केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! क्या बदलने वाला है रिटायरमेंट का नियम? जानिए क्या है साल में 2 बार सेवानिवृत्ति का पूरा गणित
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों के बीच इन दिनों दो सबसे बड़े मुद्दे बड़ी चर्चा का विषय बने हुए हैं। पहला मुद्दा है आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की आने वाली सिफारिशें और दूसरा मुद्दा है साल में केवल दो बार ही रिटायरमेंट की होने वाली संभावित नई व्यवस्था।
पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और कर्मचारी यूनियनों के बीच यह चर्चा बेहद तेज हो गई है कि भविष्य में कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति यानी रिटायरमेंट उनके जन्म के महीने के आधार पर नहीं की जाएगी।
ऑल इंडिया एनपीएस इम्प्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल का इस विषय पर कहना है कि यदि भविष्य में ऐसी कोई व्यवस्था जमीन पर लागू होती है, तो इसका सीधा और बड़ा लाभ कर्मचारियों के साथ-साथ सरकारी प्रशासन दोनों को मिल सकता है।
आइए इस पूरे उलझे हुए मुद्दे को सात आसान और महत्वपूर्ण सवालों व उनके जवाबों के जरिए बिल्कुल बारीकी से समझते हैं।1. आखिर क्या है साल में दो बार रिटायरमेंट का यह नया प्रस्ताव?वर्तमान में लागू सरकारी नियमों के अनुसार, देश के केंद्रीय कर्मचारी अपने जन्म के महीने के आखिरी दिन ही सेवानिवृत्त होते हैं। इसे आसान भाषा में समझें तो, जनवरी में पैदा होने वाले कर्मचारी जनवरी के अंत में और अगस्त में पैदा होने वाले कर्मचारी अगस्त के अंत में नौकरी से रिटायर हो जाते हैं।
लेकिन, इस प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को दो बड़े ग्रुप में बांटा जा सकता है।
इस सवाल का सीधा और साफ जवाब है— नहीं। अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस नए प्रस्ताव को लेकर किसी भी प्रकार का आधिकारिक आदेश, नोटिफिकेशन या कोई ठोस संकेत जारी नहीं किया गया है।
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा और बंपर फायदा कर्मचारियों को एक्स्ट्रा नौकरी यानी अतिरिक्त सेवा अवधि के रूप में मिल सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी का जन्म जनवरी के महीने में हुआ है, तो वर्तमान नियमों के हिसाब से वह जनवरी के अंत में ही रिटायर हो जाएगा।
लेकिन, अगर यह प्रस्तावित व्यवस्था लागू हो जाती है, तो वह कर्मचारी जून महीने के अंत तक अपनी नौकरी जारी रख सकता है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि उसे पूरे 5 महीनों तक अतिरिक्त वेतन (सैलरी) और अन्य सभी सरकारी सेवा लाभ मिलते रहेंगे। इसी तरह बाकी कर्मचारियों को भी उनकी जन्मतिथि के आधार पर कुछ महीनों की एक्स्ट्रा नौकरी का शानदार फायदा मिल सकता है।
4. क्या इस नए नियम से सरकारी खजाने पर खर्च बढ़ जाएगा?आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम को केवल सरकार पर वित्तीय बोझ या आर्थिक नुकसान के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
दूसरी ओर, यदि कर्मचारी अपने तय समय पर पहले ही रिटायर हो जाते हैं, तो उन खाली पदों को भरने के लिए सरकार को तुरंत नई भर्ती करनी पड़ती है। नई भर्तियों के आयोजन, विज्ञापन और नए कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर भी सरकार का मोटा पैसा खर्च होता है। ऐसे में अतिरिक्त महीनों की सैलरी का खर्च उतना बड़ा नहीं माना जा सकता, जितना यह पहली नजर में दिखाई देता है।
5. इस नई व्यवस्था से सरकार को क्या बड़ा फायदा होने वाला है?इससे विभागों में रिक्त होने वाले पदों की संख्या का अनुमान पहले से होगा, जिससे नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करना, विभागीय योजनाओं को तैयार करना और बजट का सही प्रबंधन करना बेहद आसान हो जाएगा।
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार के विभिन्न छोटे-बड़े विभागों में करीब 55 लाख कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, हर साल लगभग 3 लाख कर्मचारी नौकरी से रिटायर होते हैं।
यदि जून और दिसंबर की दो निश्चित तारीखों वाला यह नया सिस्टम लागू हो जाता है, तो लगभग 1.5 लाख कर्मचारी जून में और ठीक इतने ही कर्मचारी दिसंबर में एक साथ रिटायर होंगे। इससे रिक्तियों का हिसाब-किताब रखना और भर्ती परीक्षाओं की प्लानिंग करना सरकार के लिए बच्चों का खेल हो जाएगा।