केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, देशभर के ग्रामीण मजदूरों की बल्ले-बल्ले
देशभर के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मजदूर भाई-बहनों के लिए केंद्र सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों को एक बेहद शानदार और बड़ी राहत देने की तैयारी कर ली है। सरकार ने ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025’ के तहत मजदूरी की बिल्कुल नई दरों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
सरकार द्वारा बढ़ाई गई ये नई दरें आज यानी 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होने जा रही हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि इस ऐतिहासिक बदलाव से न सिर्फ ग्रामीण मजदूरों की दैनिक आमदनी में बड़ा सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार की पूरी व्यवस्था को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। इस नई व्यवस्था के तहत सरकार ने पहली बार ग्रामीण रोजगार योजना में 300 रुपये प्रतिदिन की न्यूनतम बेस मजदूरी तय कर दी है, यानी अब देश के किसी भी कोने में मजदूरों को इससे कम मजदूरी नहीं दी जाएगी।
सरकार ने इसे श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा और उनके श्रम के सम्मान की दिशा में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम बताया है।अब 100 नहीं, पूरे 125 दिनों तक काम मिलने की पक्की गारंटीइस नई सरकारी योजना में जो सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा राहत देने वाला बदलाव किया गया है, वो है काम के दिनों की संख्या। अब तक ग्रामीण परिवारों को साल भर में पहले केवल 100 दिनों की रोजगार गारंटी दी जाती थी, लेकिन अब सरकार ने इसे सीधे बढ़ाकर पूरे 125 दिन कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि गांव-देहात में रहने वाले मजदूर परिवारों को सालभर में अब पहले के मुकाबले 25 दिन ज्यादा काम मिलने का पक्का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आएगा और उन्हें पैसों की तंगी से नहीं जूझना पड़ेगा।
नई मजदूरी दरें लागू होने के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले ग्रामीण मजदूरों की दैनिक कमाई में बंपर इजाफा होने जा रहा है। सरकार से मिली जानकारी के मुताबिक, कई राज्यों में मजदूरी की दरों में सीधे 15 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद अब देश में औसत दैनिक मजदूरी का आंकड़ा करीब 327 रुपये से अधिक हो गया है, जबकि कानूनन न्यूनतम मजदूरी को किसी भी स्थिति के लिए 300 रुपये प्रतिदिन फिक्स कर दिया गया है।