ऑनलाइन बिजनेस में ग्राहक ने पार्सल लेने से मना कर दिया तो विक्रेता को कितना नुकसान हो सकता है? वापसी का छिपा खर्च जान लें

Newspoint

ऑनलाइन सामान बेचने वाले हर विक्रेता के साथ कभी न कभी यह होता है। ग्राहक ने ऑर्डर किया, पार्सल उसके शहर तक पहुंचा, और उसने लेने से मना कर दिया। विक्रेता को लगता है कि बस बिक्री नहीं हुई, लेकिन असल में नुकसान बिक्री न होने से कहीं ज्यादा होता है। पार्सल को भेजने का खर्च, वापस लाने का खर्च, प्लेटफॉर्म का शुल्क और सामान की जांच और दोबारा पैकिंग का समय, सब कुछ विक्रेता के हिस्से आता है।

कई बार तो एक मना किया गया पार्सल, दो सफल बिक्रियों का मुनाफा खा जाता है।

नुकसान समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि ऑनलाइन बिक्री पर कौन-कौन से खर्च लगते हैं। सामान की खरीद लागत के अलावा प्लेटफॉर्म कमीशन, क्लोजिंग शुल्क, शिपिंग शुल्क और कलेक्शन शुल्क लगते हैं। इन सभी शुल्कों पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी लगता है। कोई एक तय दर नहीं होती, यह सामान की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग होती है। जब पार्सल वापस आता है, तो इनमें से कई शुल्क वापस नहीं मिलते। वापसी की शिपिंग का खर्च भी अक्सर विक्रेता को ही उठाना पड़ता है।

इसलिए मना किया गया हर पार्सल सीधा घाटा है।

एक मना किए गए पार्सल का पूरा हिसाब

कैश ऑन डिलीवरी वाले ऑर्डर में यह समस्या और भी ज्यादा होती है। पहले से भुगतान किए गए ऑर्डर में ग्राहक ने सोच-समझकर खरीदा होता है, लेकिन कैश ऑन डिलीवरी में कई बार ग्राहक बिना सोचे ऑर्डर कर देता है और बाद में मना कर देता है। इसलिए कई अनुभवी विक्रेता कैश ऑन डिलीवरी वाले ऑर्डर पर विशेष ध्यान देते हैं। ऑर्डर मिलने के बाद ग्राहक से पुष्टि करना, सही पता जांचना और डिलीवरी से पहले संदेश भेजना, इनसे मना किए जाने की दर कम हो सकती है।

नुकसान कम करने के व्यावहारिक तरीके

पहला तरीका है सामान का विवरण और तस्वीरें पूरी तरह सही रखना। गलत आकार, गलत रंग या अधूरी जानकारी से ग्राहक को पार्सल खोलते ही निराशा होती है और वह उसे लेने से मना कर देता है। दूसरा तरीका है सही पैकिंग। रास्ते में टूटा हुआ सामान भी वापस आता है, इसलिए पैकिंग मजबूत होनी चाहिए। तीसरा तरीका है ग्राहक से संवाद। ऑर्डर के बाद धन्यवाद संदेश और डिलीवरी से पहले जानकारी देने से ग्राहक तैयार रहता है। चौथा तरीका है वापसी आए सामान की तुरंत जांच। जितनी जल्दी सामान दोबारा बिक्री के लिए तैयार होगा, उतना कम नुकसान होगा।

इसके अलावा हर महीने मना किए गए पार्सलों का रिकॉर्ड रखें। अगर किसी खास सामान, किसी खास शहर या किसी खास कीमत पर मना किए जाने की दर ज्यादा है, तो वहां समस्या है। हो सकता है कि उस सामान का विवरण गलत हो, या उस शहर में डिलीवरी की कोई दिक्कत हो। रिकॉर्ड देखने से ही पैटर्न समझ में आता है। प्लेटफॉर्म के शुल्क और नीतियां समय-समय पर बदलती रहती हैं, इसलिए अपने प्लेटफॉर्म की वर्तमान नीति जरूर जांचते रहें।

विक्रेता को क्या-क्या ध्यान रखना चाहिए

ऑनलाइन बिजनेस में मना किए गए पार्सल को सामान्य खर्च का हिस्सा मानकर चलना चाहिए।

इसका मतलब यह नहीं है कि इसे नजरअंदाज कर दिया जाए। इसका मतलब यह है कि कीमत तय करते समय इस खर्च का भी अंदाजा रखा जाए। अगर हर 100 में से 10 पार्सल वापस आते हैं, तो उन 10 के खर्च को बाकी 90 की कीमत में ही समेटना होगा। नहीं तो महीने के अंत में मुनाफा कागज पर दिखेगा, लेकिन हाथ में पैसा कम बचेगा।

ऑनलाइन बिक्री में सफलता सिर्फ ज्यादा ऑर्डर लाने से नहीं मिलती। सफलता इस बात से मिलती है कि कितने ऑर्डर सफलतापूर्वक पूरे हुए और उन पर कितना खर्च आया। पार्सल मना किए जाने की दर को कम करना, सही विवरण देना और वापसी का तेज प्रबंधन करना, यही तीन बातें विक्रेता के मुनाफे की रक्षा करती हैं।

किसी भी शंका पर अपने प्लेटफॉर्म की नीति और चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लें।