घर से छोटा बिजनेस शुरू करने से पहले इन 6 खर्चों का बजट बनाएं, वरना बाद में पड़ सकता है पछताना

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घर से छोटा बिजनेस शुरू करने का विचार आज बहुत से लोगों के मन में आता है। कोई घर से खाना बनाकर बेचना चाहता है, कोई हस्तशिल्प का काम करना चाहता है, तो कोई ऑनलाइन सामान बेचने की योजना बनाता है। शुरुआत में यह काम आसान लगता है, क्योंकि दुकान का किराया नहीं देना पड़ता और समय भी अपने हिसाब से तय किया जा सकता है। लेकिन असलियत यह है कि बिना बजट के शुरू किया गया बिजनेस अक्सर पहले कुछ महीनों में ही मुश्किल में आ जाता है।

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वजह यह नहीं होती कि मेहनत कम की गई, बल्कि वजह यह होती है कि कई जरूरी खर्चों का हिसाब पहले से नहीं लगाया गया था।

बजट बनाना कोई बड़ी किताबी प्रक्रिया नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि बिजनेस शुरू करने से पहले और पहले कुछ महीनों के दौरान किन-किन चीजों पर पैसा लगेगा, इसका अंदाजा लगा लेना। जब खर्च पहले से पता होते हैं, तो अचानक पैसे की कमी नहीं होती और फैसले भी सोच-समझकर लिए जाते हैं। नीचे दिए गए 6 खर्चों को बजट में जरूर शामिल करें।

कच्चा माल और शुरुआती स्टॉक का खर्च

हर बिजनेस की पहली जरूरत कच्चा माल या शुरुआती स्टॉक होता है।

खाने के बिजनेस में आटा, मसाले, तेल और पैकेजिंग सामग्री चाहिए, तो कपड़ों के काम में कपड़ा, धागा और सहायक सामग्री चाहिए। कई लोग सिर्फ पहले ऑर्डर का खर्च गिनते हैं, जबकि असल में कुछ स्टॉक पहले से रखना पड़ता है ताकि ऑर्डर आने पर देर न हो। उदाहरण के लिए, अगर आप महीने में 100 ऑर्डर की योजना बना रहे हैं, तो कम से कम 120 ऑर्डर के बराबर कच्चा माल रखने का अंदाजा लगाएं। इससे स्टॉक खत्म होने की परेशानी कम होगी। साथ ही, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी होता है, इसलिए बजट में थोड़ी गुंजाइश रखना समझदारी है।

उपकरण, पैकेजिंग और डिलीवरी का खर्च

दूसरा बड़ा खर्च उपकरणों का होता है। सिलाई मशीन, ओवन, मिक्सर, प्रिंटर या कंप्यूटर, जो भी काम के लिए जरूरी है, उसकी कीमत बजट में शामिल करें। पुराने उपकरण सस्ते मिल सकते हैं, लेकिन उनकी मरम्मत का खर्च भी ध्यान में रखें। तीसरा खर्च पैकेजिंग का है। डिब्बे, थैले, लेबल और सील करने का सामान छोटा दिखता है, लेकिन हर ऑर्डर के साथ यह खर्च जुड़ता है। चौथा खर्च डिलीवरी और आने-जाने का है। अगर आप खुद सामान पहुंचाते हैं, तो पेट्रोल या किराए का खर्च गिनें, और अगर कूरियर से भेजते हैं, तो प्रति ऑर्डर शुल्क का अंदाजा लगाएं।

ये तीनों खर्च मिलकर लागत का बड़ा हिस्सा बन जाते हैं, इसलिए इन्हें हल्के में न लें।

मार्केटिंग, रजिस्ट्रेशन और इमरजेंसी फंड

पांचवां खर्च मार्केटिंग का है। आज ग्राहक तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया, स्थानीय प्रचार या छोटे विज्ञापन की जरूरत पड़ती है। शुरुआत में यह खर्च छोटा रखा जा सकता है, लेकिन इसे शून्य मान लेना गलत होगा। छठा और सबसे जरूरी खर्च इमरजेंसी फंड है। बिजनेस के पहले महीनों में बिक्री कम भी हो सकती है, कोई उपकरण खराब हो सकता है, या कोई ऑर्डर रुक सकता है। ऐसे समय के लिए कम से कम 2 से 3 महीने के बुनियादी खर्च के बराबर रकम अलग रखना सुरक्षित माना जाता है।

इसके अलावा, काम की प्रकृति के अनुसार रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस या बैंक खाते से जुड़े छोटे शुल्क भी हो सकते हैं, जिनकी जानकारी संबंधित विभाग या बैंक से पहले ही ले लेनी चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर शुरुआती बजट 50,000 रुपये का है, तो उसे सिर्फ सामान पर खर्च करने के बजाय इन 6 हिस्सों में बांटकर देखें, ताकि कोई हिस्सा खाली न रहे।

अंत में यही सलाह है कि बिजनेस शुरू करने से पहले एक सादी कॉपी में इन 6 खर्चों की सूची बनाएं और हर खर्च के सामने अनुमानित रकम लिखें। हर महीने इस सूची को दोबारा देखें और असल खर्च से मिलान करें।

इससे धीरे-धीरे बजट का अंदाजा सटीक होता जाएगा और बिजनेस की नींव मजबूत होगी। कोई भी आंकड़ा पक्का लाभ या गारंटी नहीं है, हर कारोबार की स्थिति अलग होती है, इसलिए बड़े फैसलों से पहले संबंधित विभाग, बैंक या किसी अनुभवी सलाहकार से पुष्टि जरूर करें।