क्रेडिट कार्ड बंद करने का ये है बिल्कुल सही और लीगल तरीका, सिबिल स्कोर को बिना नुकसान पहुंचाए होगा काम
नई दिल्ली: आज के डिजिटल और मॉडर्न जमाने में क्रेडिट कार्ड सिर्फ शॉपिंग करने या बिल चुकाने का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि यह आपकी फाइनेंशियल पहचान यानी आपकी साख बन चुका है। जो इंसान वक्त पर अपने क्रेडिट कार्ड का बिल भरता है, उसे बैंक पलक झपकते ही होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन दे देते हैं। लेकिन कई बार लोग सालाना फीस (Annual Fee) से बचने के लिए, बहुत सारे कार्ड होने की वजह से या फिर कम इस्तेमाल करने के चक्कर में अपना क्रेडिट कार्ड बंद कराने का फैसला कर लेते हैं।
यहीं पर ज्यादातर लोग एक ऐसी बड़ी गलती कर बैठते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें सालों तक भुगतना पड़ता है। असल में क्रेडिट कार्ड बंद करना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन बिना सोचे-समझे और बिना तैयारी के कार्ड को अचानक बंद करा देने से आपके सिबिल स्कोर (CIBIL Score) को तगड़ा झटका लग सकता है। जब सिबिल स्कोर खराब होता है, तो भविष्य में किसी भी बैंक से लोन मिलना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए कोई भी कार्ड बंद करने से पहले आपको कुछ बेहद जरूरी बातें जरूर समझ लेनी चाहिए।
क्या वाकई क्रेडिट कार्ड बंद करने से गिर जाता है सिबिल स्कोर?इसका सीधा सा जवाब है—जी हां! क्रेडिट कार्ड को अचानक बंद करवाने से सिबिल स्कोर पर बुरा असर पड़ता है। हालांकि, हर व्यक्ति की क्रेडिट प्रोफाइल अलग होती है, इसलिए इसका असर भी अलग-अलग हो सकता है। दरअसल, आपका सिबिल स्कोर कई जरूरी चीजों को मिलाकर बनता है, जैसे आपकी पेमेंट हिस्ट्री, क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो, क्रेडिट हिस्ट्री की लंबाई, क्रेडिट मिक्स और आपके एक्टिव लोन या क्रेडिट अकाउंट्स। ऐसे में अगर आप अपना कोई बहुत पुराना या फिर भारी-भरकम लिमिट वाला कार्ड बंद करते हैं, तो सिबिल स्कोर का नीचे गिरना तय है।
1. क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (CUR) का बिगड़ना है सबसे बड़ा खतराक्रेडिट कार्ड बंद करते ही आपके सिबिल स्कोर के सामने जो सबसे बड़ी मुसीबत खड़ी होती है, उसे ‘क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो’ (Credit Utilisation Ratio) कहते हैं। इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपके पास दो क्रेडिट कार्ड हैं और दोनों की कुल लिमिट मिलाकर ₹2 लाख है। आप हर महीने इन कार्ड्स से ₹40,000 खर्च करते हैं। इसका मतलब हुआ कि आप अपनी कुल लिमिट का केवल 20% हिस्सा ही इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कि सिबिल स्कोर के लिए बहुत शानदार माना जाता है।
अब मान लीजिए कि आपने इनमें से एक कार्ड बंद कर दिया। ऐसा करते ही आपकी कुल क्रेडिट लिमिट घटकर सिर्फ ₹1 लाख रह गई। लेकिन आपका हर महीने का खर्च तो ₹40,000 ही है। अब यह खर्च आपकी नई लिमिट का सीधे 40% दिखने लगेगा। बैंकिंग एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अपनी लिमिट का 30% से कम ही खर्च करना चाहिए। जैसे ही यह खर्च 30% के पार दिखेगा, बैंक आपको ‘क्रेडिट का भूखा’ समझने लगेंगे और आपका स्कोर धड़ाम से गिर जाएगा।
2. पुराना कार्ड बंद करने से छोटी हो जाएगी आपकी ‘क्रेडिट हिस्ट्री’अगर आप जिस क्रेडिट कार्ड को बंद करने जा रहे हैं, वो कई साल पुराना है, तो ऐसा करने की भूल बिल्कुल न करें। आपकी औसत क्रेडिट हिस्ट्री जितनी लंबी और स्थिर होगी, बैंक आपके ऊपर उतना ही ज्यादा भरोसा करेंगे। लंबा क्रेडिट रिकॉर्ड इस बात का सबूत होता है कि आप सालों से पैसों के मामले में समझदार रहे हैं। इसलिए, जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो या उस कार्ड पर बहुत भारी सालाना फीस न लग रही हो, तब तक अपने सबसे पुराने कार्ड को कभी बंद न करवाएं।
3. अधूरी बात नहीं चलेगी, पहले पूरा बकाया चुकाना है बेहद जरूरीरिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सख्त नियमों के मुताबिक, किसी भी क्रेडिट कार्ड को बंद करने से पहले उसका एक-एक पैसा चुकाना जरूरी है। कार्ड क्लोजर रिक्वेस्ट डालने से पहले अच्छी तरह चेक कर लें कि उस पर कोई पुरानी बकाया रकम, कोई पेंडिंग EMI बैलेंस, कोई एनुअल फीस या GST चार्ज तो नहीं बचा है। इसके अलावा, अगर आपने उस कार्ड पर नेटफ्लिक्स, जिम या किसी और चीज का ऑटो-डेबिट सब्सक्रिप्शन लगा रखा है, तो उसे तुरंत हटा लें। अगर एक छोटा सा रुपया भी बकाया रह गया, तो उस पर भारी ब्याज और पेनाल्टी लग जाएगी, जो चुपके से आपके सिबिल स्कोर को दीमक की तरह चाट जाएगी।
4. रिवॉर्ड पॉइंट्स और कैशबैक का पूरा फायदा उठाएं, वरना पछताएंगेरिवॉर्ड पॉइंट्स और कैशबैक को लेकर अक्सर लोग बड़ी लापरवाही करते हैं। आपको याद रखना चाहिए कि जैसे ही आपका कार्ड बंद होगा, आपके सारे जमा किए हुए रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक बैलेंस, एयरपोर्ट लाउंज बेनिफिट्स और ट्रैवल माइल्स भी उसी सेकंड हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। आपकी पूरे साल की मेहनत से कमाए गए पॉइंट्स एक झटके में जीरो हो जाते हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि कार्ड बंद करने का मन बनाते ही सबसे पहले अपने सभी रिवॉर्ड्स को रिडीम कर लें या उनसे शॉपिंग कर लें।
5. केवल कस्टमर केयर से बात करना काफी नहीं, लिखित कन्फर्मेशन है जरूरीबहुत से लोग सोचते हैं कि कस्टमर केयर पर फोन करके कार्ड बंद करने को कह दिया, तो काम खत्म हो गया। यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। क्रेडिट कार्ड बंद करवाने के बाद बैंक से हमेशा ईमेल या लेटर के जरिए लिखित कन्फर्मेशन (Written Confirmation) जरूर मांगें और अपने क्लोजर रिक्वेस्ट नंबर को संभालकर रखें। इसके बाद सबसे जरूरी काम यह करना है कि कार्ड बंद होने के 30 से 45 दिनों के बाद अपनी सिबिल रिपोर्ट (CIBIL Report) को खुद चेक करें। वहां यह पक्का कर लें कि उस कार्ड के आगे स्टेटस में ‘Closed’ लिखा आ रहा है या नहीं। अगर वहां स्टेटस अब भी ‘Active’ दिख रहा है, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें, वरना आपका स्कोर खराब हो सकता है।
कब क्रेडिट कार्ड को बंद करना माना जाता है सही फैसला?कुछ खास परिस्थितियों में क्रेडिट कार्ड को बंद कर देना ही समझदारी का सौदा होता है:
- अगर कार्ड की सालाना फीस (Annual Fee) बहुत ज्यादा हो और आपको उसके बदले कोई खास फायदा न मिल रहा हो।
- अगर कार्ड अलमारी में ही पड़ा रहता है और उसका कोई इस्तेमाल ही नहीं हो रहा हो।
- अगर आपके पास बहुत सारे कार्ड हो गए हैं और उन्हें मैनेज करना सिरदर्द बन चुका है।
- अगर क्रेडिट कार्ड हाथ में होने की वजह से आपकी फिजूलखर्ची (Overspending) की आदत लगातार बढ़ रही हो।
- अगर आपको कार्ड के खो जाने या किसी फ्रॉड रिस्क की आशंका लग रही हो।
अगर आपके सामने नीचे दी गई परिस्थितियां हैं, तो कार्ड बंद करने के फैसले को तुरंत टाल दें:
- अगर वह क्रेडिट कार्ड आपका सबसे पुराना कार्ड हो।
- अगर उस कार्ड की क्रेडिट लिमिट बहुत ज्यादा हो।
- अगर वह कार्ड आपके कुल क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (CUR) को 30% से कम रखने में मदद कर रहा हो।
- अगर आप अगले कुछ महीनों में होम लोन या कार लोन लेने की प्लानिंग कर रहे हों।
- अगर आपका सिबिल स्कोर पहले से ही कमजोर या कम हो।
अगर आपने कार्ड बंद करने का पूरा मन बना ही लिया है, तो फाइनल कदम उठाने से पहले इन 3 चीजों को अपनी उंगलियों पर जरूर गिन लें—आपका मौजूदा सिबिल स्कोर कितना है, वो कार्ड कितना पुराना है, और उसे बंद करने के बाद आपकी कुल क्रेडिट लिमिट पर कितना बड़ा असर पड़ने वाला है। हमेशा याद रखिए कि क्रेडिट कार्ड सिर्फ पैसे खर्च करने का साधन नहीं है, बल्कि यह आपकी फाइनेंशियल क्रेडिबिलिटी (वित्तीय विश्वसनीयता) का एक बेहद मजबूत हिस्सा है। जल्दबाजी में लिया गया एक गलत फैसला आपकी बरसों की बनाई क्रेडिट प्रोफाइल को कमजोर कर सकता है। इसलिए पहले पूरा बकाया चुकाएं, सारे रिवॉर्ड्स इस्तेमाल करें और अंत में अपनी सिबिल रिपोर्ट जरूर चेक करें।