SBI Stock Rally: बाजार की गिरावट के बीच एसबीआई ने भरी उड़ान, 3 दिन में 3% का उछाल
मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान बीएसई (BSE) पर एसबीआई का शेयर 1% की बढ़त के साथ ₹1,026.80 के नए शिखर पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरा दिन था जब बैंक के शेयरों में तेजी देखी गई। इन तीन दिनों में ही स्टॉक ने अपने निवेशकों को करीब 3% का शानदार रिटर्न दिया है।
सुबह 10:04 बजे के करीब, जब सेंसेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहा था, तब भी एसबीआई का शेयर मजबूती के साथ ₹1,023.75 के स्तर पर बना हुआ था।
1. कर्ज देने की रफ्तार में जबरदस्त बढ़ोतरी बैंक के प्रदर्शन का सबसे बड़ा पैमाना यह होता है कि वह कितना कर्ज बांट रहा है। सितंबर 2025 (वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही) के अंत तक, एसबीआई का नेट एडवांसेज (Net Advances) सालाना आधार पर 12.7% बढ़कर ₹44.19 ट्रिलियन हो गया है। यह आंकड़ा एक साल पहले ₹39.20 ट्रिलियन था। खास बात यह है कि यह ग्रोथ केवल एक क्षेत्र से नहीं आई है, बल्कि रिटेल पर्सनल लोन, खेती-किसानी (एग्रीकल्चर), छोटे और मझोले उद्योगों (SME) और बड़े कॉर्पोरेट सेक्टर—हर जगह से मांग में तेजी देखी गई है।
2. सुधरती हुई एसेट क्वालिटी बैंक के लिए एक और अच्छी खबर उसकी एसेट क्वालिटी में सुधार है। दूसरी तिमाही में बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) अनुपात सालाना आधार पर 5 आधार अंक (basis points) घटकर 0.19% पर आ गया है। एनपीए में गिरावट का सीधा मतलब है कि बैंक द्वारा दिया गया कर्ज डूबने की संभावना कम हो रही है और एसेट्स की गुणवत्ता बेहतर हो रही है।
3. भविष्य के लिए मजबूत उम्मीदें ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का मानना है कि एसबीआई ने पिछले कुछ वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया है। बैंक का बिजनेस और रेवेन्यू लगातार बढ़ रहा है, जबकि क्रेडिट लागत नियंत्रण में है। बैंक प्रबंधन को पूरा भरोसा है कि वे लोन ग्रोथ के मामले में इंडस्ट्री को पछाड़ देंगे। वित्त वर्ष 2026 के लिए बैंक ने 13-14% की लोन ग्रोथ का लक्ष्य रखा है, जो मुख्य रूप से रिटेल, एग्रीकल्चर और एमएसएमई (RAM) सेगमेंट से प्रेरित होगा।
इसके अलावा, बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) का आउटलुक भी स्थिर बना हुआ है और इसके 3% से ऊपर रहने की उम्मीद है। हालांकि, आरबीआई द्वारा दरों में कटौती का असर कुछ हद तक दिख सकता है, लेकिन सीआरआर (CRR) में कटौती से मिलने वाले फायदे इसे संतुलित कर सकते हैं।
4. सब्सिडियरी कंपनी का आईपीओ और वैल्यू अनलॉकिंग एसबीआई के शेयरों में जोश भरने वाली एक और बड़ी खबर इसकी सब्सिडियरी कंपनी का आईपीओ है। नवंबर 2025 में, बैंक ने एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड (SBIFML) में अपनी 6.30% हिस्सेदारी यानी लगभग 3.2 करोड़ शेयर आईपीओ के जरिए बेचने का फैसला किया था।
यह आईपीओ एसबीआई और उसके पार्टनर अमुंडी (Amundi) द्वारा बनाई गई वैल्यू को अनलॉक करेगा। भारतीय शेयर बाजार में बढ़ती गहराई और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए, विश्लेषकों का मानना है कि एसबीआई की सब्सिडियरी कंपनियों की वैल्यूएशन में और सुधार हो सकता है। इससे एसबीआई के शेयरधारकों को लंबी अवधि में फायदा मिलने की उम्मीद है।
विश्लेषकों को उम्मीद है कि स्लिपेज (slippages) यानी नए खराब कर्ज सामान्य स्तर पर रहेंगे और अनसिक्योर्ड लोन को लेकर कोई नई चिंता सामने नहीं आएगी। नतीजों में प्रबंधन द्वारा नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और लोन ग्रोथ को लेकर दी जाने वाली कमेंट्री सबसे महत्वपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर, भारतीय स्टेट बैंक के शेयर में आई यह तेजी मजबूत फंडामेंटल्स, एसेट क्वालिटी में सुधार और भविष्य की बेहतर संभावनाओं का परिणाम है। बाजार की अस्थिरता के बीच एसबीआई का यह प्रदर्शन निश्चित रूप से निवेशकों के लिए राहत और खुशी की खबर है। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय लेना हमेशा समझदारी भरा कदम होता है।
बाजार से बेहतर प्रदर्शन (Outperforming the Market)
अगर हम पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें, तो एसबीआई ने बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स को काफी पीछे छोड़ दिया है। जहां एक ओर पिछले एक महीने में बीएसई सेंसेक्स में लगभग 1.6% की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर एसबीआई ने इसी अवधि में 6% की शानदार रैली दिखाई है। थोड़ा और पीछे जाएं तो पिछले छह महीनों की तस्वीर और भी चमकदार है। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स में मात्र 1.95% की बढ़त हुई, जबकि एसबीआई के शेयर ने 27% की छलांग लगाई।सुबह 10:04 बजे के करीब, जब सेंसेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहा था, तब भी एसबीआई का शेयर मजबूती के साथ ₹1,023.75 के स्तर पर बना हुआ था।
आखिर क्यों आ रही है एसबीआई के शेयरों में इतनी तेजी?
इस सरकारी बैंक के शेयरों में आई इस तूफानी तेजी के पीछे कोई हवा-हवाई कारण नहीं, बल्कि ठोस वित्तीय नतीजे और भविष्य की मजबूत योजनाएं हैं। आइए इन कारणों को विस्तार से समझते हैं:1. कर्ज देने की रफ्तार में जबरदस्त बढ़ोतरी बैंक के प्रदर्शन का सबसे बड़ा पैमाना यह होता है कि वह कितना कर्ज बांट रहा है। सितंबर 2025 (वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही) के अंत तक, एसबीआई का नेट एडवांसेज (Net Advances) सालाना आधार पर 12.7% बढ़कर ₹44.19 ट्रिलियन हो गया है। यह आंकड़ा एक साल पहले ₹39.20 ट्रिलियन था। खास बात यह है कि यह ग्रोथ केवल एक क्षेत्र से नहीं आई है, बल्कि रिटेल पर्सनल लोन, खेती-किसानी (एग्रीकल्चर), छोटे और मझोले उद्योगों (SME) और बड़े कॉर्पोरेट सेक्टर—हर जगह से मांग में तेजी देखी गई है।
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2. सुधरती हुई एसेट क्वालिटी बैंक के लिए एक और अच्छी खबर उसकी एसेट क्वालिटी में सुधार है। दूसरी तिमाही में बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) अनुपात सालाना आधार पर 5 आधार अंक (basis points) घटकर 0.19% पर आ गया है। एनपीए में गिरावट का सीधा मतलब है कि बैंक द्वारा दिया गया कर्ज डूबने की संभावना कम हो रही है और एसेट्स की गुणवत्ता बेहतर हो रही है।
3. भविष्य के लिए मजबूत उम्मीदें ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का मानना है कि एसबीआई ने पिछले कुछ वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया है। बैंक का बिजनेस और रेवेन्यू लगातार बढ़ रहा है, जबकि क्रेडिट लागत नियंत्रण में है। बैंक प्रबंधन को पूरा भरोसा है कि वे लोन ग्रोथ के मामले में इंडस्ट्री को पछाड़ देंगे। वित्त वर्ष 2026 के लिए बैंक ने 13-14% की लोन ग्रोथ का लक्ष्य रखा है, जो मुख्य रूप से रिटेल, एग्रीकल्चर और एमएसएमई (RAM) सेगमेंट से प्रेरित होगा।
इसके अलावा, बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) का आउटलुक भी स्थिर बना हुआ है और इसके 3% से ऊपर रहने की उम्मीद है। हालांकि, आरबीआई द्वारा दरों में कटौती का असर कुछ हद तक दिख सकता है, लेकिन सीआरआर (CRR) में कटौती से मिलने वाले फायदे इसे संतुलित कर सकते हैं।
4. सब्सिडियरी कंपनी का आईपीओ और वैल्यू अनलॉकिंग एसबीआई के शेयरों में जोश भरने वाली एक और बड़ी खबर इसकी सब्सिडियरी कंपनी का आईपीओ है। नवंबर 2025 में, बैंक ने एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड (SBIFML) में अपनी 6.30% हिस्सेदारी यानी लगभग 3.2 करोड़ शेयर आईपीओ के जरिए बेचने का फैसला किया था।
यह आईपीओ एसबीआई और उसके पार्टनर अमुंडी (Amundi) द्वारा बनाई गई वैल्यू को अनलॉक करेगा। भारतीय शेयर बाजार में बढ़ती गहराई और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए, विश्लेषकों का मानना है कि एसबीआई की सब्सिडियरी कंपनियों की वैल्यूएशन में और सुधार हो सकता है। इससे एसबीआई के शेयरधारकों को लंबी अवधि में फायदा मिलने की उम्मीद है।
तीसरे क्वार्टर के नतीजों से क्या हैं उम्मीदें?
अब निवेशकों की नजरें अक्टूबर से दिसंबर क्वार्टर(Q3FY26) के नतीजों पर टिकी हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि कम ट्रेजरी आय के कारण एसबीआई का ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर 7% बढ़ सकता है। हालांकि, फंड्स की लागत बढ़ने के कारण नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में वृद्धि थोड़ी धीमी (लगभग 5%) रह सकती है।विश्लेषकों को उम्मीद है कि स्लिपेज (slippages) यानी नए खराब कर्ज सामान्य स्तर पर रहेंगे और अनसिक्योर्ड लोन को लेकर कोई नई चिंता सामने नहीं आएगी। नतीजों में प्रबंधन द्वारा नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और लोन ग्रोथ को लेकर दी जाने वाली कमेंट्री सबसे महत्वपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर, भारतीय स्टेट बैंक के शेयर में आई यह तेजी मजबूत फंडामेंटल्स, एसेट क्वालिटी में सुधार और भविष्य की बेहतर संभावनाओं का परिणाम है। बाजार की अस्थिरता के बीच एसबीआई का यह प्रदर्शन निश्चित रूप से निवेशकों के लिए राहत और खुशी की खबर है। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय लेना हमेशा समझदारी भरा कदम होता है।









