Egg Price Drop: खाड़ी देशों में पोल्ट्री एक्सपोर्ट 20 फीसदी गिरा, जानिए क्यों घरेलू बाजार में सस्ते हो रहे हैं अंडे
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मार्च 2026 में संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई को होने वाले भारत के पोल्ट्री और अंडा निर्यात में करीब 25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही ओमान को किए जाने वाले निर्यात में तो 90 प्रतिशत से भी अधिक की भारी कमी आई है। अगर कुल मिलाकर देखा जाए, तो इस साल मार्च के महीने में देश के पूरे पोल्ट्री निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत की मंदी देखी गई है, जिसने इस क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।
भारतीय पोल्ट्री उद्योग के लिए खाड़ी देशों का बाजार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि भारत से बाहर भेजे जाने वाले कुल अंडों का लगभग 82 फीसदी हिस्सा अकेले इसी क्षेत्र में जाता है। पिछले साल भारत ने सिर्फ यूएई को करीब 115 मिलियन डॉलर के पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात किया था, जबकि ओमान का आयात लगभग 26.8 मिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन हाल ही में पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री रास्तों में आई रुकावटों के चलते भारतीय पोल्ट्री उद्योग पर इसका सीधा और बुरा असर पड़ने लगा है।
भारतीय पोल्ट्री उद्योग के लिए खाड़ी देशों का बाजार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि भारत से बाहर भेजे जाने वाले कुल अंडों का लगभग 82 फीसदी हिस्सा अकेले इसी क्षेत्र में जाता है। पिछले साल भारत ने सिर्फ यूएई को करीब 115 मिलियन डॉलर के पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात किया था, जबकि ओमान का आयात लगभग 26.8 मिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन हाल ही में पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री रास्तों में आई रुकावटों के चलते भारतीय पोल्ट्री उद्योग पर इसका सीधा और बुरा असर पड़ने लगा है।
तमिलनाडु का नमक्कल क्षेत्र हुआ सबसे ज्यादा प्रभावित
इस पूरे संकट का सबसे गंभीर असर तमिलनाडु के नमक्कल पोल्ट्री क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है, जो भारत का सबसे बड़ा अंडा उत्पादक हब है। इस क्षेत्र से भारी मात्रा में अंडों का निर्यात मुख्य रूप से वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह के जरिए खाड़ी देशों को किया जाता है। मौजूदा समय में शिपिंग कंटेनरों की भारी कमी, समुद्र में लगातार बढ़ते मालभाड़े और समुद्री रास्तों में हो रही देरी के कारण निर्यातकों और व्यापारियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।Next Story