करियर ब्रेक में EPF पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री नहीं! जानें 10(12) का नियम और ITAT का फैसला
नौकरी से ब्रेक लेना आज के समय में आम बात हो गई है, पर EPF को लेकर एक गलतफहमी बहुत से लोगों के मन में है। EPF interest tax career break — यानी करियर ब्रेक के दौरान EPF खाते में जमा पैसे पर जो ब्याज बनता है, वो हमेशा टैक्स फ्री नहीं होता। पांच साल की नौकरी पूरी कर लेने का मतलब ये नहीं कि आगे का हर ब्याज अपने आप टैक्स से मुक्त हो गया।
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) के कुछ फैसलों में साफ कहा गया है कि नौकरी खत्म होने के बाद EPF बैलेंस पर बनने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आ सकता है — भले ही कर्मचारी पांच साल की सर्विस पूरी कर चुका हो।
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(12) के तहत नौकरी छोड़ने की तारीख तक जमा EPF बैलेंस कुछ शर्तों के साथ टैक्स छूट पा सकता है। लेकिन ITAT की व्याख्या के अनुसार नौकरी खत्म होने के बाद जमा होने वाले ब्याज को ये छूट नहीं मिलती। उस ब्याज को “इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज” माना जाता है और जिस वित्त वर्ष में वो ब्याज बनता है, उसी साल उस पर टैक्स लगता है।
आसान भाषा में समझें तो EPF का पैसा दो हिस्सों में बंट जाता है — एक वो बैलेंस जो नौकरी में रहते हुए जमा हुआ, और दूसरा वो ब्याज जो नौकरी छूटने के बाद बना। पहला हिस्सा शर्तों के साथ छूट पा सकता है, पर दूसरे हिस्से पर टैक्स लग सकता है।
उदाहरण से समझें — 10 लाख पर 80 हजार ब्याज का गणितमान लीजिए नौकरी छोड़ते समय आपके EPF खाते में 10 लाख रुपये हैं और आप दो साल का करियर ब्रेक लेते हैं। इन दो सालों में मान लीजिए 80,000 रुपये का ब्याज बनता है। अब 10 लाख और 80,000 को अलग-अलग देखा जाएगा।
मूल 10 लाख रुपये पांच साल की सेवा शर्त पूरी होने पर छूट के दायरे में आ सकते हैं।
अगर बाद में आप नई नौकरी जॉइन करते हैं और कुल मिलाकर पांच या ज्यादा साल की लगातार सर्विस पूरी करते हैं, तो अंतिम निकासी पर जमा बैलेंस छूट के लिए पात्र हो सकता है — पर नियम-शर्तें लागू रहेंगी। फिर भी दो साल के गैप में बना ब्याज ITAT की व्याख्या के हिसाब से “इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज” के रूप में टैक्स के दायरे में रहेगा, क्योंकि वो ब्याज नौकरी में रहते हुए नहीं बना।
अगर करियर ब्रेक के बीच ही EPF निकाल लिया जाता है, तो टैक्स का मामला और पेचीदा हो जाता है। जब तक लगातार पांच साल की सर्विस पूरी नहीं हुई, तब तक EPF की निकासी टैक्स के दायरे में आ सकती है। पांच या ज्यादा साल की सर्विस पूरी होने पर जमा बैलेंस कुछ शर्तों के साथ छूट पा सकता है।
नई नौकरी मिलने पर EPF को निकालने के बजाय ट्रांसफर करना आमतौर पर समझदारी माना जाता है, क्योंकि इससे आपकी लगातार सर्विस की गिनती बनी रहती है। लेकिन ट्रांसफर के बावजूद ब्रेक के दौरान बने ब्याज पर टैक्स का नियम अलग से लागू हो सकता है — इसे नजरअंदाज न करें।
कुल मिलाकर करियर ब्रेक के दौरान EPF खाते को यूं ही छोड़ देना आसान लगता है, पर ब्याज पर लगने वाले टैक्स को समझना जरूरी है। किसी भी बड़े फैसले से पहले टैक्स एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें, ताकि बाद में कोई अप्रत्याशित टैक्स देनदारी सामने न आए। (यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है, टैक्स सलाह नहीं)