ट्रंप के हाथ लगा 100% टैरिफ वाला खतरनाक हथियार, भारत और चीन के उड़े होश
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से भारत पर बड़ा टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी में हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक ऐसा बेहद अहम बिल पास हो गया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी-भरकम टैक्स या टैरिफ लगाने का पूर्ण अधिकार देता है।
इस नए बिल के संसद से पास होने के बाद अब राष्ट्रपति ट्रंप को रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाने की कानूनी ताकत मिल गई है।
यह नया कानून अमेरिका को उन सभी देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने की पूरी अनुमति देता है, जो रूस से तेल और गैस की खरीद-फरोख्त लगातार जारी रखते हैं। अमेरिकी हाउस (प्रतिनिधि सभा) में हुई लंबी बहस के दौरान भारत और चीन को विशेष तौर पर उन सबसे बड़े खरीदारों के रूप में पहचाना गया है, जिन पर इस सख्त प्रावधान का सबसे ज्यादा और सीधा असर पड़ सकता है।
इससे पहले पिछले महीने यानी अगस्त में अमेरिकी सीनेट से ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को पास किया गया था। अब बुधवार की शाम को अमेरिकी हाउस ने भी इस बिल को 262 के मुकाबले 159 वोटों के भारी बहुमत से अपनी मंजूरी दे दी है। इस बड़ी प्रक्रिया के बाद अब यह विधेयक अंतिम मुहर और कानून बनने के लिए सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा।
किसे मिलेगी इस सख्त कानून के दायरे से छूट?आपको बता दें कि यह नया कानून रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और बड़े बैंकिंग अफसरों के खिलाफ सजा के दायरे को और अधिक व्यापक बनाता है।
हालांकि, इस कानून के अंदर एक राहत का प्रावधान भी रखा गया है। इसके तहत उन देशों को पूरी छूट दी जाएगी जो रूस के नेचुरल गैस निर्यात का 15 फीसदी से भी कम आयात करते हैं और जिन्होंने इस प्रकार की खरीद को लगातार कम करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
रूस के तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं भारत और चीनचूंकि चीन और इस समय भारत, दोनों ही देश रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों की सूची में सबसे ऊपर आते हैं, इसलिए इस बिल के समर्थकों ने पूरी स्पष्टता के साथ इन दोनों एशियाई देशों को टैरिफ नियमों का मुख्य निशाना बताया है।
हालांकि, यह बिल अपने आप ही किसी भी देश के उत्पादों पर सीधे 100 फीसदी टैरिफ लागू नहीं कर देता है। इसके बजाय, यदि डोनाल्ड ट्रंप चाहें, तो यह कार्यकारी शाखा (एग्जीक्यूटिव ब्रांच) को तयशुदा कानूनी शर्तों के तहत ऐसे भारी टैरिफ लगाने की पूरी छूट देता है। इस महत्वपूर्ण बिल के जरिए आने वाले दिनों में चीन और भारत समेत कई अन्य देशों के उत्पादों पर भी टैरिफ का खतरा मंडरा सकता है।