पेट्रोल पंप पर फ्यूल भरवाते समय बिल लेना क्यों जरूरी है? गड़बड़ी होने पर ऐसे करें शिकायत
पेट्रोल पंप पर फ्यूल भरवाते समय कई लोग बिल लेना भूल जाते हैं या उसे जरूरी नहीं समझते। लेकिन बिल सिर्फ एक कागज नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि आपने कब, कितना फ्यूल और कितनी कीमत पर लिया है। अगर बाद में मीटर, मात्रा या कीमत को लेकर कोई शक हो तो बिल के बिना शिकायत करना मुश्किल हो जाता है।
पंजीकृत विक्रेता को बिल देना जरूरी होता है और ग्राहक के तौर पर बिल मांगना आपका अधिकार है।
बिल मिलते ही उस पर लिखी मात्रा और रकम को मीटर से मिलाएं। अगर मीटर पर दिखी रकम और बिल की रकम में अंतर है तो तुरंत पंप पर ही सवाल उठाएं। तारीख और समय भी जांचें, क्योंकि पुराना या गलत बिल बाद में काम नहीं आता। बिल को संभालकर रखना भी उतना ही जरूरी है जितना उसे लेना है, इसलिए उसकी तस्वीर अपने फोन में भी रख सकते हैं।
कुछ लोग सिर्फ कैश मेमो को ही काफी मान लेते हैं, लेकिन पूरी जानकारी वाला बिल ही सही सबूत होता है। अगर पंप पर बिल देने से मना किया जाए तो यह गलत है और इसकी शिकायत की जा सकती है। बिल मांगने पर किसी तरह की शर्म या झिझक की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह आपका अधिकार है।
गड़बड़ी होने पर शिकायत कैसे करेंअगर फ्यूल की मात्रा कम लगे या कीमत में गड़बड़ी लगे तो सबसे पहले पंप प्रबंधक से बात करें और बिल दिखाएं। बात न बने तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर शिकायत की जा सकती है। शिकायत करते समय बिल, तारीख, समय, पंप का नाम और गाड़ी का ब्योरा साथ रखें।
इसके अलावा स्थानीय विधिक माप विभाग से भी संपर्क किया जा सकता है, क्योंकि फ्यूल की मात्रा मापने वाले यंत्रों की जांच उसी के दायरे में आती है। शिकायत के बाद उसका संदर्भ नंबर संभालकर रखें और आगे की जानकारी के लिए उसका इस्तेमाल करें। बिल न होने पर शिकायत की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है, इसलिए बिल लेना ही सबसे पहला कदम है।
अंत में यह आदत बना लें कि फ्यूल भरवाने के बाद बिल लेना और उसे जांचना कभी न भूलें। बिल छोटा सा कागज लगता है, लेकिन शिकायत के समय यही सबसे मजबूत सबूत बनता है।
बिल से जुड़ी जानकारी को नोट करके रखना भी फायदेमंद होता है। महीने के अंत में बिलों को देखकर यह पता चलता है कि फ्यूल पर कुल कितना खर्च हुआ और किसी महीने में खर्च अचानक क्यों बढ़ा।