Gold की भूख: दुनिया में मच गई सोना खरीदने की होड़, टॉप-3 की लिस्ट से अमेरिका और भारत गायब, आखिर कौन है वो 'गोल्ड किंग'?

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पूरी दुनिया के केंद्रीय बैंक इन दिनों पागलों की तरह सोना (Gold) खरीद रहे हैं। यह सिलसिला पिछले 23 महीनों से लगातार जारी है और थमने का नाम नहीं ले रहा है। आंकड़ों की मानें तो फरवरी के महीने में ग्लोबल सेंट्रल बैंकों ने अपने खजाने में कुल 19 टन सोना और जोड़ लिया है।

इस साल की शुरुआत से अब तक कुल 25 टन सोने की खरीदारी हो चुकी है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ निवेश नहीं है, बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में आने वाले किसी बड़े बदलाव का तूफान से पहले वाला संकेत है।

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पोलैंड ने सबको पछाड़ा, चीन भी रेस में बरकरार

हैरानी की बात यह है कि इस बार सबसे ज्यादा सोना खरीदने वाला देश अमेरिका या भारत नहीं, बल्कि पोलैंड रहा है। फरवरी में पोलैंड के केंद्रीय बैंक ने अकेले ही 20 टन सोना खरीदकर सबको चौंका दिया। अब पोलैंड का कुल गोल्ड रिजर्व 570 टन हो चुका है, जो उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 31% हिस्सा है।

वहीं दूसरी ओर, उज्बेकिस्तान ने 8 टन और चीन ने 1 टन सोना खरीदा। भले ही चीन का आंकड़ा छोटा लगे, लेकिन वह पिछले 16 महीनों से लगातार सोना खरीद रहा है।

अब चीन के पास कुल 2,308 टन सोने का विशाल भंडार जमा हो चुका है।

युद्ध और मजबूरी: कुछ देशों को बेचना पड़ा सोना

एक तरफ जहां दुनिया सोने के पीछे भाग रही है, वहीं कुछ देशों को मजबूरी में अपना सोना बेचना भी पड़ा है। फरवरी में तुर्की और रूस ने क्रमश: 8 टन और 6 टन सोना बाजार में निकाला। मार्च में तो तुर्की ने हद ही कर दी और 120 टन सोना बेच डाला। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान से जुड़े युद्ध और बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण इन देशों को अपनी विदेशी मुद्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए सोना बेचना पड़ा है।

डॉलर की बादशाहत को खतरा?

सोना खरीदने का यह पागलपन एक बहुत बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है। साल 2025 में पहली बार ऐसा हुआ जब दुनिया के केंद्रीय बैंकों के पास अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स (US Treasury Bonds) के मुकाबले सोने की वैल्यू ज्यादा हो गई। 1996 के बाद यह पहली बार है जब ऐसी स्थिति बनी है। साफ है कि अब दुनिया भर के देश अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं और सोने को सबसे सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: 1970 जैसा हो सकता है हाल

Azuria Capital LLC के CEO ओटावियो कोस्टा के अनुसार, यह बदलाव मामूली नहीं है। उन्होंने इसकी तुलना 1970 के दशक के आर्थिक संकट से की है। उनका मानना है कि यह वैश्विक आर्थिक संतुलन में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत है और आने वाले समय में यह ट्रेंड और भी खतरनाक रूप ले सकता है।

सोने की कीमतों ने तोड़ा रिकॉर्ड

कीमतों की बात करें तो पिछले एक साल में गोल्ड स्पॉट यूएस डॉलर की कीमत में लगभग 53% का जबरदस्त उछाल आया है। पिछले छह महीनों में ही इसमें 18.6% की तेजी देखी गई है।

फिलहाल सोना 4,712 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि, इसने 5,595 डॉलर प्रति औंस का अपना पिछला रिकॉर्ड स्तर भी छुआ है, जो निवेशकों के लिए चौंकाने वाला है।

निवेशकों के लिए क्या है सबक?

जब दुनिया के बड़े-बड़े केंद्रीय बैंक सोना जमा कर रहे हों, तो यह आम निवेशकों के लिए सीधा संकेत है। वैश्विक अस्थिरता, युद्ध के बादल और आर्थिक तनाव के बीच सोना आज भी निवेश का सबसे ‘सेफ’ ऑप्शन बना हुआ है। जानकारों की मानें तो गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्पों पर नजर रखना भविष्य में बड़े मुनाफे की चाबी साबित हो सकता है।