सोने से भी महंगी है यह चायपत्ती! 1 किलो की कीमत 9 करोड़, सुरक्षा में तैनात रहते हैं बंदूकधारी सैनिक

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भारत में सुबह की शुरुआत बिना चाय के अधूरी मानी जाती है। नुक्कड़ की दुकान पर मिलने वाली 10 रुपये की ‘कटिंग’ से लेकर किसी फाइव स्टार होटल में मिलने वाली हजार रुपये की चाय तक, हमने अपनी जेब और पसंद के हिसाब से कई स्वाद चखे हैं। लेकिन क्या आपने कभी ऐसी चायपत्ती के बारे में सुना है जिसकी कीमत किसी लग्जरी कार या किसी पॉश इलाके के शानदार बंगले से भी ज्यादा हो? चीन में पैदा होने वाली ‘डा हांग पाओ’ (Da Hong Pao) नाम की चायपत्ती की कीमत करीब 9 करोड़ रुपये प्रति किलोग्राम है। यह आंकड़ा किसी भी आम इंसान को हैरान करने के लिए काफी है। आखिर ऐसी क्या खासियत है जो इसे दुनिया का सबसे महंगा पेय पदार्थ बनाती है?

चीन की पहाड़ियों का ‘रॉक टी’ रहस्य

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इस प्रीमियम चाय की पैदावार मुख्य रूप से चीन के फुजियान प्रांत में स्थित वुई (Wuyi) पहाड़ों की चट्टानों पर होती है। पहाड़ों की दरारों में पनपने के कारण वहां मौजूद प्राकृतिक खनिजों का पूरा पोषण इन पौधों को मिलता है। इसी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण इसे व्यापारिक भाषा में ‘रॉक टी’ का दर्जा दिया गया है। इसकी डिमांड और सप्लाई के बीच का भारी अंतर ही इसकी रिकॉर्ड तोड़ कीमत तय करता है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह दुनिया की सबसे दुर्लभ चाय है। बाजार में इसकी मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2002 में हुई एक ग्लोबल नीलामी के दौरान सिर्फ 20 ग्राम डा हांग पाओ चायपत्ती लगभग 26.17 लाख रुपये में नीलाम हुई थी।

महारानी की जान बचाने वाली जादुई पत्तियां

इस बेशकीमती चाय के पीछे एक दिलचस्प ऐतिहासिक कहानी जुड़ी है। मिंग राजवंश के शासनकाल में एक बार महारानी गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं। तब पारंपरिक चिकित्सा के रूप में उन्हें यही चाय पिलाई गई, जिससे उनके स्वास्थ्य में चमत्कारिक सुधार हुआ। महारानी के ठीक होने की खुशी में सम्राट ने उन खास चाय के पौधों को सम्मान देने के लिए लाल रंग के शाही वस्त्रों से ढक दिया था। तभी से इस चायपत्ती को ‘बिग रेड रोब’ या ‘डा हांग पाओ’ कहा जाने लगा। चीन में इसे आज भी एक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में देखा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें एक खास तरह की सोंधी खुशबू के साथ हल्की मिठास होती है, जिसका स्वाद काफी देर तक गले में बना रहता है।

सोने से भी कीमती होने की असली वजह

बाजार का सीधा नियम है—चीज जितनी दुर्लभ, दाम उतने ज्यादा। डा हांग पाओ के मामले में भी यही लागू होता है। वर्तमान में इस चाय के असली और सैकड़ों साल पुराने केवल छह ‘मातृ पौधे’ (Mother bushes) ही बचे हैं। इस दुर्लभ प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा के लिए वहां हर समय हथियारबंद जवान तैनात रहते हैं। साल 2006 में चीनी सरकार ने एक सख्त फैसला लेते हुए इन प्राचीन पौधों से पत्तियां तोड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। आज बाजार में जो असली डा हांग पाओ मौजूद है, वह पुरानी इन्वेंट्री का हिस्सा है। हालांकि, बाजार में बिकने वाली इसकी महंगी कमर्शियल चायपत्ती इन्हीं मातृ पौधों की टहनियों से तैयार किए गए नए पौधों (क्लोन) से मिलती है।