बच्चे के भविष्य के लिए निवेश शुरू कर रहे हैं? सिर्फ रिटर्न देखना पड़ेगा भारी, इन छिपे खर्चों का भी रखें ध्यान

Newspoint

हर माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे की पढ़ाई और भविष्य के लिए समय रहते पैसा जमा हो जाए। लेकिन ज्यादातर लोग निवेश शुरू करते समय सिर्फ एक ही चीज देखते हैं, कितना रिटर्न मिलेगा। असली दिक्कत तब सामने आती है जब लक्ष्य पास आता है और पता चलता है कि जिन खर्चों के लिए पैसा जोड़ना था, उनकी सूची ही अधूरी थी। बच्चे के भविष्य की सही योजना रिटर्न से नहीं, खर्चों की पूरी गिनती से शुरू होती है।

रिटर्न के अलावा ये खर्च भी जुड़ते हैं

सबसे पहले पढ़ाई की महंगाई को समझिए। आज जिस कोर्स की फीस एक स्तर पर है, 10 या 15 साल बाद वह उसी स्तर पर नहीं रहेगी। फीस के साथ हॉस्टल या किराए के कमरे का खर्च, खाना, आने-जाने का भाड़ा, किताबें, लैपटॉप और अन्य उपकरण भी जुड़ते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के दौर में कोचिंग और प्रवेश परीक्षाओं के फॉर्म का खर्च भी छोटा नहीं होता। अगर बच्चा दूसरे शहर या विदेश जाने का सपना देखता है, तो रहने का खर्च और यात्रा का बोझ अलग से बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, कोई परिवार सिर्फ कॉलेज फीस के बराबर रकम जुटाए और बाद में पता चले कि हॉस्टल व रहने-खाने का खर्च लगभग उतना ही और है, तो पूरी योजना बिगड़ सकती है।

इसलिए लक्ष्य तय करते समय कुल खर्च का अनुमान लगाइए, सिर्फ फीस का नहीं।

एक और बात जो अक्सर छूट जाती है, वह है समय का फासला। अगर बच्चा अभी छोटा है तो लक्ष्य कई साल दूर है और बीच में उसकी रुचि या पढ़ाई की दिशा बदल सकती है। इसलिए योजना को पत्थर की लकीर न बनाएं; हर कुछ साल में लक्ष्य, बचे हुए समय और जमा हुई रकम की समीक्षा करते रहें। रुचि या शहर बदलने पर लक्ष्य की रकम ऊपर-नीचे हो सकती है, और समय रहते योजना में बदलाव करना आखिरी समय की हड़बड़ी और उधारी से कहीं बेहतर होता है। छोटी उम्र में की गई शुरुआत में यही लचीलापन सबसे ज्यादा काम आता है।

निवेश से जुड़े खर्च और नियम भी गिनिए

जिस माध्यम में आप पैसा लगाते हैं, उसके अपने खर्च भी होते हैं, जैसे कुछ योजनाओं में प्रबंधन शुल्क या खाता रखरखाव का खर्च। ये छोटे लगते हैं, लेकिन लंबे समय में जमा रकम पर असर डालते हैं। टैक्स के नियम भी जानना जरूरी है, क्योंकि ब्याज या कमाई पर टैक्स लगने से हाथ में आने वाली रकम अनुमान से कम हो सकती है। समय से पहले पैसा निकालने पर लगने वाला शुल्क या नुकसान भी कई योजनाओं में होता है। इसलिए निवेश चुनते समय कुल खर्च, टैक्स की स्थिति और निकासी की शर्तें दस्तावेजों में पढ़कर ही फैसला लें, किसी के कहने पर नहीं।

शुरुआत में ये गलतियां न करें

पहली गलती है बीमा और निवेश को एक ही उत्पाद में मिला देना, इससे न तो पर्याप्त सुरक्षा मिलती है और न ही ढंग का संचय बन पाता है। दूसरी गलती है बहुत देर से शुरुआत करना; छोटी रकम से जल्दी शुरू करना अक्सर बड़ी रकम से देर से शुरू करने से बेहतर नतीजा देता है, क्योंकि समय ही लंबी अवधि के निवेश की सबसे बड़ी ताकत है। तीसरी गलती है बच्चे के लक्ष्य का पैसा घर के दूसरे खर्चों में घुला देना। लक्ष्य के लिए अलग खाता या अलग व्यवस्था रखिए और हर साल महंगाई के हिसाब से लक्ष्य की रकम की समीक्षा कीजिए।

किसी भी योजना में रिटर्न की गारंटी नहीं होती, इसलिए वादों पर नहीं, लिखित शर्तों और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और शंका हो तो बैंक या योजना के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि जरूर करें।