मोदी सरकार के इस फैसले से रॉकेट बने शुगर स्टॉक्स, निवेशकों की जेब में आया अंधा पैसा
मोदी सरकार के एक बड़े फैसले ने शेयर बाजार में तहलका मचा दिया है, खासकर चीनी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। सरकार ने एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिसके बाद से ही शुगर स्टॉक्स पर निवेशक जमकर पैसा बरसा रहे हैं। सरकार के इस मास्टरस्ट्रोक से चीनी मिलों की किस्मत चमकती हुई नजर आ रही है।
सरकार का क्या है वो बड़ा फैसला?दरअसल, सरकार ने 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (जैसे E22, E25, E27 और E30) को एक्साइज ड्यूटी यानी उत्पाद शुल्क से पूरी तरह छूट देने का बड़ा फैसला किया है। सरकार के इस कदम का सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों की चांदी होने वाली है। यही वजह है कि एथेनॉल उत्पादन से जुड़ी देश की बड़ी चीनी कंपनियां अचानक निवेशकों के रडार पर आ गई हैं और उनके शेयरों में तूफानी तेजी देखी जा रही है।
शुगर स्टॉक्स में आई भारी बाढ़, छू रहे हैं नया आसमानइस खबर के बाहर आते ही शेयर बाजार में चीनी कंपनियों के शेयरों ने ऊंची उड़ान भरनी शुरू कर दी। बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयर 2 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 548.55 रुपये के स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं, श्री रेणुका शुगर्स के शेयरों में भी हरियाली छाई हुई है और यह करीब 22 रुपये पर कारोबार कर रहा है। धामपुर शुगर मिल के शेयरों में 2.12 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है और यह 144.32 रुपये पर पहुंच गया है। इसके अलावा बजाज हिन्दुस्तान के शेयर बढ़कर 18.90 रुपये और डालमिया भारत के शेयर 1.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 334.35 रुपये पर पहुंच चुके हैं।
कंपनियों के भारी निवेश का मिलने लगा है मीठा फलआपको बता दें कि धामपुर चीनी मिल्स और त्रिवेणी इंजीनियरिंग जैसी बड़ी कंपनियों ने भविष्य को भांपते हुए पिछले कुछ सालों में अपनी डिस्टिलरी क्षमता को बढ़ाने के लिए भारी-भरकम निवेश किया है। अब जब सरकार ने टैक्स छूट का रास्ता साफ कर दिया है, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) चीनी मिलों से ज्यादा मात्रा में एथेनॉल खरीदेंगी। इसका सीधा फायदा इन कंपनियों की एथेनॉल बिक्री और बंपर कमाई के रूप में देखने को मिलेगा।
आखिर सरकार क्यों दे रही है एथेनॉल पर इतना जोर?इस पूरे कदम के पीछे भारत सरकार की एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही है। सरकार का मुख्य मकसद दूसरे देशों से आने वाले महंगे कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) पर भारत की निर्भरता को कम करना और देश में बने बायोफ्यूल को बढ़ावा देना है। अभी तक देश में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) को प्रमोट किया जा रहा था, लेकिन अब भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E22 से लेकर E30 पेट्रोल के लिए नए कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड जारी कर दिए हैं, जो 15 मई 2026 से लागू हो चुके हैं। इन नए नियमों में एथेनॉल के प्रतिशत, ऑक्टेन लेवल, सल्फर की मात्रा और सुरक्षा मानकों को बेहद बारीकी से तय किया गया है।
देश, किसान और पर्यावरण… सबको होगा बंपर फायदासरकार के इस फैसले से देश को चौतरफा फायदा होने वाला है। एथेनॉल के ज्यादा इस्तेमाल से कच्चे तेल का आयात बिल घटेगा, जिससे देश के करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा बचेगी। इसके साथ ही गन्ना और अनाज उगाने वाले किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलेगा और उनकी आय में भारी बढ़ोतरी होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे गाड़ियों से होने वाला कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जिससे पर्यावरण को भी राहत मिलेगी। सरकार का अंतिम लक्ष्य पेट्रोल में पूरे 30% एथेनॉल मिश्रण के आंकड़े को हासिल करना है।
आम जनता पर क्या होगा इसका असर?बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल इस फैसले से आम उपभोक्ताओं की जेब पर बहुत सीमित असर पड़ेगा। हालांकि, गाड़ियों के माइलेज और इंजन के रख-रखाव को लेकर वाहन मालिकों के मन में कुछ चिंताएं जरूर बनी हुई हैं। लेकिन सरकार की यह टैक्स छूट साफ इशारा करती है कि भारत अब E20 की दहलीज को लांघकर बहुत तेजी से E30 की तरफ कदम बढ़ा रहा है। आने वाले समय में यह बदलाव देश के एनर्जी सेक्टर और शुगर इंडस्ट्री के लिए संजीवनी साबित होने वाला है।
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। यहां सिर्फ शेयरों के प्रदर्शन और सरकारी फैसले की जानकारी दी गई है, यह किसी भी तरह से निवेश की सलाह नहीं है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर कर लें।)