लोन चुकाने में स्मार्ट बनें: जानें कैसे थोड़ी सी समझदारी से बचा सकते हैं अपनी मेहनत की कमाई

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अपना घर होना हर किसी का सपना होता है, लेकिन प्रॉपर्टी के आसमान छूते दामों ने इस सपने और आम आदमी के बीच ‘होम लोन’ की एक दीवार खड़ी कर दी है। आज के दौर में घर खरीदने के लिए लोन लेना एक सामान्य बात है, मगर क्या आप जानते हैं कि लोन की अवधि (Tenure) चुनते समय की गई एक छोटी सी गलती आपको उम्र भर का आर्थिक दर्द दे सकती है? अक्सर लोग सिर्फ कम EMI देखकर लंबी अवधि का चुनाव कर लेते हैं, जो बाद में उन पर लाखों रुपये का अतिरिक्त ब्याज का बोझ डाल देता है।

EMI और टेन्योर का मायाजाल

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होम लोन लेते समय सबसे बड़ी समझदारी EMI और लोन की अवधि के बीच सही तालमेल बिठाना है। बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर महीने की किस्त (EMI) कम है, तो लोन चुकाना आसान होगा। लेकिन वित्तीय जानकारों की मानें तो यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। लंबी अवधि की किस्तें भले ही आपकी जेब पर हर महीने हल्की लगें, लेकिन समय बीतने के साथ आप बैंक को मूलधन से कहीं ज्यादा ब्याज चुका देते हैं। वहीं, छोटी अवधि में EMI थोड़ी ज्यादा जरूर होती है, लेकिन कुल ब्याज में आप भारी बचत कर लेते हैं।

लाखों रुपये का गणित: कैसे बढ़ता है बोझ

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने 8.5 प्रतिशत की ब्याज दर पर 2 करोड़ रुपये का होम लोन लिया है। अगर आप इसे 20 साल के लिए लेते हैं, तो आपको कुल ब्याज लगभग 2.15 करोड़ रुपये देना होगा, यानी कुल भुगतान 4.15 करोड़ रुपये के करीब होगा। अब अगर आप इसी लोन को सिर्फ 5 साल बढ़ाकर 25 साल के लिए कर देते हैं, तो आपका कुल ब्याज बढ़कर 2.86 करोड़ रुपये हो जाएगा। महज 5 साल का यह मामूली अंतर आपकी जेब पर लगभग 70 लाख रुपये का एक्स्ट्रा बोझ डाल देता है।

लंबी अवधि: राहत या आफत?

जब हम 10 साल के टेन्योर की बात करते हैं, तो इसी 2 करोड़ के लोन पर ब्याज घटकर करीब 98 लाख रुपये रह जाता है। यानी 10 साल और 25 साल के बीच ब्याज का अंतर करीब 1.9 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। बैंक अक्सर लंबी अवधि के लोन को आकर्षक बनाकर पेश करते हैं क्योंकि इससे उन्हें ज्यादा समय तक ब्याज मिलता है। लंबी अवधि उन लोगों के लिए तो ठीक हो सकती है जिनकी आय फिलहाल कम है, लेकिन जो लोग जल्दी कर्ज मुक्त होना चाहते हैं, उनके लिए यह एक महंगा सौदा साबित होता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह: कैसे चुनें सही विकल्प

वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि लोन की अवधि तय करते समय अपनी मौजूदा आय और भविष्य की संभावनाओं को जरूर तौलें। आदर्श स्थिति यह है कि आपकी EMI आपकी कुल इन हैंड सैलरी के एक निश्चित हिस्से से ज्यादा न हो। अगर आपकी नौकरी या बिजनेस में ग्रोथ की अच्छी उम्मीद है, तो हमेशा कम अवधि का विकल्प चुनें। हालांकि, अगर शुरुआत में बजट तंग है, तो आप लंबी अवधि चुन सकते हैं, लेकिन जैसे ही हाथ में बोनस या अतिरिक्त पैसा आए, ‘प्री-पेमेंट’ (Prepayment) करना शुरू कर दें। समय-समय पर किया गया थोड़ा सा अतिरिक्त भुगतान भी आपके लोन की अवधि और ब्याज को काफी कम कर सकता है।

सावधानी ही है सबसे बड़ी बचत

होम लोन कोई एक-दो दिन का नहीं, बल्कि 15-20 सालों का बड़ा वित्तीय फैसला है। इसलिए सिर्फ बैंक के विज्ञापनों या कम EMI के लालच में न आएं। अपने घरेलू खर्च, इमरजेंसी फंड और भविष्य की जिम्मेदारियों का आकलन करने के बाद ही फैसला लें। याद रखें, आज की एक छोटी सी समझदारी आपके कल के लाखों रुपये बचा सकती है। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय आपको सालों तक भारी ब्याज चुकाने पर मजबूर कर सकता है।