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बजट 2026: पुरानी टैक्स व्यवस्था पर टिकी सबकी नजरें, 1 फरवरी को आ सकता है बड़ा फैसला

केंद्रीय बजट 2026 में अब बस कुछ ही हफ्ते बचे हैं। 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में अपना लगातार 9वां बजट पेश करेंगी। पिछले कुछ सालों में हमने देखा है कि सरकार का पूरा ध्यान टैक्स प्रणाली को सरल बनाने और सुधारों को लागू करने पर रहा है। यही वजह है कि इस बार भी देशभर के टैक्सपेयर्स की नजरें बजट के पिटारे पर टिकी हैं।
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बजट 2020 में हुई थी नई टैक्स व्यवस्था की शुरुआत

सरकार ने नई इनकम टैक्स व्यवस्था की शुरुआत बजट 2020 में की थी। शुरुआत में इसमें लोगों ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई, लेकिन समय के साथ सरकार ने इसे और भी आकर्षक बना दिया है। कई बड़े बदलावों के बाद अब लोग तेजी से नई व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में पुरानी टैक्स व्यवस्था को लेकर कोई निर्णायक कदम उठाया जा सकता है।


नई टैक्स व्यवस्था में क्या है खास?

नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स की दरें तो कम हैं, लेकिन इसमें पुरानी व्यवस्था की तरह निवेश पर मिलने वाली अधिकांश छूटें नहीं मिलतीं। यह सिस्टम उन लोगों के लिए बनाया गया है जो टैक्स बचाने के लिए निवेश के झंझटों में नहीं पड़ना चाहते। नई व्यवस्था चुनने वालों को सेक्शन 80C, 80D और 24B जैसी लोकप्रिय कटौतियों का लाभ नहीं मिलता, जो पुरानी व्यवस्था की जान हैं।


क्यों बढ़ रहा है नई टैक्स व्यवस्था का आकर्षण?

सरकार ने नई व्यवस्था को लोकप्रिय बनाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। पिछले बजट में वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया था। इसके अलावा, अब 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। टैक्स स्लैब में हुए बदलावों के बाद मूल छूट की सीमा भी अब 4 लाख रुपये सालाना हो चुकी है।

टैक्सपेयर्स का बदलता रुझान

सरकारी आंकड़ों और विशेषज्ञों के अनुसार, मूल्यांकन वर्ष 2023-24 में लगभग 72 प्रतिशत व्यक्तिगत करदाताओं ने नई टैक्स व्यवस्था को चुना था। यह आंकड़ा अब बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। यह स्पष्ट संकेत है कि लोग धीरे-धीरे कम टैक्स दरों वाली इस सरल प्रणाली को अपना रहे हैं।


पुरानी टैक्स व्यवस्था का क्या होगा?

एक तरफ जहां नई व्यवस्था को लगातार निखारा जा रहा है, वहीं पुरानी टैक्स व्यवस्था में लंबे समय से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। टैक्सपेयर्स सालों से सेक्शन 80C और 80D की लिमिट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने इस दिशा में फिलहाल कोई कदम नहीं उठाया है। जानकारों का कहना है कि सरकार पुरानी व्यवस्था को एकदम से खत्म नहीं करेगी, बल्कि इसमें नए फायदे न देकर इसे धीरे-धीरे अप्रासंगिक बना देगी ताकि लोग खुद ही नई व्यवस्था की ओर मुड़ जाएं।