पेट्रोल-डीजल के दाम पर मंडराया बड़ा खतरा, अमेरिका-ईरान शांति वार्ता फेल होते ही 3% महंगा हुआ क्रूड ऑयल

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नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार से एक बार फिर आम आदमी की जेब को झटका देने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। सोमवार को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अचानक एक बहुत बड़ा उछाल देखने को मिला है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल के दामों में आई इस अचानक तेजी के पीछे तीन बड़े और मुख्य कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं।

पहला और सबसे बड़ा कारण है ईरान द्वारा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद करने का बड़ा फैसला।

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दूसरा कारण, होर्मुज के रास्ते होने वाली जहाजों की अंतरराष्ट्रीय शिपिंग का बेहद धीमा हो जाना। और तीसरा सबसे बड़ा कारण, अंतरिम शांति समझौते के तहत अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच शुरू हुई पहली ही बैठक का बेहद तनावपूर्ण और मुश्किलों से भरा होना रहा।

इन्हीं तीन वजहों से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3 फीसदी तक की भारी तेजी दर्ज की गई है। खाड़ी देशों का ब्रेंट क्रूड जहां एक बार फिर $82 प्रति बैरल के पार जाता हुआ दिखाई दिया, वहीं अमेरिकी क्रूड के दाम भी $78 प्रति बैरल के ऊपर निकल गए हैं।

कच्चे तेल की इस नई आग की वजह से भारत समेत पूरी दुनिया में एक बार फिर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़े इजाफे का खतरा मंडराने लगा है।

सोमवार को अचानक बाजार में क्या हुआ?

सोमवार को ट्रेडिंग की शुरुआत होते ही बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $82.30 के उच्चतम स्तर को छूने के बाद थोड़ा संभलकर 54 सेंट या 0.67 फीसदी की बढ़त के साथ $81.11 प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा था। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स $78.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो सोमवार को कांट्रैक्ट की समाप्ति से पहले $2.02 या 2.64% ऊपर था।

वैश्विक शिपिंग डेटा से साफ पता चला है कि रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में अचानक भारी गिरावट आ गई। यह गिरावट तब देखने को मिली जब ईरान ने आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि उसने अंतरिम शांति समझौते के इजरायली और अमेरिकी उल्लंघनों का हवाला देते हुए इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग को फिर से ब्लॉक (बंद) कर दिया है।

ईरान और अमेरिका की वार्ता में फंसा पेच

एमएसटी मार्की के एनर्जी रिसर्च प्रमुख सॉल कैवोनिक ने रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया कि होर्मुज जलमार्ग के इतनी जल्दी पूरी तरह खुलने को लेकर बाजार ने जो उम्मीदें लगा रखी थीं, वे बेहद जल्दबाजी भरी थीं।

उन्होंने कहा कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय रास्ते से होने वाली जहाजों की आवाजाही को रोकने के लिए लगातार नए-नए बहाने ढूंढता रहेगा, क्योंकि अमेरिका और पश्चिमी देशों पर दबाव बनाने का ईरान के पास यही एकमात्र सबसे बड़ा जरिया है, जिसे वह इतनी आसानी से अपने हाथ से नहीं जाने देगा।

इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दोबारा सैन्य हमले शुरू करने की सीधी धमकी दी है, जबकि दूसरी तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार को अंतरिम शांति समझौते के तहत पहली आधिकारिक बातचीत के लिए ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की।

इस मुलाकात के बीच तेहरान (ईरान) ने आरोप लगाया कि अमेरिका लेबनान में लड़ाई को पूरी तरह रुकवाने के अपने वादे को पूरा करने में बुरी तरह नाकाम रहा है। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी एनएनए (NNA) के मुताबिक, शनिवार को लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 20 लोग मारे गए। यह खूनी हमला हिज्बुल्लाह के साथ युद्धविराम (Ceasefire) लागू होने के ठीक एक दिन बाद हुआ, जिसका मकसद महीनों से बढ़ रही हिंसा को शांत करना था।

पिछले हफ्ते 8 फीसदी से ज्यादा टूटे थे दाम

आईजी मार्केट के जाने-माने एनालिस्ट टोनी सिकामोर ने अपने एक नोट में कहा कि लेबनान की ताजा स्थिति इस वक्त दोनों ही मोर्चों— यानी युद्धविराम और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने, के लिए एक बेहद गंभीर खतरा बनी हुई है।

हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि पिछले हफ्ते तेल की कीमतों में 8 फीसदी से ज्यादा की भारी गिरावट देखी गई थी। इसकी मुख्य वजह खाड़ी में फंसे हुए तेल के जहाजों (कार्गो) का सुरक्षित बाहर निकलना और अमेरिका-ईरान डील के तहत ईरानी तेल पर से अमेरिकी प्रतिबंध हटने की उम्मीद थी, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ने की पूरी संभावना थी।

नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी के प्रमुख हामिद बोवार्ड ने रविवार को सरकारी टीवी को बताया कि सोमवार से अब तक 25 मिलियन बैरल से ज्यादा का ईरानी तेल उस वर्चुअल नाकेबंदी वाली लाइन से सुरक्षित गुजर चुका है।

इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और इराक ने भी पिछले हफ्ते अपने वैश्विक ग्राहकों को और ज्यादा कच्चा तेल देने की पेशकश की थी। इराक के अपस्ट्रीम मामलों के डिप्टी ऑयल मिनिस्टर ने रविवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि इराक कच्चे तेल के अपने घरेलू प्रोडक्शन को धीरे-धीरे बढ़ाकर 4.2 मिलियन से 4.3 मिलियन बैरल प्रति दिन करने की बड़ी योजना पर काम कर रहा है।

क्या भारत में महंगा होने जा रहा है पेट्रोल और डीजल?

अब सबसे बड़ा और अहम सवाल यह खड़ा हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में आए इस ताजा उछाल से क्या भारत में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी? कमोडिटी और आर्थिक मामलों के जानकारों की मानें तो फिलहाल तुरंत ऐसा होना काफी मुश्किल लग रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें अभी 80 और 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही घूम रही हैं। जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम $95 या $100 प्रति बैरल के पार नहीं चले जाते, तब तक भारतीय तेल कंपनियां खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी करने का जोखिम नहीं उठाएंगी। एक्सपर्ट्स के अनुसार, होर्मुज और ईरान-अमेरिका डील पर बातचीत चलने के दौरान आने वाले दिनों में कीमतों में ऐसी छोटी-मोटी उठक-पटक कई बार देखने को मिल सकती है।

देश के चारों महानगरों में आज क्या हैं तेल के दाम?

राहत की बात यह है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर फिलहाल काफी समय से ‘फ्रीज बटन’ दबा हुआ है।