अगर आप नौकरीपेशा हैं और हर महीने आपकी सैलरी से भी पीएफ (PF) कटता है, तो यह बेहद काम की और राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने 16 सितंबर 2026 को ईपीएफओ (EPFO) की वेतन सीमा को बढ़ाने के बड़े फैसले को अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसे 17 सितंबर 2026 से देश भर में लागू भी कर दिया गया है। सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य मकसद यह है कि ज्यादा से ज्यादा कर्मचारी पीएफ के दायरे में आ सकें और अपने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक मजबूत फंड तैयार कर सकें।
सिर्फ इतना ही नहीं, इसके साथ ही ईपीएफओ के तहत मिलने वाले ई-डी-एल-आई यानी एम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) बीमा कवर को भी बढ़ाने की तैयारी है। यानी अब कर्मचारियों को भविष्य की बचत के साथ-साथ पहले से कहीं ज्यादा मोटा बीमा सुरक्षा कवच मिलने वाला है।
15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई वेतन सीमा
आपको बता दें कि ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज के लिए तय की गई वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 25,000 रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि यदि किसी कर्मचारी की सैलरी 20,000 रुपये महीना है, तो उसे भी अब अनिवार्य रूप से ईपीएफओ के दायरे में शामिल किया जाएगा।
हालांकि, पुराने नियमों के मुताबिक जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से अधिक होती थी, उन्हें इस दायरे में नहीं रखा जाता था। इस बड़े बदलाव के बाद अब ईडीएलआई (EDLI) के तहत मिलने वाले बीमा कवर में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिलने वाली है।
कितना मिलता है फिलहाल बीमा कवर और अब कितना होगा फायदा?
अगर बात करें मौजूदा व्यवस्था की, तो ईडीएलआई स्कीम के तहत फिलहाल पात्र ईपीएफओ सदस्यों को अधिकतम 7 लाख रुपये तक का मुफ्त बीमा कवर मिलता है। लेकिन सबसे खास बात यह है कि जब नई वेतन सीमा ईडीएलआई पर भी पूरी तरह लागू की जाएगी, तो इस 7 लाख रुपये के बीमा कवर में भी सीधी बढ़ोतरी होगी।
जानकारों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुफ्त बीमा कवर को 7 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 10.5 लाख रुपये तक किया जा सकता है। यानी अब कर्मचारियों और उनके परिवारों को पहले के मुकाबले काफी ज्यादा आर्थिक सुरक्षा मिलने की पूरी उम्मीद है।
क्या है EDLI बीमा कवर और किसे मिलता है इसका लाभ?
जिन भी कर्मचारियों का पीएफ कटता है, उन्हें इस ईडीएलआई (EDLI) कवर का लाभ अपने आप मिल जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस बीमा का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों को अलग से कोई भी इंश्योरेंस पॉलिसी या प्रीमियम खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है।
सबसे शानदार बात तो यह है कि इस बीमा कवर के लिए कर्मचारियों को अपनी जेब से 1 रुपया भी नहीं देना होता है, बल्कि इस पूरे बीमा का योगदान पूरी तरह से कंपनी यानी नियोक्ता (Employer) की तरफ से किया जाता है। यदि दुर्भाग्यवश नौकरी के दौरान ही किसी कर्मचारी की आकस्मिक मौत हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में ईडीएलआई के नियमों के तहत उसके परिवार या नॉमिनी को यह भारी-भरकम बीमा राशि सौंप दी जाती है। हालांकि अभी तक कर्मचारियों को अधिकतम 7 लाख रुपये तक का ही बीमा मिलता था, लेकिन 25,000 रुपये की नई वेतन सीमा लागू होने पर यह बीमा राशि बढ़कर अधिकतम 10.5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।