बिजली बिल में गलत मीटर रीडिंग दर्ज हो गई तो अगला बिल आने से पहले सुधार कैसे कराएं?

Newspoint

बिजली का बिल आते ही कई लोगों को लगता है कि इस बार रकम ज्यादा है। कई बार इसका कारण ज्यादा खपत नहीं, बल्कि मीटर रीडिंग में हुई गलती होती है। अगर रीडिंग गलत दर्ज हो गई है तो अगला बिल आने से पहले सुधार कराना सबसे अच्छा रहता है, क्योंकि देर करने पर गलती अगले बिलों में भी चलती रह सकती है।

मीटर रीडिंग का मतलब है कि एक तय अवधि में कितनी बिजली खर्च हुई है। बिल में पिछली रीडिंग और मौजूदा रीडिंग दोनों लिखी होती हैं।

इन दोनों का अंतर ही उस महीने की खपत बताता है। अगर मौजूदा रीडिंग गलत लिखी गई है तो खपत का हिसाब भी गलत हो जाता है और बिल की रकम बढ़ या घट सकती है।

गलत रीडिंग कैसे पहचानें

गलत रीडिंग पहचानने का सबसे आसान तरीका है कि बिल में लिखी रीडिंग की तुलना अपने मीटर से करें। मीटर पर दिख रही संख्या को ध्यान से पढ़ें और बिल में दर्ज संख्या से मिलाएं। अगर दोनों में बड़ा अंतर है तो गलती की संभावना है। इसके अलावा पिछले कुछ महीनों के बिलों से भी तुलना की जा सकती है। अगर खपत अचानक कई गुना बढ़ गई है और घर में कोई नया बड़ा उपकरण नहीं लगा है तो रीडिंग की जांच करना जरूरी है।

एक और स्थिति यह होती है कि बिल अनुमान के आधार पर बना हो। जब मीटर नहीं पढ़ा जाता तो कई बार पिछले महीनों की औसत खपत के आधार पर अनुमानित बिल जारी कर दिया जाता है। ऐसे बिल में यह बात लिखी होती है कि रीडिंग अनुमानित है। अगली वास्तविक रीडिंग आने पर इसमें समायोजन किया जाता है। इसलिए बिल को ध्यान से पढ़ना और अनुमानित लिखा है या वास्तविक, यह देखना बहुत जरूरी है।

सुधार के लिए क्या करें

सबसे पहले मीटर की तस्वीर खींचकर रख लें, जिसमें मीटर नंबर और रीडिंग साफ दिखे। इसके बाद बिजली विभाग के कार्यालय, हेल्पलाइन या ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

शिकायत में उपभोक्ता संख्या, बिल की अवधि, बिल में दर्ज रीडिंग और मीटर की वास्तविक रीडिंग साफ-साफ लिखें। मीटर की तस्वीर शिकायत के साथ जोड़ने से जांच आसान हो जाती है।

शिकायत दर्ज कराने के बाद उसकी पावती या शिकायत संख्या संभालकर रखनी चाहिए। विभाग की ओर से जांच के लिए कोई व्यक्ति मीटर देखने आ सकता है। जांच के समय घर पर रहना और मीटर तक पहुंच देना मददगार रहता है। अगर जांच में गलती साबित होती है तो बिल में सुधार किया जाता है और अगला बिल सही रीडिंग के आधार पर बनाया जाता है।

अगला बिल आने से पहले क्या जांचें

सुधार की प्रक्रिया के दौरान यह भी देखना चाहिए कि पुराने बिल का कोई बकाया तो नहीं जुड़ा है। कई बार पुराने बिल का बकाया नए बिल में जुड़कर आता है और लोग इसे गलती समझ लेते हैं। इसलिए भुगतान करने से पहले पिछले बिलों की रसीदों से रिकॉर्ड मिलाना चाहिए। अगर बकाया पहले ही चुकाया जा चुका है तो उसकी रसीद शिकायत के साथ दिखानी चाहिए।

बिजली की दरें स्लैब, श्रेणी और राज्य के हिसाब से अलग होती हैं, इसलिए किसी एक तय दर को पूरे देश पर लागू मानकर हिसाब नहीं लगाना चाहिए। सही जानकारी के लिए अपने बिजली विभाग की वेबसाइट या कार्यालय से पुष्टि करें।

मीटर की रीडिंग को हर महीने खुद नोट करके रखना एक आसान आदत है, जिससे गलत बिल की पहचान तुरंत हो जाती है।