'नो रिटर्न, नो सैलरी': हरियाणा शिक्षा विभाग का सख्त आदेश, इन शिक्षकों पर गिरेगी गाज
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों पर राज्य सरकार ने अपना शिकंजा कसना पूरी तरह से शुरू कर दिया है। सरकार की ओर से बार-बार दी जा रही ढील और दो बड़े रिमाइंडर यानी याददिलाने वाले नोटिस जारी होने के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं दिख रहा है। जिन शिक्षकों ने अब तक अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा (Property Return) सरकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं किया है, विभाग अब उनके खिलाफ सबसे सख्त कदम उठाने की पूरी तैयारी में है।
शिक्षा विभाग ने अब पानी सिर से ऊपर जाते देख साफ कर दिया है कि ऐसे लापरवाह और सुस्त कर्मचारियों का अगला वेतन (Salary) तुरंत प्रभाव से रोक दिया जाएगा। विभाग की ओर से इस कड़े फैसले के संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को एक अंतिम चेतावनी पत्र (Final Warning Letter) जारी कर दिया गया है, ताकि जमीनी स्तर पर इस आदेश को तुरंत लागू किया जा सके।
आखिर क्यों उठाना पड़ा शिक्षा विभाग को यह कड़ा कदम?सरकारी नियमों के मुताबिक, सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को हर साल एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी चल और अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना बेहद अनिवार्य होता है।
सरकार का इसके पीछे मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक स्तर पर पूरी पारदर्शिता बनाए रखना और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से लगाम लगाना है। शिक्षा विभाग ने इस नियम का पालन कराने के लिए कर्मचारियों को पहले दो बार बड़े मौके दिए और जरूरी रिमाइंडर भी जारी किए, लेकिन इसके बावजूद सैकड़ों शिक्षकों और प्रशासनिक स्टाफ ने इस आदेश को गंभीरता से नहीं लिया।विभाग के बार-बार दिए गए आदेशों की इस तरह अवहेलना करने पर अब आला अधिकारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। यही वजह है कि शिक्षा विभाग ने ‘नो वर्क, नो पे’ की तर्ज पर अब ‘नो रिटर्न, नो सैलरी’ का बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
अधिकारियों का मानना है कि बिना कड़े कदम उठाए कर्मचारियों की इस लापरवाही को ठीक नहीं किया जा सकता।लापरवाही बरतने पर आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को भी कड़े निर्देशविभाग द्वारा जारी किए गए नए और अंतिम आदेश के मुताबिक, यदि अंतिम तय तारीख तक किसी भी कर्मचारी ने अपना प्रॉपर्टी रिटर्न ऑनलाइन फाइल नहीं किया, तो संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) उस कर्मचारी का मासिक वेतन किसी भी हाल में जारी नहीं कर पाएंगे। इसके लिए सीधे तौर पर डीडीओ की जिम्मेदारी तय की गई है ताकि कोई भी नियम से बच न सके।
शिक्षा विभाग ने इस आदेश को राज्य के सभी डिफाल्टर कर्मचारियों के लिए आखिरी मौका बताया है। उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस अंतिम अवसर के बीत जाने के बाद विभाग की तरफ से कोई नया स्पष्टीकरण या नोटिस जारी नहीं किया जाएगा, बल्कि सीधे तौर पर सैलरी रोकने की दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। ऐसे में अपनी सैलरी को सुरक्षित रखने के लिए शिक्षकों को जल्द से जल्द यह काम निपटाना होगा।