूरी सावधानी बरतना जरूरी है।
अगर किसी के पास पुराने सिक्कों या नोटों का संग्रह है, तो उसे एक बार अपनी तिजोरी जरूर चेक करनी चाहिए। मुमकिन है कि जिसे लोग महज कागज का पुराना टुकड़ा समझ रहे हों, वह अंतरराष्ट्रीय बाजार या कलेक्टर्स की नजर में लाखों का खजाना हो।









