हर महीने 5,000 रुपये की SIP या 5 लाख की FD? कौन देगा ज्यादा रिटर्न
हर महीने 5,000 रुपये की SIP करें या एक बार में 5 लाख रुपये की Fixed Deposit (FD)? निवेश करने वाले ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है। दोनों ही निवेश के लोकप्रिय विकल्प हैं। FD में आपका पैसा सुरक्षित रहता है और तय समय के बाद फिक्स ब्याज मिलता है। वहीं, SIP में रिटर्न तय नहीं होता, क्योंकि यह शेयर बाजार से जुड़ी होती है। इसमें जोखिम जरूर होता है, लेकिन लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना भी रहती है।
कौन-सा विकल्प आपके लिए सही रहेगा, यह आपकी जरूरत, निवेश की समयसीमा और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। महंगाई, टैक्स और लंबे समय में मिलने वाले Compounding के फायदे को भी ध्यान में रखना जरूरी है। तभी आप अपने लिए सही निवेश का विकल्प चुन पाएंगे।
अगर हर महीने 5,000 रुपये की SIP में 10 साल तक निवेश किया जाए, तो कुल निवेश 6 लाख रुपये होगा। अगर इस दौरान औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 10 साल बाद यह रकम बढ़कर करीब 11.6 लाख रुपये हो सकती है।
यानी आपने 6 लाख रुपये निवेश किए और Compounding की वजह से आपकी रकम लगभग दोगुनी हो सकती है। हालांकि, SIP शेयर बाजार से जुड़ी होती है, इसलिए इसमें मिलने वाला रिटर्न तय नहीं होता और बाजार की चाल के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है।
अगर दूसरी तरफ 5 लाख रुपये की एकमुश्त Fixed Deposit (FD) कराई जाए और उस पर 7% सालाना ब्याज मिले, तो 10 साल बाद यह रकम करीब 9.8 लाख रुपये हो सकती है।
यानी SIP में 10 साल के दौरान कुल निवेश सिर्फ 1 लाख रुपये ज्यादा (6 लाख रुपये) होता है, लेकिन इसके बावजूद निवेशक के पास FD के मुकाबले ज्यादा बड़ी रकम बन सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह शेयर बाजार में लंबे समय तक निवेश और Compounding का फायदा है। हालांकि, ये आंकड़े सिर्फ उदाहरण के तौर पर हैं। असल रिटर्न बाजार की चाल के अनुसार कम या ज्यादा हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के बड़े वित्तीय लक्ष्यों के लिए आजकल ज्यादा लोग SIP को चुन रहे हैं।
जितना लंबा समय निवेश को मिलेगा, उतना ही ज्यादा Compounding का फायदा मिल सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति हर महीने 5,000 रुपये की SIP में निवेश करता है और उसे औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 15 साल में करीब 25 लाख रुपये और 20 साल में लगभग 50 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है।
यही वजह है कि वित्तीय सलाहकार 7 से 10 साल या उससे ज्यादा समय के लक्ष्यों के लिए अक्सर Equity SIP की सलाह देते हैं।
FD की तरह SIP में रिटर्न तय नहीं होता। क्योंकि इसका पैसा शेयर बाजार में निवेश होता है, इसलिए बाजार गिरने पर निवेश की वैल्यू कुछ समय के लिए कम भी हो सकती है।
हालांकि, पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि लंबे समय तक निवेश करने वाले लोगों को बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम देखने को मिला है। धैर्य रखने वाले निवेशकों को समय के साथ बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेश करते समय लोग अक्सर महंगाई (Inflation) को नजरअंदाज कर देते हैं। अगर महंगाई 5 से 6% के आसपास है और FD पर 7% ब्याज मिल रहा है, तो असल फायदा सिर्फ 1 से 2% के आसपास ही रह जाता है।
वहीं, अगर SIP से औसतन 12% रिटर्न मिलता है, तो महंगाई का असर निकालने के बाद भी बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। लंबे समय में यही अंतर बड़ी संपत्ति बनाने में मदद करता है।
FD से मिलने वाला ब्याज आपकी कुल इनकम में जुड़ जाता है और उसी के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है। अगर आप ऊंचे टैक्स स्लैब में आते हैं, तो ब्याज का बड़ा हिस्सा टैक्स में जा सकता है।
वहीं, Equity Mutual Fund में निवेश पर टैक्स के नियम थोड़े अलग हैं, जिससे लंबे समय के निवेशकों को कुछ मामलों में फायदा मिल सकता है।
अगर आपका टारगेट इमरजेंसी फंड बनाना है, कुछ साल बाद पैसों की जरूरत है या आप कोई जोखिम नहीं लेना चाहते, तो FD बेहतर विकल्प हो सकती है।
लेकिन अगर आपका लक्ष्य 10 साल या उससे ज्यादा समय में अच्छी-खासी संपत्ति बनाना, बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना या रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करना है, तो SIP ज्यादा सही हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ FD या सिर्फ SIP चुनने के बजाय दोनों के बीच तालमेल बनाकर रखना बेहतर रणनीति हो सकती है। इससे एक तरफ पैसे की सुरक्षा बनी रहती है, तो दूसरी तरफ लंबे समय में बेहतर रिटर्न पाने का मौका भी मिलता है।
कौन-सा विकल्प आपके लिए सही रहेगा, यह आपकी जरूरत, निवेश की समयसीमा और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। महंगाई, टैक्स और लंबे समय में मिलने वाले Compounding के फायदे को भी ध्यान में रखना जरूरी है। तभी आप अपने लिए सही निवेश का विकल्प चुन पाएंगे।
10 साल में SIP दे सकती है ज्यादा रिटर्न
अगर हर महीने 5,000 रुपये की SIP में 10 साल तक निवेश किया जाए, तो कुल निवेश 6 लाख रुपये होगा। अगर इस दौरान औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 10 साल बाद यह रकम बढ़कर करीब 11.6 लाख रुपये हो सकती है।
यानी आपने 6 लाख रुपये निवेश किए और Compounding की वजह से आपकी रकम लगभग दोगुनी हो सकती है। हालांकि, SIP शेयर बाजार से जुड़ी होती है, इसलिए इसमें मिलने वाला रिटर्न तय नहीं होता और बाजार की चाल के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है।
FD और SIP में कितना होगा फर्क?
अगर दूसरी तरफ 5 लाख रुपये की एकमुश्त Fixed Deposit (FD) कराई जाए और उस पर 7% सालाना ब्याज मिले, तो 10 साल बाद यह रकम करीब 9.8 लाख रुपये हो सकती है।
यानी SIP में 10 साल के दौरान कुल निवेश सिर्फ 1 लाख रुपये ज्यादा (6 लाख रुपये) होता है, लेकिन इसके बावजूद निवेशक के पास FD के मुकाबले ज्यादा बड़ी रकम बन सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह शेयर बाजार में लंबे समय तक निवेश और Compounding का फायदा है। हालांकि, ये आंकड़े सिर्फ उदाहरण के तौर पर हैं। असल रिटर्न बाजार की चाल के अनुसार कम या ज्यादा हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के बड़े वित्तीय लक्ष्यों के लिए आजकल ज्यादा लोग SIP को चुन रहे हैं।
लंबे समय तक निवेश क्यों है जरूरी?
जितना लंबा समय निवेश को मिलेगा, उतना ही ज्यादा Compounding का फायदा मिल सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति हर महीने 5,000 रुपये की SIP में निवेश करता है और उसे औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 15 साल में करीब 25 लाख रुपये और 20 साल में लगभग 50 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है।
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यही वजह है कि वित्तीय सलाहकार 7 से 10 साल या उससे ज्यादा समय के लक्ष्यों के लिए अक्सर Equity SIP की सलाह देते हैं।
SIP में जोखिम भी है
FD की तरह SIP में रिटर्न तय नहीं होता। क्योंकि इसका पैसा शेयर बाजार में निवेश होता है, इसलिए बाजार गिरने पर निवेश की वैल्यू कुछ समय के लिए कम भी हो सकती है।
हालांकि, पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि लंबे समय तक निवेश करने वाले लोगों को बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम देखने को मिला है। धैर्य रखने वाले निवेशकों को समय के साथ बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
महंगाई भी करती है असर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेश करते समय लोग अक्सर महंगाई (Inflation) को नजरअंदाज कर देते हैं। अगर महंगाई 5 से 6% के आसपास है और FD पर 7% ब्याज मिल रहा है, तो असल फायदा सिर्फ 1 से 2% के आसपास ही रह जाता है।
वहीं, अगर SIP से औसतन 12% रिटर्न मिलता है, तो महंगाई का असर निकालने के बाद भी बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। लंबे समय में यही अंतर बड़ी संपत्ति बनाने में मदद करता है।
टैक्स का भी पड़ता है असर
FD से मिलने वाला ब्याज आपकी कुल इनकम में जुड़ जाता है और उसी के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है। अगर आप ऊंचे टैक्स स्लैब में आते हैं, तो ब्याज का बड़ा हिस्सा टैक्स में जा सकता है।
वहीं, Equity Mutual Fund में निवेश पर टैक्स के नियम थोड़े अलग हैं, जिससे लंबे समय के निवेशकों को कुछ मामलों में फायदा मिल सकता है।
आखिर किसे चुनें?
अगर आपका टारगेट इमरजेंसी फंड बनाना है, कुछ साल बाद पैसों की जरूरत है या आप कोई जोखिम नहीं लेना चाहते, तो FD बेहतर विकल्प हो सकती है।
लेकिन अगर आपका लक्ष्य 10 साल या उससे ज्यादा समय में अच्छी-खासी संपत्ति बनाना, बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना या रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करना है, तो SIP ज्यादा सही हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ FD या सिर्फ SIP चुनने के बजाय दोनों के बीच तालमेल बनाकर रखना बेहतर रणनीति हो सकती है। इससे एक तरफ पैसे की सुरक्षा बनी रहती है, तो दूसरी तरफ लंबे समय में बेहतर रिटर्न पाने का मौका भी मिलता है।









