Tax Saving Hacks: इन 6 तरीकों से हर साल बचाएं ₹2.5 लाख तक टैक्स, जानिए पूरी डिटेल

अगर आप इस साल अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह जानकारी आपके बहुत काम आ सकती है। अक्सर देखा जाता है कि कई टैक्सपेयर्स रिटर्न तो दाखिल कर देते हैं, लेकिन सही डिडक्शन क्लेम करना भूल जाते हैं। इस वजह से उन्हें जरूरत से ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ता है। आज हम ऐसे छह खास टैक्स डिडक्शन के बारे में बात कर रहे हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। ध्यान रखें कि अगर आपने नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) चुनी है, तो आप इन डिडक्शन का लाभ नहीं उठा पाएंगे। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले पुरानी और नई, दोनों टैक्स व्यवस्थाओं की तुलना जरूर कर लें।
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इन सरकारी योजनाओं में निवेश कर बचाएं लाखों रुपये का टैक्स

पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) का विकल्प चुनकर आप अलग-अलग टैक्स सेविंग स्कीम्स में निवेश कर सकते हैं और आसानी से डिडक्शन का फायदा उठा सकते हैं। इस समय सरकार की ओर से कई ऐसी निवेश योजनाएं चलाई जा रही हैं जो सुरक्षित होने के साथ-साथ शानदार रिटर्न और टैक्स बचत का दोहरा फायदा देती हैं। इनमें पीपीएफ, एनपीएस, एसएसवाई, ईएलएसएस और एससीएसएस जैसी योजनाएं काफी लोकप्रिय हैं।


ईएलएसएस (ELSS - Equity Linked Savings Scheme)

ईएलएसएस एक तरह का इक्विटी म्यूचुअल फंड होता है। इस स्कीम में निवेश करके आप भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं और साथ ही लाखों रुपये का टैक्स भी बचा सकते हैं। इसमें किए गए निवेश पर 3 साल का लॉक-इन पीरियड लागू होता है। इस योजना के तहत आप इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं। इसके अलावा, ईएलएसएस में निवेश से मिलने वाला ₹1 लाख तक का रिटर्न पूरी तरह टैक्स फ्री होता है।



पीपीएफ (PPF - Public Provident Fund) बचत योजना

सार्वजनिक भविष्य निधि यानी पीपीएफ निवेशकों के बीच बेहद लोकप्रिय योजना है। फिलहाल इस स्कीम पर 7.1 प्रतिशत की दर से ब्याज मिल रहा है। पीपीएफ में निवेश करने पर आपको इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। हालांकि, इसमें जमा किया गया पैसा 15 साल के लिए लॉक रहता है, यानी 15 साल की अवधि पूरी होने से पहले पूरी राशि निकालने का प्रावधान नहीं है।


सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)

सुकन्या समृद्धि योजना खास तौर पर बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए तैयार की गई है। अगर आपकी बेटी की उम्र 10 साल से कम है, तो आप उसके नाम पर यह खाता खुलवा सकते हैं। इस योजना में 8.2 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जा रहा है। टैक्सपेयर्स इस स्कीम के जरिए धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स बचत कर सकते हैं। टैक्स बचाने के साथ-साथ यह योजना लंबी अवधि में लाखों रुपये का बड़ा फंड बनाने में भी मदद करती है।



नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)

नेशनल पेंशन सिस्टम मुख्य रूप से रिटायरमेंट के बाद की वित्तीय सुरक्षा के लिए बनाई गई है। इसमें निवेश करने पर धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स बचत तो होती ही है, साथ ही धारा 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 का अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन भी मिलता है। आप महज ₹1,000 से एनपीएस में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। 18 से 65 वर्ष की आयु का कोई भी भारतीय नागरिक इस योजना का लाभ उठा सकता है।


माता-पिता को किराया देकर एचआरए क्लेम करें

अगर आप जिस घर में रह रहे हैं वह आपके माता-पिता के नाम पर पंजीकृत है और आप उन्हें वास्तव में हर महीने किराया देते हैं, तो आप एचआरए (HRA) का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए किराए का लेनदेन पूरी तरह वास्तविक होना चाहिए। यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि आपके द्वारा दिया गया किराया आपके माता-पिता की कर योग्य आय (Taxable Income) में गिना जा सकता है।


माता-पिता के नाम पर निवेश कर टैक्स प्लानिंग

यदि आपके माता-पिता की आय कम है और वे निचले टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो उनके नाम पर सही नियमों के तहत निवेश करना एक समझदारी भरी टैक्स रणनीति हो सकती है। इसके लिए आपको इनकम टैक्स के वैध नियमों और 'क्लबिंग ऑफ इनकम' के प्रावधानों का ध्यान रखना होगा।


टैक्स प्लानिंग और टैक्स चोरी में क्या अंतर है?

टैक्स प्लानिंग का मतलब इनकम टैक्स कानूनों के तहत मिलने वाली सभी वैध छूटों और डिडक्शन का सही इस्तेमाल करके अपनी टैक्स देनदारी को कम करना है। वहीं दूसरी ओर, अपनी आय छिपाना, फर्जी बिल लगाना, गलत जानकारी देना या झूठे निवेश का दावा करना टैक्स चोरी की श्रेणी में आता है। टैक्स चोरी एक गैर-कानूनी अपराध है, जिसके लिए जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।



आपके लिए कौन सी टैक्स व्यवस्था बेहतर है?

यह पूरी तरह आपकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। अगर आपके पास धारा 80C के तहत निवेश, हेल्थ इंश्योरेंस, एचआरए, होम लोन और एनपीएस जैसे कई डिडक्शन के विकल्प मौजूद हैं, तो आपके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है। इसके विपरीत, यदि आपके पास निवेश के विकल्प कम हैं और आप बिना किसी कागजी झंझट के आसान प्रक्रिया चाहते हैं, तो नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। इसमें कम टैक्स रेट के साथ ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन और एम्प्लॉयर एनपीएस योगदान पर छूट मिलती है।