Gold Import Update: सोना बेचना कोई घाटा नहीं बल्कि है महा-मुनाफा, जानें?

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नई दिल्ली। भारत में सोने (Gold) को सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि सुख-दुख का साथी और परिवारों की सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता है। हमारे देश में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां थोड़ा-बहुत सोना न रखा हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर के लॉकरों और अलमारियों में बंद यही सोना इस समय देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता का सबब बन चुका है? आनंद राठी वेल्थ (Anand Rathi Wealth) के सीईओ फिरोज अज़ीज़ ने देश के आम नागरिकों से एक बेहद अनोखी और बड़ी अपील की है।

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उन्होंने लोगों से कहा है कि वे अपने घरों में बेकार पड़े सोने का एक छोटा सा हिस्सा बेचें, ताकि देश को भारी-भरकम आयात (Gold Import) के बोझ से बचाया जा सके और भारतीय रुपये को और अधिक मजबूती दी जा सके।

लगातार बढ़ता गोल्ड इंपोर्ट बना देश के लिए बड़ी सिरदर्दी

फिरोज अज़ीज़ के अनुसार, भारत अपनी जरूरत से कहीं ज्यादा सोने का आयात विदेशों से कर रहा है। अगर कुछ साल पहले के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत का सालाना गोल्ड इंपोर्ट बिल करीब 35 अरब डॉलर हुआ करता था, जो अब आसमान छूते हुए लगभग 75 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है।

विदेशों से इतनी भारी मात्रा में सोना मंगाने का सीधा और कड़वा असर देश के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर पड़ रहा है, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हमारा रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है।

उन्होंने भारतीय शेयर बाजार का एक बड़ा उदाहरण देते हुए समझाया कि जब भी विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) बाजार से पैसा निकालते हैं, तो टीवी और अखबारों में बहुत हंगामा मचता है। लेकिन असलियत यह है कि देश से बाहर जाने वाले इस पैसे से कहीं ज्यादा बड़ा आर्थिक दबाव हमारा गोल्ड इंपोर्ट बन चुका है।

उदाहरण के लिए, वित्तीय वर्ष 2025-26 में विदेशी निवेशकों (FII Outflow) ने भारतीय बाजार से करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये निकाले थे, जबकि हम इससे कई गुना ज्यादा पैसा सिर्फ विदेशों से सोना खरीदने में फूंक देते हैं।

भारतीय घरों में दबा है 4 ट्रिलियन डॉलर का खजाना

एक अनुमान के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास इस समय करीब 4 ट्रिलियन डॉलर (लाखों करोड़ रुपये) की कीमत का सोना मौजूद है। दुख की बात यह है कि इस सोने का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ लॉकरों में बंद रहता है और अर्थव्यवस्था में किसी काम नहीं आता।

फिरोज अज़ीज़ का कहना है कि अगर देश का हर परिवार अपने कुल सोने का सिर्फ 2 से 4 फीसदी हिस्सा भी बाजार में बेच दे, तो भारत के आयात बिल में इतनी बड़ी कमी आएगी कि देश की आर्थिक स्थिति रातों-रात सुधर जाएगी।

उन्होंने अपनी ही कंपनी का एक दिलचस्प कैलकुलेशन सामने रखते हुए बताया कि आनंद राठी वेल्थ के पास इस समय करीब 13,800 परिवार बतौर ग्राहक जुड़े हुए हैं। अगर ये सभी परिवार देश हित में सिर्फ 100-100 ग्राम सोना भी बाजार में बेच देते हैं, तो इससे करीब 2,500 से 3,000 करोड़ रुपये का निष्क्रिय सोना दोबारा मुख्य बाजार में वापस आ जाएगा, जिससे विदेशों से नया सोना मंगाने की जरूरत बहुत कम हो जाएगी।

सोना बेचना कोई त्याग नहीं, बल्कि है तगड़ी समझदारी

सीईओ फिरोज अज़ीज़ ने साफ किया कि वह लोगों से किसी तरह का दान या त्याग करने के लिए नहीं कह रहे हैं, बल्कि यह पूरी तरह से मुनाफे का सौदा है। इस समय सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर के आसपास चल रही हैं, हालांकि हाल ही में इसमें थोड़ी बहुत गिरावट भी देखने को मिली है। ऐसे में आम निवेशकों के लिए यह अपनी पुरानी होल्डिंग पर शानदार मुनाफा कमाने (Profit Booking) का सबसे सही और सुनहरा मौका हो सकता है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह समझदार लोग शेयर बाजार में शेयर के दाम बढ़ने पर उसे बेचकर अपना प्रॉफिट बुक करते हैं, ठीक वैसी ही समझदारी अब सोने के साथ भी दिखाने का वक्त आ गया है।

इससे आम जनता की जेब में मोटा कैश भी आएगा और देश पर से विदेशी कर्ज और आर्थिक दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा।

सरकार से टैक्स में छूट देने की बड़ी मांग

इस मुहिम को कामयाब बनाने के लिए फिरोज अज़ीज़ ने केंद्र सरकार के सामने भी एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि देश में पुराने सोने की बिक्री (Gold Transactions) पर कुछ समय के लिए लगने वाले कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) को पूरी तरह से हटा दिया जाए। उनका मानना है कि अगर सरकार टैक्स में यह बड़ी राहत दे देती है, तो आम लोग बिना किसी हिचकिचाहट के अपने घरों का पुराना सोना बेचने के लिए आगे आएंगे।

उन्होंने अंत में देशवासियों से अपील की कि भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया में सबसे मजबूत बनाने में देश का हर आम नागरिक अपना एक छोटा सा योगदान देकर बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है।