SIP से SWP रिटायरमेंट स्ट्रैटेजी: ₹20,000 की SIP से ₹3.8 करोड़ का फंड और 5% निकासी से नियमित आय

SIP से SWP रिटायरमेंट स्ट्रैटेजी आजकल रिटायरमेंट प्लानिंग का एक लोकप्रिय तरीका बनती जा रही है। अगर आप हर महीने ₹20,000 की SIP 25 साल तक करते हैं, तो लगभग ₹3.8 करोड़ का फंड तैयार किया जा सकता है (मान लें 12% सालाना रिटर्न)। रिटायरमेंट के बाद इसी रकम पर 5% सालाना निकासी (SWP) चुनकर आप नियमित मासिक आय भी पा सकते हैं और बाकी पैसा निवेश में लगा रहकर बढ़ता भी रह सकता है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
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SIP क्या करती है? (कमाई के वर्षों में धन बनाना)


Systematic Investment Plan (SIP) के जरिए आप हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। यह तरीका:

  • नियमित निवेश की आदत डालता है
  • बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम करता है
  • लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा देता है

उदाहरण समझें:


  • मासिक SIP: ₹20,000
  • अवधि: 25 साल
  • कुल निवेश: ₹60 लाख
  • मान लें औसत रिटर्न: 12% सालाना
  • 25 साल बाद अनुमानित फंड: करीब ₹3.8 करोड़

यानि समय और अनुशासन से छोटी-छोटी रकम भी बड़ा फंड बना सकती है।

SWP क्या है ? (रिटायरमेंट के बाद नियमित आय)


रिटायरमेंट के बाद जरूरत होती है नियमित आय की। यहां काम आती है Systematic Withdrawal Plan (SWP)।


SWP में:

  • आप हर महीने या साल एक तय रकम निकालते हैं
  • पूरा पैसा एक साथ नहीं निकालते
  • बचा हुआ पैसा निवेश में बना रहता है

इससे आपको नियमित इनकम मिलती है और फंड भी बढ़ने की संभावना बनी रहती है।

5% निकासी कैसे दे सकती है मजबूत आय?


मान लें आपके पास रिटायरमेंट के समय ₹3.8 करोड़ का फंड है और आप 5% सालाना निकासी चुनते हैं।

  • कुल फंड: ₹3.8 करोड़
  • 5% सालाना निकासी: ₹19 लाख
  • मासिक आय: लगभग ₹1.58 लाख

अब अगर बचा हुआ पैसा औसतन 8% सालाना रिटर्न देता है:


  • सालाना कमाई (8% पर): ₹30.4 लाख
  • निकासी: ₹19 लाख
  • पहले साल संभावित बचत (टैक्स से पहले): लगभग ₹11.4 लाख

यानि अगर रिटर्न ठीक रहे, तो निकासी के बाद भी आपका फंड घटने की बजाय बढ़ सकता है। इसी वजह से 4% से 6% की निकासी दर को कई विशेषज्ञ संतुलित मानते हैं।

पूरा पैसा एक साथ क्यों न निकालें?


कई लोग रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा निकालने की सोचते हैं, लेकिन इसके नुकसान हो सकते हैं:

  • ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है
  • आगे की कंपाउंडिंग रुक जाती है
  • बड़ी रकम को संभालना मुश्किल हो सकता है

SWP आपको अनुशासित तरीके से पैसा निकालने की सुविधा देती है।

रिटायरमेंट के लिए 3-बकेट स्ट्रैटेजी


विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि SWP की तैयारी रिटायरमेंट से 1-2 साल पहले कर लें। एक आसान तरीका है तीन बकेट रणनीति।

उदाहरण (अगर कुल फंड ₹3 करोड़ है):


  • मासिक खर्च: ₹1 लाख
  • 2 साल का खर्च (लिक्विड फंड में): ₹24 लाख
  • हाइब्रिड/इनकम फंड (मध्यम अवधि): ₹60–75 लाख
  • इक्विटी फंड (लंबी अवधि के लिए): ₹2 करोड़ या उससे ज्यादा

इसका फायदा:

  • बाजार गिरने पर इक्विटी बेचने की मजबूरी नहीं
  • रोजमर्रा के खर्च सुरक्षित रहते हैं
  • लंबी अवधि में महंगाई से लड़ने की क्षमता बनी रहती है

टैक्स के नजरिए से SWP क्यों बेहतर हो सकती है?

इक्विटी म्यूचुअल फंड में:

  • एक साल से ज्यादा रखने पर लाभ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है
  • टैक्स सिर्फ मुनाफे वाले हिस्से पर लगता है, पूरी निकासी पर नहीं

इस वजह से SWP कई मामलों में फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे विकल्पों से ज्यादा टैक्स-फ्रेंडली हो सकती है।

जल्दी शुरू करें, समझदारी से निकालें

रिटायरमेंट प्लानिंग सिर्फ पैसा जमा करने तक सीमित नहीं है। सही समय पर सही तरीके से पैसा निकालना भी उतना ही जरूरी है।

₹20,000 की मासिक SIP से ₹3.8 करोड़ का फंड बनाना दिखाता है कि अनुशासन और समय कितनी बड़ी ताकत है। अगर इसी फंड पर 5% SWP अपनाई जाए, तो आप नियमित आय के साथ महंगाई से भी मुकाबला कर सकते हैं। सबसे जरूरी है - जल्दी शुरुआत, नियमित निवेश और रिटायरमेंट से पहले सही योजना।

डिस्क्लेमर: यह केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं, और पिछले रिटर्न भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं देते हैं। गणना के लिए उपयोग किए गए आंकड़े केवल उदाहरण के तौर पर हैं और वास्तविक रिटर्न अलग हो सकते हैं। न्यूज़पॉइंट किसी भी वित्तीय लाभ या हानि के लिए उत्तरदायी नहीं है। किसी भी योजना में निवेश करने या एसडब्ल्यूपी शुरू करने से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।