त्योहारी सीजन से पहले सोना-चांदी पर बड़ा फैसला, क्या अब चुकाने होंगे ज्यादा पैसे?

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सोना, चांदी और प्लैटिनम खरीदने की सोच रहे ग्राहकों और निवेशकों के लिए टैक्स नियमों से जुड़ा एक बेहद अहम बदलाव सामने आया है। केंद्र सरकार ने बैंकों और अधिकृत एजेंसियों को कीमती धातुओं के आयात (import) पर मिलने वाली अग्रिम आईजीएसटी (IGST) छूट को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब इन सभी आयातों पर कस्टम्स क्लीयरेंस के वक्त 3 प्रतिशत आईजीएसटी (Integrated Goods and Services Tax) चुकाना अनिवार्य कर दिया गया है।

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राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक, देश के बैंक 1 अप्रैल 2026 से ही इस टैक्स का भुगतान कर रहे हैं, और सरकार ने हाल ही में 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को भी इस बड़े बदलाव की आधिकारिक जानकारी दे दी है।

पहले क्या था नियम और अब क्या हुआ बदलाव?

साल 2017 में जब देश में जीएसटी लागू हुआ था, तब सोने के आयात पर बैंकों को अग्रिम आईजीएसटी भुगतान से बड़ी राहत दी गई थी। समय के साथ इस सुविधा का दायरा बढ़ाकर अन्य कीमती धातुओं को भी इसमें शामिल कर लिया गया था। इसके तहत बैंक और नामित एजेंसियां बिना किसी अग्रिम आईजीएसटी का भुगतान किए आसानी से सोना, चांदी और प्लैटिनम देश में मंगा सकती थीं।

लेकिन अब इस छूट को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब आयात करने वाले बैंकों को कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3 प्रतिशत आईजीएसटी की पूरी रकम पहले से ही अपने पास उपलब्ध रखनी होगी।

सरकार को क्यों उठानी पड़ी यह कदम उठाने की जरूरत?

सरकार का साफ कहना है कि इस बदलाव के पीछे का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग माध्यमों से होने वाले आयात पर टैक्स व्यवस्था को पूरी तरह एक समान बनाना है। पहले बैंकों के जरिए आयात करने वाले कारोबारियों को अग्रिम टैक्स भुगतान के मामले में कुछ खास सहूलियतें मिलती थीं।

अब सरकार चाहती है कि पारंपरिक बैंकों और दूसरे आयात माध्यमों के बीच इस अंतर को खत्म किया जाए। गुजरात के गिफ्ट सिटी (GIFT City) में स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज’ (IIBX) जैसे संगठित प्लेटफॉर्म भी कीमती धातुओं के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा हैं। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि टैक्स के नियमों की वजह से किसी एक खास आयात माध्यम को अनुचित लाभ न मिले।

बैंकों और आयातकों की कार्यशील पूंजी पर पड़ेगा असर?

इस नए टैक्स बदलाव का सबसे बड़ा असर आयातकों की नकदी (liquidity) और वर्किंग कैपिटल पर पड़ सकता है।

हालांकि, नियमों के मुताबिक पात्र कारोबारियों को आईटीसी (Input Tax Credit) के जरिए चुकाए गए टैक्स का रिफंड या लाभ आगे चलकर मिल जाता है, लेकिन टैक्स का भुगतान पहले करना होगा और उसका समायोजन बाद में होगा।

इस प्रक्रिया की वजह से आयातकों की एक बड़ी रकम अस्थायी रूप से फंस सकती है। जो बैंक या बड़ी एजेंसियां बड़े पैमाने पर सोना-चांदी का आयात करती हैं, उन्हें अब ज्यादा कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ेगी। अगर इसके लिए उन्हें अतिरिक्त फंड जुटाना पड़ा, तो उनकी वित्तीय लागत (financial cost) में भी इजाफा हो सकता है।

क्या आम ग्राहकों को 3% महंगा मिलेगा सोना और चांदी?

यह सबसे बड़ा सवाल है जो हर खरीदार के मन में आ रहा है। जानकारों का मानना है कि इस छूट के खत्म होने का यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि खुदरा बाजार में सोना और चांदी सीधे तौर पर 3 प्रतिशत महंगे बिकने लगेंगे। सोना और चांदी की खुदरा कीमतें कई दूसरे कारकों पर निर्भर करती हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव, रुपये और डॉलर की विनिमय दर (exchange rate) और अन्य सीमा शुल्क (customs duty)।

हालांकि, आयात की लागत बढ़ने या कारोबारियों की नकदी पर दबाव आने से पूरी सप्लाई चेन में खर्च थोड़ा बढ़ सकता है।

बैंक और आयातक इस बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा अपने मार्जिन या खुदरा कीमतों के जरिए आगे बढ़ा सकते हैं। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कारोबारी बढ़ी हुई लागत का कितना बोझ ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।

त्योहारी सीजन और शादियों के समय क्यों है यह बदलाव अहम?

भारत में त्योहारी सीजन और शादियों के दौर में सोने-चांदी की मांग में जबरदस्त तेजी देखने को मिलती है। ऐसे समय में आयात की लागत और बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव आम खरीदारों की जेब पर सीधा असर डालता है। इसके अलावा कीमती धातुओं का आयात देश के विदेशी मुद्रा (foreign exchange) खर्च और व्यापार घाटे से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

सरकार की यह नीति संगठित कारोबार को बढ़ावा देने और सभी के लिए एक समान टैक्स कानून लागू करने की दिशा में एक अहम कदम है।

आम खरीदारों के लिए क्या है जरूरी सलाह?

फिलहाल केवल अग्रिम आईजीएसटी छूट खत्म होने के आधार पर यह घबरा जाना सही नहीं है कि सोना-चांदी एकदम से 3% महंगा हो गया है। अपनी पसंद के आभूषण या बुलियन की खरीदारी करने से पहले बाजार के लाइव भाव, मेकिंग चार्ज और उस पर लगने वाले टैक्स की पूरी जानकारी जरूर ले लें। कीमतों पर इसका अंतिम असर अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख और कारोबारियों के रिएक्शन पर ही निर्भर करेगा।