दिवाली पर हवाई किराया आसमान पर, पटना जाना दुबई घूमने से भी महंगा

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दिवाली पर घर लौटने की तैयारी कर रहे यात्रियों को इस बार हवाई सफर के लिए जेब काफी ढीली करनी पड़ रही है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक त्योहारी भीड़ के बीच दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से पटना और वाराणसी जाने वाली उड़ानों के किराए रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। हालत यह है कि देश के भीतर का एक तरफ का टिकट कई विदेशी रूटों के आने-जाने के टिकट से भी महंगा बिक रहा है।

रिपोर्ट में जांचे गए उदाहरणों के अनुसार दिवाली से ठीक पहले की तारीखों में दिल्ली से पटना की एक तरफ की उड़ान का किराया 21,400 रुपये तक पहुंच गया, जबकि सामान्य दिनों में यही सफर 4,000 से 5,000 रुपये के बीच हो जाता है।

मुंबई से पटना की सीधी उड़ान का किराया पीक तारीखों पर 35,000 रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है और बेंगलुरु से पटना जाने वाले यात्रियों को एक तरफ के टिकट के लिए 25,000 रुपये से अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। यात्रा आंकड़ों से जुड़े मंच कोट्रैव के अनुसार इस त्योहारी सीजन में पटना जाने वाली उड़ानों के किराए सामान्य दरों के मुकाबले 300 से 435 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

विदेश यात्रा हुई घर लौटने से सस्ती

इस सीजन की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के देशों की यात्रा घरेलू सफर से सस्ती साबित हो रही है।

उदाहरण के लिए कोलकाता से बैंकॉक का आने-जाने यानी वापसी का टिकट करीब 26,234 रुपये में मिल रहा है। वहीं बेंगलुरु से कोलंबो की वापसी टिकट 24,079 रुपये और मुंबई से दुबई की वापसी टिकट करीब 25,213 रुपये में उपलब्ध है। दिल्ली से सिंगापुर का आने-जाने का किराया भी 35,834 रुपये के आसपास बताया गया है।

यानी जितने बजट में एक यात्री मुंबई से पटना की सिर्फ एक तरफ की यात्रा कर रहा है, उतने ही पैसे में वह दुबई या कोलंबो जाकर वापस भी लौट सकता है। यही वजह है कि इस बार त्योहारी छुट्टियों में अंतरराष्ट्रीय बुकिंग में करीब 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा रही है।

कई यात्री अब घर जाने की योजना बदलकर छुट्टियां विदेश में बिताने का मन बना रहे हैं।

बाकी बड़े रूटों पर भी उछले किराए

महंगाई सिर्फ पटना रूट तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक सितंबर से नवंबर के दौरान दिल्ली-हैदराबाद रूट पर किराए 68 प्रतिशत, मुंबई-कोलकाता रूट पर 51 प्रतिशत, दिल्ली-गोवा रूट पर 39 प्रतिशत और मुंबई-बेंगलुरु रूट पर 37 प्रतिशत तक बढ़े हैं। त्योहार के समय लाखों लोग एक साथ सफर करते हैं, इससे मांग और उपलब्ध सीटों का संतुलन बिगड़ जाता है और कीमतें तेजी से चढ़ जाती हैं।

यह भी ध्यान रहे कि हवाई किराए लगातार बदलते रहते हैं, इसलिए ऊपर दिए गए आंकड़े जांच के समय दिखे उदाहरण हैं, कोई तय या स्थायी दाम नहीं हैं।

आखिर इतने महंगे क्यों हुए टिकट

विशेषज्ञों के मुताबिक किराए में इस रिकॉर्ड उछाल के पीछे दो मुख्य कारण हैं — विमान ईंधन की बढ़ती कीमतें और एक ही समय पर मांग का अचानक बढ़ जाना। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार कोट्रैव के सह-संस्थापक और सीटीओ विनोद कुमार शाह ने बताया कि एयरलाइंस के कुल संचालन खर्च में करीब 40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन का होता है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे भारत में भी विमान ईंधन महंगा हो गया है।

इसके अलावा कुछ हवाई क्षेत्रों पर लगे प्रतिबंधों और लंबे मार्गों से उड़ान भरने के कारण भी एयरलाइंस की लागत बढ़ी है, जिसकी भरपाई ईंधन अधिभार बढ़ाकर यात्रियों से की जा रही है। ऐसे में टिकट बुक करने से पहले अलग-अलग तारीखों और उड़ानों के किराए की तुलना करना समझदारी होगी। अंतिम बुकिंग से पहले ताजा किराया संबंधित एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट या भरोसेमंद बुकिंग मंच पर दोबारा जरूर जांच लें, क्योंकि हवाई किराए समय और मांग के साथ लगातार बदलते रहते हैं।