Delhi-Dehradun Expressway: बाइकर्स के लिए 'नो एंट्री'! गलती से भी चढ़े तो कटेगा ₹20,000 का चालान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब केवल एक सड़क नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की रफ़्तार का प्रतीक बन चुका है। सरकार इसे “इकोनॉमिक और इकोलॉजिकल हाइवे” कह रही है, जिसने दिल्ली से देहरादून के बीच की दूरी को समेटकर महज 2.5 घंटे का कर दिया है। लेकिन, जहां कार सवार इस रफ़्तार का आनंद ले रहे हैं, वहीं बाइक सवारों के लिए कुछ कड़े और नए नियम लागू कर दिए गए हैं।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को लेकर ट्रैफिक पुलिस और संबंधित अधिकारियों ने दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर स्थिति साफ कर दी है। ताजा जानकारी के अनुसार, दिल्ली के गीता कॉलोनी से बागपत (खेकड़ा) तक बने लगभग 26 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड सेक्शन पर मोटरसाइकिल, ऑटोरिक्शा, ट्रैक्टर और अन्य धीमी गति वाले वाहनों की एंट्री को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर कारों के लिए अधिकतम स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जबकि बसों और ट्रकों जैसे भारी वाहनों के लिए यह सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा है। अधिकारियों का तर्क है कि एक्सप्रेसवे को बहुत तेज़ गति वाले ट्रैफिक के लिए बनाया गया है। ऐसे में अगर धीमी गति से चलने वाली बाइक, ऑटो या ट्रैक्टर बीच में आते हैं, तो न केवल ट्रैफिक की रफ़्तार बिगड़ती है, बल्कि भीषण दुर्घटनाओं का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
अगर आप इन नियमों को हल्के में ले रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। प्रतिबंधित सेक्शन पर बाइक या ऑटो ले जाने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत ₹20,000 तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, पुलिस को वाहन ज़ब्त करने का भी अधिकार है। एक्सप्रेसवे के एंट्री पॉइंट्स पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है ताकि कोई भी प्रतिबंधित वाहन गलती से भी ऊपर न चढ़ पाए।
सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में एक्सप्रेसवे के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे मुख्य रूप से “कार-सेंट्रिक” होता जा रहा है। बाइक सवारों को अब देहरादून जाने के लिए पुराने रास्तों जैसे NH-9 या NH-334 का ही सहारा लेना होगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि बाइकर्स गूगल मैप का इस्तेमाल करते समय ‘Avoid Highways’ या वैकल्पिक रास्तों वाली सेटिंग चुनें, ताकि वे गलती से एलिवेटेड रोड पर न पहुँचें।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे वाकई नए भारत की प्रगति की तस्वीर है, लेकिन इस प्रगति का हिस्सा बनने के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य है। प्रतिबंधित हिस्से पर बाइक ले जाना अब सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा और बजट दोनों के लिए एक बड़ा जोखिम है।