जमीन-आसमान छूने लगे मकानों के दाम! देश के 75 शहरों में घरों की बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड, 9 लाख करोड़ से ज्यादा का हुआ बिजनेस
नई दिल्ली: अगर आप भी पिछले कुछ समय से अपने सपनों का आशियाना खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है. देश के प्रॉपर्टी बाजार में इस वक्त एक ऐसी तूफानी रफ्तार देखने को मिल रही है, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. मंदी और आर्थिक चिंताओं की तमाम बातों को दरकिनार करते हुए भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में एक बंपर बूम आया है. देश के 75 प्रमुख शहरों में बीते वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान घरों की बिक्री की कुल वैल्यू में 16 प्रतिशत का भारी-भरकम उछाल आया है.
रियल एस्टेट रेटिंग एंड रिसर्च फर्म ‘लियासेस फोरास’ (Liasas Foras) द्वारा सोमवार को जारी किए गए ताजा और चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान देश भर में कुल 9.33 लाख करोड़ रुपये के घर बिके हैं. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि ग्राहकों द्वारा खरीदे गए मकानों की कुल संख्या में मामूली एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में भले ही घरों की संख्या थोड़ी कम बिकी हो, लेकिन उनके दामों में हुई बढ़ोतरी की वजह से कुल बिजनेस का आंकड़ा आसमान छू गया है. आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में बिकने वाले मकानों की संख्या 7,09,793 यूनिट रही, जो इससे पिछले साल 7,19,029 यूनिट थी.
वहीं दूसरी तरफ, इन 75 शहरों में नए मकानों की सप्लाई 10 प्रतिशत बढ़कर 6,20,842 यूनिट पर पहुंच गई है. बाजार में मकानों की भरमार, बिना बिके घरों का आंकड़ा भी बढ़ालियासेस फोरास की रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में चल रही आर्थिक हलचलों के बावजूद भारत के 75 से ज्यादा बड़े शहरों में हाउसिंग सेल्स का स्तर मजबूत और स्थिर बना हुआ है. नए घरों की सप्लाई में सालाना आधार पर करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अब बाजार में नए मकानों की आवक इतनी ज्यादा हो गई है कि बिना बिके हुए मकानों (Unsold Inventory) की संख्या भी 13 प्रतिशत बढ़ गई है.
अगर बात बड़े महानगरों की करें, तो देश के टॉप आठ शहरों में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल बिक्री मामूली रूप से घटकर 5,07,850 यूनिट रह गई, जो पिछले साल 5,09,211 यूनिट थी. वहीं दूसरी और तीसरी श्रेणी के छोटे व मध्यम शहरों (टियर-II और टियर-III) में भी मकानों की बिक्री में चार प्रतिशत की हल्की गिरावट देखी गई है और यह आंकड़ा 2,09,818 यूनिट से कम होकर 2,01,943 यूनिट पर आ गया है.
इस पूरी रिपोर्ट में देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों का दबदबा साफ नजर आ रहा है. देश के टॉप आठ महानगरों में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) पहले पायदान पर काबिज है. पूरे भारत में होने वाली कुल एनुअल सेल्स में अकेले मुंबई की हिस्सेदारी 23.7 प्रतिशत रही है, जिसने सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की है. इस लिस्ट में टेक सिटी बेंगलुरु दूसरे स्थान पर रहा, जिसकी देश के कुल प्रॉपर्टी बाजार में 9.9 प्रतिशत की हिस्सेदारी है.
हालांकि, इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम पुणे का रहा. पुणे शहर में बिक्री के लिए नए मकानों की भारी सप्लाई मौजूद थी और वह इस मामले में दूसरे नंबर पर था, इसके बावजूद वहां घरों की सालाना बिक्री में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो बिल्डर्स के लिए चिंता का विषय है. लियासेस फोरस ने अपनी रिपोर्ट के आखिर में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (Housing Price Index) में भी सालाना 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, यानी घर खरीदना पहले से महंगा हुआ है. आपको बता दें कि देश के इन 75 शहरों के प्रॉपर्टी बाजार को चमकाने में लगभग 18,000 रियल एस्टेट डेवलपर्स दिन-रात काम कर रहे हैं.