पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले? 8वें वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 कड़े प्रस्ताव, बदल जाएगी किस्मत

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देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए वेतन और पेंशन से जुड़े नए नियमों को लेकर हलचल तेज हो गई है. 8वें वेतन आयोग ने चेन्नई में अपनी दो दिनों की बहुत अहम बैठक पूरी कर ली है.

इस बैठक में कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स एसोसिएशनों को अपनी बातें और समस्याएं सीधे आयोग के सामने रखने का एक बेहतरीन अवसर मिला. आयोग जब अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करके केंद्र सरकार को सौंपेगा, उससे पहले यह बातचीत बेहद निर्णायक मानी जा रही है. चेन्नई में हुई इस चर्चा के दौरान पेंशनर्स फोरम ने खुलकर अपनी मांगें रखीं, जिनका सीधा ताल्लुक उनकी आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा हुआ है.

पुरानी पेंशन बहाली बनी सबसे बड़ी मांग

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चेन्नई की इस दो दिवसीय बैठक में पेंशनर्स की तरफ से सबसे जोरदार आवाज पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस (OPS) को फिर से लागू करने के लिए उठाई गई. कर्मचारियों का कहना है कि नई व्यवस्था के मुकाबले पुरानी पेंशन व्यवस्था ही बुढ़ापे का सच्चा सहारा है. लंबे समय से सरकारी सेवा में समर्पित रहने वाले लोगों की यह पुरानी और सबसे प्रमुख मांग रही है. फोरम ने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन से ही सेवा समाप्त होने के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित हो सकती है. इसी वजह से आयोग के सामने सबसे पहला मजबूत तर्क इसी योजना की वापसी को लेकर पेश किया गया.

पेंशन और परिवार पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी की गुहार

बैठक में केवल पुरानी पेंशन ही नहीं, बल्कि मौजूदा पेंशन और परिवार पेंशन की राशि को बढ़ाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई. प्रतिनिधियों का कहना था कि लगातार बढ़ती महंगाई के दौर में वर्तमान पेंशन राशि से परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो रहा है. अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके पीछे आश्रित परिवार को मिलने वाली पेंशन इतनी होनी चाहिए कि वे आत्मसम्मान से अपनी जिंदगी बिता सकें. आयोग से आग्रह किया गया कि वह सरकार को ऐसी सिफारिश भेजे जिससे पेंशनर्स को आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े और उनकी बुनियादी जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें.

कम्यूटेशन रिकवरी और अन्य वित्तीय अड़चनों से राहत की तलाश

पेंशनर्स ने कम्यूटेशन रिकवरी के नियमों को लेकर भी अपनी गहरी चिंता जताई. रिटायरमेंट के समय मिलने वाले कम्यूटेशन की राशि की वसूली से हर महीने मिलने वाली पेंशन पर सीधा असर पड़ता है. फोरम ने मांग की कि इस वसूली की शर्तों और समय सीमा को अधिक आसान व तर्कसंगत बनाया जाए ताकि बुजुर्ग पेंशनर्स के हाथ में हर महीने पर्याप्त पैसा आ सके.

इसके अलावा एमएसीपी (MACP यानी मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) के नियमों में बदलाव करने की बात कही गई. खासकर डाक विभाग के कर्मचारियों के लिए करियर में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर और नए पे-स्केल की जोरदार सिफारिश की गई ताकि पदोन्नति न मिलने पर भी वेतन में अच्छी बढ़ोतरी मिलती रहे.

68000 न्यूनतम वेतन और नए वेतन ढांचे की मांग

पेंशन से जुड़े मामलों के अलावा कर्मचारियों के संगठनों ने वेतन को लेकर भी बड़े प्रस्ताव सामने रखे. प्रतिनिधियों ने मांग की कि देश में न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 68,000 रुपये तय किया जाना चाहिए. इसके साथ ही वेतन संशोधन के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया गया ताकि कर्मचारियों को हर दस साल बाद नए वेतन आयोग का इंतजार न करना पड़े.

वर्तमान पे-मैट्रिक्स के साथ-साथ रनिंग स्केल की व्यवस्था जोड़ने पर भी बल दिया गया. इसके अलावा भत्तों में सुधार, बेहतर छुट्टियां और सामाजिक सुरक्षा के कड़े उपाय लागू करने की बात भी आयोग के सामने मजबूती से दर्ज कराई गई.

महिला कर्मचारियों और दिव्यांगों की जरूरतों पर विशेष ध्यान

बैठक में केवल सामान्य वेतन और पेंशन की ही बात नहीं हुई, बल्कि कार्यस्थल पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों और दिव्यांग जनों के अधिकारों व जरूरतों पर भी गंभीर विमर्श हुआ. संगठनों ने कहा कि इन वर्गों के लिए विशेष नीतियां और सुविधाएं बनाई जानी चाहिए ताकि उनके करियर में कोई रुकावट न आए. आयोग ने इन सभी सुझावों को बहुत ध्यान से सुना और संबंधित प्रतिनिधियों के ज्ञापन भी स्वीकार किए. कर्मचारियों का मानना है कि यदि इन सिफारिशों को मान लिया जाता है तो सरकारी नौकरियों में कार्य संस्कृति और जीवन स्तर में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा.

आगे क्या होगा और कब तक आएगी अंतिम रिपोर्ट?

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था. केंद्र सरकार ने आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था. अब तक आयोग अपने कार्यकाल के 10 महीने से अधिक का समय पूरा कर चुका है.

तय योजना के अनुसार आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई या जून 2027 के आसपास केंद्र सरकार को सौंपी जा सकती है. चेन्नई का दौरा खत्म करने के बाद अब आयोग की अगली महत्वपूर्ण बैठकें 16, 17 और 18 सितंबर को चंडीगढ़ में होने जा रही हैं, जहां उत्तर भारत के कर्मचारी और पेंशनर्स अपनी बात मजबूती से रखेंगे.