खाते से चुपके-चुपके कट रहे हैं पैसे! विवरण में छिपे इन शुल्कों को ऐसे पहचानें
महीने के आख़िर में खाते का शेष देखकर कई लोग चौंक जाते हैं। न कोई बड़ी ख़रीद हुई, न कहीं पैसा भेजा, फिर भी 200-300 रुपये कम कैसे हो गए? दरअसल बैंक खाते में छोटी-छोटी कटौतियां चुपके-चुपके होती रहती हैं और ज़्यादातर खाताधारक इन्हें पहचान ही नहीं पाते। इन छिपे शुल्कों को अंग्रेजी में hidden bank charges in statement कहा जाता है। इन्हें पहचानना मुश्किल नहीं है, बस बैंक विवरण को ध्यान से पढ़ने की आदत चाहिए।
बैंक हर सेवा के बदले शुल्क लेता है और उसकी जानकारी खाते के विवरण में दर्ज होती है। दिक्कत यह है कि विवरण में पूरे नाम की जगह छोटे-छोटे संक्षिप्त शब्द लिखे होते हैं, जिन्हें देखकर आम ग्राहक समझ ही नहीं पाता कि पैसा कटा किस बात का। यहीं से लापरवाही शुरू होती है और साल भर में ये छोटी कटौतियां हज़ारों रुपये बन जाती हैं।
विवरण में शुल्कों को पहचानने का तरीकासबसे पहले अपने खाते के पिछले 3 महीनों का विवरण निकालिए, बैंक की मोबाइल सेवा या शाखा से यह आसानी से मिल जाता है। अब एक काग़ज़ पर हर कटौती की तारीख़ और रकम अलग से लिखिए।
कुछ कटौतियां ऐसी भी होती हैं जो अपनी लापरवाही से होती हैं, जैसे खाते में तय न्यूनतम राशि न रख पाने का शुल्क या सीमा से ज़्यादा बार नकद निकालने का शुल्क। इन्हें पहचान लेने से अगली बार की कटौती रोकी जा सकती है।
हर बैंक अपनी शुल्क सूची जारी करता है, जो शाखा में और बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होती है। अपने विवरण की कटौतियों को इस सूची से एक-एक करके मिलाइए। जो कटौती सूची में है और उतनी ही रकम की है, वह सही है। लेकिन जो कटौती सूची में नहीं मिलती या रकम ज़्यादा लगती है, उस पर सवाल उठाना आपका अधिकार है। बैंक शाखा में जाकर या ग्राहक सेवा पर बात करके उस कटौती का कारण पूछिए। बैंक को हर कटौती का कारण बताना होता है।
जो सेवा इस्तेमाल नहीं करते, उसे बंद करवाएंजांच में अक्सर ऐसी सेवाएं निकलती हैं, जिनका शुल्क कट रहा है पर इस्तेमाल हो ही नहीं रहा।
हर महीने 5 मिनट निकालकर अपना खाता विवरण ज़रूर पढ़ें। छोटी कटौती को छोटा समझकर नज़रअंदाज़ करना ही सबसे बड़ी भूल है, क्योंकि यही छोटी रकमें साल भर में बड़ी रकम बन जाती हैं। यही समझदारी आपकी मेहनत की कमाई को बेवजह कटने से बचाएगी।