सरकारी कर्मचारियों के 10,000 करोड़ अटके! तेलंगाना विधानसभा में गूंजा 6 किस्तों के लंबित DA का मुद्दा
तेलंगाना में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबित महंगाई भत्ते (DA) का मामला एक बार फिर विधानसभा की चौखट तक पहुंच गया है। इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने इस ज्वलंत मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर सदन में तत्काल चर्चा कराए जाने की पुरजोर मांग की है। विपक्ष के इस आक्रामक रुख से सरकार पर कर्मचारियों के लंबे समय से अटके पड़े बकाये के निपटारे को लेकर भारी दबाव बन गया है। अब आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि राज्य के कर्मचारियों को उनका हक और बकाया पैसा कब तक मिल पाता है।
गौरतलब है कि तेलंगाना में डीए का यह मुद्दा कोई नया नहीं है। राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठन लंबे समय से लंबित किस्तों के भुगतान, पे रिवीजन कमीशन (PRC), रिटायरमेंट बेनिफिट्स और कर्मचारी स्वास्थ्य योजना जैसे कई महत्वपूर्ण मामलों को लेकर सरकार के सामने अपनी मांगें लगातार रखते आ रहे हैं। लेकिन काफी लंबा समय बीत जाने के बाद भी उनकी ये मांगें अधर में लटकी हुई हैं, जिसके चलते यह पूरा मसला लगातार मीडिया की सुर्खियों में छाया हुआ है।
1 जनवरी 2024 से 1 जुलाई 2026 के बीच की किस्तें हैं बकाया
इस गंभीर मुद्दे को लेकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित किए जा रहे हैं। हालिया प्रदर्शनों के दौरान कर्मचारी संगठनों ने दावा किया था कि उनकी छह डीए किस्तें अब भी सरकार के पास लंबित पड़ी हुई हैं। कर्मचारियों के मुताबिक यह पूरा बकाया 1 जनवरी 2024 से 1 जुलाई 2026 के बीच की अलग-अलग किस्तों का है, जिसका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है।
क्या BJP ने विधानसभा में DA पर नोटिस दिया है?
भाजपा विधायकों ने लंबित डीए और उससे जुड़े एरियर के मामले पर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाकर सीधी चर्चा कराने की मांग रखी है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि यह मुद्दा राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की जेब से जुड़ा सीधा आर्थिक मामला है, इसलिए इसे सामान्य चर्चा तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। विपक्ष इस स्थगन प्रस्ताव के जरिए सरकार को कटघरे में खड़ा कर यह जवाब मांगना चाहता है कि आखिर लंबित डीए का भुगतान कब तक होगा और कर्मचारियों को बकाये की राशि देने के लिए सरकार के पास क्या ठोस योजना है।
कर्मचारियों के कितने DA और बिल अभी हैं बाकी?
विभिन्न कर्मचारी संगठनों के अनुसार तेलंगाना सरकार के पास कर्मचारियों के करीब 10,000 करोड़ रुपये के अन्य वित्तीय बिल भी लंबित पड़े हुए हैं। कर्मचारियों का दावा है कि अपनी मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और पेंशनर्स अलग-अलग जिलों में विरोध प्रदर्शन और धरना दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
हालांकि, इससे पहले तेलंगाना सरकार ने कर्मचारियों के लंबित वित्तीय दावों को निपटाने के लिए कुछ कदम जरूर उठाए थे। अप्रैल 2026 में सरकार ने लंबित देनदारियों को चुकाने के लिए 1,000 करोड़ रुपये जारी किए थे और हर महीने आवंटन बढ़ाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद, कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि सिर्फ थोड़े-बहुत पुराने बकाये का भुगतान शुरू कर देना ही काफी नहीं है, जब तक कि पूरी राशि न मिल जाए।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग क्या है?
कर्मचारी संगठनों की लड़ाई सिर्फ डीए एरियर तक ही सीमित नहीं है। वे लंबित डीए के तुरंत भुगतान के साथ-साथ पे रिवीजन कमीशन (PRC) की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने, रिटायरमेंट बेनिफिट्स का जल्द निपटारा करने, एम्पलाई हेल्थ स्कीम (EHS) को ज्यादा प्रभावी बनाने और पेंशन से जुड़े तमाम पेंडिंग मुद्दों पर सरकार से ठोस व अंतिम फैसला चाहते हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले मार्च 2026 में विपक्षी दल बीआरएस (BRS) ने भी विधानसभा में लंबित डीए, रिटायरमेंट बेनिफिट्स और पीआरसी के मुद्दे पर सरकार को घेरा था। उस दौरान बीआरएस की ओर से कहा गया था कि कर्मचारियों की पांच डीए किस्तें पेंडिंग हैं और उन्होंने सदन में सरकार से इसके भुगतान की निश्चित समयसीमा पूछी थी।