Gold Price Crash: सोने-चांदी के भाव औंधे मुंह गिरे, $4000 के नीचे आया गोल्ड, टूट गया 3 साल की तेजी का रिकॉर्ड

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वैश्विक कमोडिटी बाजार से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पिछले लंबे समय से आसमान छू रही सोने की कीमतों में एक ऐसी ऐतिहासिक गिरावट आई है जिसने निवेशकों को हैरान कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत नवंबर के बाद पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गई है।

इस वैश्विक मंदी का सीधा और बड़ा असर भारत के घरेलू सर्राफा बाजारों में भी साफ देखने को मिला है। बुधवार को भारतीय बाजारों में 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड की कीमत गिरकर 1,42,178 रुपये रह गई, जबकि चांदी भी भारी दबाव के बीच 2,22,035 रुपये प्रति किलोग्राम पर सिमट गई। वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) की बात करें तो वहां भी सोने का वायदा भाव 1,41,100 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 2,12,697 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुआ था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी बिकवाली और डॉलर का दबदबा

इंटरनेशनल मार्केट में बुधवार का दिन सोने के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा, जहां इसके दाम 3.8% तक टूटकर 3,960 डॉलर प्रति औंस से भी नीचे चले गए। न्यूयॉर्क में बुधवार शाम को स्पॉट गोल्ड 3.0% की गिरावट के साथ 3,992.44 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेंड कर रहा था। सोने के साथ-साथ चांदी में भी भारी मुनाफावसूली देखी गई और यह 6.9% की भारी गिरावट के साथ 57.31 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा हाथ अमेरिकी डॉलर का है, जिसमें इस हफ्ते लगभग 1% की मजबूती आई है। डॉलर के मजबूत होने से डॉलर में तय होने वाली ये कीमती धातुएं दूसरी मुद्राओं के खरीदारों के लिए काफी महंगी हो गई हैं, जिससे इसकी मांग घट गई है।

आखिर क्यों अचानक गिरने लगे सोने-चांदी के दाम?

तीन साल की शानदार तेजी का हुआ अंत:

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पिछले तीन सालों में सोने ने निवेशकों को मालामाल किया था और हर साल दोहरे अंकों में शानदार रिटर्न दिया था। इस दौरान सोने की कीमतें दोगुनी से भी अधिक हो गई थीं। केंद्रीय बैंकों, बड़े-बड़े मनी मैनेजरों और खुदरा निवेशकों, सभी ने इस तेजी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। लेकिन इस साल जनवरी के अंत में यह तेजी उस समय अचानक रुक गई जब सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस के अपने रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंच गया था। जून आते-आते यह अपने पिछले रिकॉर्ड हाई से 20% से अधिक नीचे गिर चुका है, जिसे आर्थिक और तकनीकी भाषा में आमतौर पर मंदी (Bear Market) की शुरुआत माना जाता है।

फेडरल रिजर्व की सख्त नीति का असर:

डीडब्ल्यूएस ग्रुप के कमोडिटी प्रमुख दारवेई कुंग के अनुसार, सोने की कीमतें इस समय पूरी तरह से अमेरिका में ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों और कयासों के साथ चल रही हैं। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श द्वारा मुद्रास्फीति (महंगाई) पर कड़ा फोकस रखने के बयान ने यह साफ कर दिया है कि केंद्रीय बैंक आने वाले दिनों में और अधिक कड़ा रुख अपना सकता है। इस कड़े रुख की संभावना से अमेरिकी डॉलर को जबरदस्त बढ़ावा मिला है, जो इस समय सोने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। इसके अलावा, ट्रेंड को फॉलो करने वाले बड़े फंडों की लगातार नकारात्मक पोजीशन ने बुधवार को सोने की इस गिरावट को और ज्यादा रफ्तार दे दी।

अमेरिका-ईरान युद्ध और आर्थिक समीकरणों ने बढ़ाई मुश्किलें

सोने के शानदार प्रदर्शन को पटरी से उतारने वाले प्रमुख वैश्विक कारकों में अमेरिका-ईरान युद्ध का छिड़ना सबसे मुख्य माना जा रहा है। इस युद्ध के कारण ऊर्जा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर में मुद्रास्फीति को बढ़ावा दिया है, जिसने केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर किया है। ब्याज दरें बढ़ने के कारण अब सोना, ट्रेजरी बॉन्ड जैसी यील्ड (नियमित रिटर्न) देने वाली संपत्तियों की तुलना में निवेशकों के लिए कम आकर्षक रह गया है, क्योंकि सोने पर कोई नियमित ब्याज नहीं मिलता है।

ग्लोबल बैंकों ने घटाए सोने के दाम के अनुमान: