केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी! DA मर्जर और सैलरी हाइक को लेकर हुआ बड़ा ऐलान

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केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) किसी बड़े जैकपॉट से कम साबित नहीं होने वाला है। इस आयोग के गठन को अब 9 महीने का वक्त बीत चुका है, और आयोग के पास अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपने के लिए अब सिर्फ 8 महीने का समय ही बाकी बचा है। रिपोर्ट तैयार करने की इस उल्टी गिनती के बीच ‘भारत पेंशनर्स समाज’ (BPS) ने सरकार और आयोग के सामने अपनी मांगों का बड़ा पिटारा खोल दिया है।

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पिछले दिनों दिल्ली में हुई एक अहम बैठक के दौरान संगठन ने फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ते (DA) के मर्जर और न्यूनतम पेंशन को लेकर इतनी बड़ी डिमांड रख दी है कि अगर सरकार इन्हें मंजूर कर लेती है, तो कर्मचारियों की पूरी लाइफस्टाइल ही बदल जाएगी।

18 हजार की बेसिक सैलरी सीधे 69 हजार कैसे होगी?

कर्मचारियों की सैलरी तय करने में सबसे अहम भूमिका फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की होती है। भारत पेंशनर्स समाज ने आयोग से पुरजोर मांग की है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर सीधा 3.83 कर दिया जाए।

अगर सरकार इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाती है, तो सैलरी में ऐसा जबरदस्त उछाल आएगा जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाएगा। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, लेकिन 3.83 के फिटमेंट फैक्टर के लागू होते ही यह न्यूनतम सैलरी बढ़कर सीधे 69,000 रुपये (लगभग) तक पहुंच जाएगी। यह कर्मचारियों के लिए बढ़ती महंगाई से निपटने का सबसे बड़ा और असरदार हथियार साबित होगा।

महंगाई भत्ते (DA) और मर्जर पर सबसे बड़ी मांग

मौजूदा नियमों के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को साल में सिर्फ दो बार महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (DR) का लाभ मिलता है।

लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए संगठन ने मांग की है कि अब हर तीन महीने में (यानी साल में 4 बार) डीए में इजाफा किया जाना चाहिए। इससे भी बड़ी मांग डीए के मर्जर को लेकर सामने आई है। भारत पेंशनर्स समाज का कहना है कि जैसे ही महंगाई भत्ता 25 प्रतिशत के आंकड़े को छू ले, उसे तुरंत बेसिक पे (Basic Pay) में मर्ज कर दिया जाए। वर्तमान में कर्मचारियों का डीए 50 प्रतिशत के पार जा चुका है, लेकिन 7वें वेतन आयोग में मर्जर का कोई नियम न होने के कारण कर्मचारियों को इसका पूरा और सही फायदा नहीं मिल पा रहा है।

न्यूनतम मासिक पेंशन और फैमिली यूनिट के नियमों में बदलाव

बुजुर्ग पेंशनर्स पर महंगाई का सबसे ज्यादा और गहरा असर पड़ता है। मेडिकल खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संगठन ने न्यूनतम पेंशन की सीमा को बढ़ाने पर जोर दिया है। बीपीएस ने साफ कहा है कि रिटायरमेंट के बाद एक सम्मानजनक और सुकून भरा जीवन जीने के लिए कम से कम 45,000 रुपये की मासिक पेंशन तय की जानी चाहिए, जिससे लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों को बुढ़ापे में आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, आर्थिक मांगों के साथ-साथ संगठन ने पारिवारिक ढांचे को लेकर भी एक अहम प्रस्ताव रखा है।

वर्तमान में सरकारी कैलकुलेशन के लिए फैमिली यूनिट (Family Unit) को 3 माना जाता है, जिसे बढ़ाकर 5.2 करने की वकालत की गई है क्योंकि भारतीय समाज में बुजुर्ग माता-पिता भी परिवार का अभिन्न हिस्सा होते हैं।

पे कमीशन से जुड़ी जरूरी बातें और टाइमलाइन

8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और इसे अपना काम पूरा करने के लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है। चूंकि वेतन आयोग हर 10 साल में एक बार आता है, इसलिए कर्मचारी यूनियनें इस बार अपनी सभी अहम मांगों को रिपोर्ट में शामिल कराने के लिए सरकार पर पूरा दबाव बना रही हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
  • 8वें वेतन आयोग का गठन कब हुआ था और इसकी रिपोर्ट कब आएगी? 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था। आयोग के पास रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय है, यानी मई 2027 तक इसकी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी।
  • फिटमेंट फैक्टर 3.83 होने से सैलरी में कितना इजाफा होगा? फिटमेंट फैक्टर 3.83 लागू होने पर कर्मचारियों की वर्तमान न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर सीधे 69,000 रुपये हो जाएगी।
  • 8वें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट को लेकर क्या मांग की गई है? कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि फैमिली यूनिट का साइज 3 से बढ़ाकर 5.2 किया जाए ताकि इसमें कर्मचारी के बुजुर्ग माता-पिता को भी आर्थिक सुरक्षा के दायरे में शामिल किया जा सके।