30 जून के बाद भी नहीं बढ़ेंगे इन 40 जरूरी चीजों के दाम! सरकार देने जा रही है अब तक का सबसे बड़ा तोहफा
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और दुनिया भर में सप्लाई चेन से जुड़ी बड़ी चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार आम जनता और भारतीय उद्योगों को एक बहुत बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। सरकार 40 जरूरी प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) में दी गई भारी राहत को 30 जून के बाद भी आगे जारी रखने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि, इस मामले पर आखिरी और अंतिम फैसला उस क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, सरकारी खजाने की कमाई पर पड़ने वाले असर और बाजार में सप्लाई की उपलब्धता को पूरी तरह देखने के बाद ही लिया जाएगा।
आपको बता दें कि सरकार ने इसी साल 2 अप्रैल से कई जरूरी पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर कस्टम्स ड्यूटी (सीमा शुल्क) को अस्थायी तौर पर घटाकर पूरी तरह से शून्य यानी जीरो कर दिया था। सरकार द्वारा दी गई यह बड़ी राहत फिलहाल 30 जून तक के लिए ही लागू है। इस कदम को उठाने का सरकार का मुख्य मकसद घरेलू उद्योगों को कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों और ग्लोबल मार्केट में सप्लाई में आ रही दिक्कतों से सुरक्षित बचाना था।
इन 40 जरूरी केमिकल और प्रोडक्ट्स पर मिल रही है भारी छूटसरकार ने जिन खास प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ी छूट दी है, उनमें मुख्य रूप से मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यूइन, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर, पॉली ब्यूटाडाइन, स्टाइरीन ब्यूटाडाइन और अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन जैसे कई महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल और केमिकल्स शामिल हैं।
देखने में भले ही ये नाम आपको थोड़े तकनीकी लगें, लेकिन हमारे रोजमर्रा के जीवन में इनका बहुत बड़ा रोल है। इन सभी केमिकल्स का इस्तेमाल देश के भीतर प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग), फार्मा (दवाई निर्माण), केमिकल, ऑटो पार्ट्स (गाड़ियों के पुर्जे) और दूसरे बड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कच्चे माल के रूप में बहुत बड़े पैमाने पर किया जाता है। अगर इन पर राहत जारी रहती है, तो इनसे बनने वाली तमाम चीजें बाजार में सस्ती बनी रहेंगी।
फैसला लेने से पहले सरकार करेगी अपने रेवेन्यू का पूरा आकलनअसल में पिछले कुछ महीनों के दौरान पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होने की वजह से कच्चे तेल, खाद्य उत्पादों और जरूरी उर्वरकों (खाद) की आयात लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है।