विदेश पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लेने जा रहे हैं? ब्याज, मोरेटोरियम और ईएमआई का पूरा गणित पहले समझ लें
विदेश में पढ़ाई का सपना बड़ा होता है और उसके साथ जुड़ा एजुकेशन लोन भी अक्सर जीवन का पहला बड़ा कर्ज होता है। बैंक की चमकदार पेशकश देखकर कई परिवार सिर्फ स्वीकृत रकम पर ध्यान देते हैं, जबकि असली खेल ब्याज, मोरेटोरियम अवधि और ईएमआई के गणित में छिपा होता है। अगर ये तीनों बातें दस्तखत से पहले समझ ली जाएं, तो बाद में किस्त का बोझ हैरान नहीं करता। ध्यान रखें, हर बैंक की शर्तें और ब्याज दरें अलग होती हैं, यहां दिया गणित उदाहरण के आंकड़ों से समझाया गया है।
मोरेटोरियम वह शुरुआती अवधि होती है जिसमें बैंक किस्त चुकाने की मोहलत देता है। आम तौर पर यह अवधि पाठ्यक्रम की पढ़ाई पूरी होने तक और उसके बाद कुछ समय, कई मामलों में करीब 1 साल तक, मिलती है, ताकि छात्र नौकरी खोज सके। लेकिन समझने वाली बात यह है कि इस दौरान ब्याज रुकता नहीं है। आमतौर पर इस अवधि में मूलधन पर साधारण ब्याज जुड़ता रहता है। उदाहरण के लिए, 10 लाख रुपये के लोन पर 10 प्रतिशत वार्षिक की उदाहरण दर से 3 साल का ब्याज करीब 3 लाख रुपये बनता है।
अब किस्त का हिसाब देखें। उदाहरण के लिए, यदि मोरेटोरियम का ब्याज जुड़कर रकम 13 लाख हो गई और उसे 10 प्रतिशत की उदाहरण दर पर 7 साल में चुकाना है, तो मासिक किस्त करीब 21 हजार 582 रुपये बनेगी। दूसरी स्थिति में, अगर परिवार मोरेटोरियम के दौरान ब्याज चुकाता रहे और मूल रकम 10 लाख ही रहे, तो उसी दर पर 5 साल की किस्त करीब 21 हजार 247 रुपये होगी और लोन जल्दी भी खत्म होगा।
लोन लेने से पहले प्रसंस्करण शुल्क, बीमा प्रभार और समय से पहले चुकाने के नियम लिखित में लें। ब्याज दर स्थिर है या समय के साथ बदलने वाली, यह स्पष्ट करें।