'जितना तेल चाहिए, उतना देंगे…' भारत दौरे से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री के इस बयान ने दुनिया को चौंकाया

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वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल को लेकर मचे हाहाकार के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी पहली भारत यात्रा पर आने से ठीक पहले एक ऐसा बड़ा बयान दिया है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। रुबियो ने साफ कहा है कि अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े तेल खरीदार देशों में शुमार भारत को और ज्यादा कच्चा तेल बेचने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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अमेरिकी विदेश मंत्री का यह चौंकाने वाला बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान युद्ध के बाद दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों से होने वाली सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस युद्ध की वजह से समंदर का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता यानी ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद हो चुका है, जिससे भारत आने वाले तेल जहाजों की आवाजाही पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इस संकट के बीच अमेरिका का यह दांव भारत के लिए संजीवनी बूस्ट साबित हो सकता है।

भारत जितना चाहे, हम उतना तेल देने को तैयार: मार्को रुबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो नाटो (NATO) देशों के विदेश मंत्रियों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने के लिए स्वीडन रवाना हुए हैं।

स्वीडन के लिए उड़ान भरने से ठीक पहले उन्होंने मीडिया से बातचीत में भारत को लेकर अमेरिका का रुख पूरी तरह साफ कर दिया। रुबियो ने कहा कि हम भारत को उतना तेल बेचना चाहते हैं, जितना वे हमसे खरीदना चाहें। उन्होंने आगे कहा कि जैसा कि सब देख ही रहे हैं, अमेरिका इस समय तेल उत्पादन और अमेरिकी एक्सपोर्ट (निर्यात) के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि वे इस रिकॉर्ड उत्पादन का फायदा भारत को देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम तेल के क्षेत्र में और ज्यादा बड़ा काम करना चाहते हैं।

हम पहले से ही भारत के साथ इस विषय पर लगातार बातचीत कर रहे थे। हमारी पूरी कोशिश और इच्छा है कि अमेरिका भारत को तेल एक्सपोर्ट करने वाले सबसे प्रमुख देशों की सूची में शामिल हो जाए।

ट्रंप प्रशासन की नजर भारत के विशाल तेल बाजार पर

मार्को रुबियो ने बातचीत में यह भी पूरी तरह साफ कर दिया कि मौजूदा ट्रंप प्रशासन चाहता है कि अमेरिकी तेल, भारत के कुल इंपोर्ट (आयात) पोर्टफोलियो का एक बहुत बड़ा और मुख्य हिस्सा बने। अमेरिका ऐसा इसलिए चाहता है क्योंकि भारत दुनिया भर में कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों और इंपोर्टर्स में से एक है।

भारत जैसा बड़ा बाजार किसी भी तेल उत्पादक देश के लिए जैकपॉट की तरह है।

भारत को वेनेजुएला का तेल बेचने की तैयारी में अमेरिका

अगर वर्तमान आंकड़ों को देखें तो भारत अपनी जरूरत का आधे से अधिक कच्चा तेल खाड़ी देशों (मिडल ईस्ट) से खरीदता है। दूसरी तरफ, अमेरिका भी पिछले कुछ सालों में एक बड़े तेल विक्रेता के रूप में उभरा है। अमेरिका अब एक ऐसा भरोसेमंद और मजबूत पार्टनर ढूंढ रहा है जो बहुत बड़ी मात्रा में और रेगुलर तौर पर उससे तेल की खरीदारी करता रहे। इस मामले में भारत उसकी उम्मीदों पर पूरी तरह फिट बैठता है।

इतना ही नहीं, रुबियो ने वेनेजुएला के कच्चे तेल को लेकर भी भारत के साथ एक बड़े सहयोग की बात कही है। उन्होंने कूटनीतिक संकेत देते हुए कहा कि हमें लगता है कि वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में भी दोनों देशों के लिए बड़े मौके मौजूद हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति अगले हफ्ते भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं।

होर्मुज संकट के बीच एनर्जी सिक्योरिटी बनी सबसे बड़ा मुद्दा

मार्को रुबियो ने भारत यात्रा पर आने से पहले भारत को अमेरिका का एक ‘महान पार्टनर’ और बेहद खास दोस्त बताया।

उन्होंने कहा कि उनकी इस आगामी विजिट की टाइमिंग ऐसी है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई और अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। भारत एक महान सहयोगी देश है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 23 से 26 मई (2026) के दौरान अपनी भारत यात्रा पर रहेंगे। इस हाई-प्रोफाइल दौरे के दौरान वे कोलकाता, आगरा, जयपुर और देश की राजधानी नई दिल्ली का दौरा करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग ने साफ किया है कि इस पूरी यात्रा का मुख्य फोकस एनर्जी (ऊर्जा), डिफेंस (रक्षा), ट्रेड (व्यापार) और सुरक्षा सहयोग पर रहने वाला है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने भी पुष्टि की है कि रुबियो अपनी इस यात्रा में भारतीय वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर गहन चर्चा करेंगे।