SIP vs Lumpsum: ₹5,000 का निवेश कैसे बना सकता है ₹7 करोड़? जानें कौन सा तरीका है बेस्ट
जब कोई आम आदमी निवेश की दुनिया में कदम रखता है, तो उसके मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि निवेश का तरीका क्या हो? हर महीने थोड़े-थोड़े पैसे जमा करना यानी एसआईपी (SIP) या फिर एक साथ बड़ी रकम निवेश करना जिसे लमसम (Lumpsum) कहते हैं। हाल ही में मशहूर फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर अंकुर वारिकू ने अपने एक वीडियो में 5,000 रुपये के निवेश के आंकड़ों को साझा किया है। उनके विश्लेषण के अनुसार, लंबी अवधि में इन दोनों तरीकों के रिटर्न में जमीन-आसमान का अंतर हो सकता है।
म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले इन दोनों तरीकों के असली फर्क और जोखिम को समझना बहुत जरूरी है। आइए देखते हैं कि आपका 5,000 रुपये का निवेश 30 साल में आपको कहां पहुंचा सकता है।
निवेश का तुलनात्मक विश्लेषण
वीडियो में दी गई जानकारी के अनुसार, समय के साथ एसआईपी और लमसम के रिटर्न के बीच एक स्पष्ट अंतर देखा जा सकता है। कंपाउंडिंग का असर कैसे काम करता है, इसे नीचे दिए गए अनुमानित आंकड़ों से समझा जा सकता है।
इन आंकड़ों को देखकर किसी की भी आंखें फटी रह सकती हैं। तो क्या एकमुश्त निवेश ही बेहतर है? यहीं पर असली रहस्य छिपा है।
म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले इन दोनों तरीकों के असली फर्क और जोखिम को समझना बहुत जरूरी है। आइए देखते हैं कि आपका 5,000 रुपये का निवेश 30 साल में आपको कहां पहुंचा सकता है।
निवेश का तुलनात्मक विश्लेषण
वीडियो में दी गई जानकारी के अनुसार, समय के साथ एसआईपी और लमसम के रिटर्न के बीच एक स्पष्ट अंतर देखा जा सकता है। कंपाउंडिंग का असर कैसे काम करता है, इसे नीचे दिए गए अनुमानित आंकड़ों से समझा जा सकता है। - 1 साल के बाद: एसआईपी की वैल्यू लगभग 44,400 रुपये होगी, जबकि लमसम की वैल्यू लगभग 7,800 रुपये (ब्याज के साथ)।
- 10 साल के बाद: दोनों के बीच का अंतर काफी तेजी से बढ़ना शुरू हो जाता है।
- 30 साल के बाद: जहां एसआईपी के जरिए जमा की गई राशि करीब 2 करोड़ 2 लाख रुपये होती है, वहीं लमसम यानी एकमुश्त निवेश में यह आंकड़ा 7 करोड़ 4 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
इन आंकड़ों को देखकर किसी की भी आंखें फटी रह सकती हैं। तो क्या एकमुश्त निवेश ही बेहतर है? यहीं पर असली रहस्य छिपा है।
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