8वें वेतन आयोग से आई सबसे बड़ी खबर: अब हर 10 साल नहीं, बल्कि हर 5 साल में बढ़ेगी सैलरी और पेंशन

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केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने एक पुरानी और बेहद अहम मांग फिर से जोर पकड़ती हुई नजर आ रही है. विभिन्न कर्मचारी संगठनों का साफ तौर पर कहना है कि वेतन और पेंशन में संशोधन (Pay Revision) के लिए 10 साल का लंबा इंतजार करना अब उचित नहीं है. इसी वजह से अब मांग उठाई जा रही है कि इस अवधि को आधा किया जाए और हर 5 साल में पे रिवीजन किया जाना चाहिए.

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संगठनों का तर्क है कि देश में महंगाई लगातार बढ़ती रहती है, लेकिन इसके मुकाबले बेसिक पे और कई भत्तों में लंबे समय तक कोई बदलाव नहीं होता है. इसकी वजह से समय के साथ-साथ कर्मचारियों और पेंशनर्स की वास्तविक क्रय शक्ति (Real Purchasing Power) पर बहुत बुरा असर पड़ता है.

5 साल में वेतन और पेंशन संशोधन की पुरजोर डिमांड

बीते 7 अगस्त को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने रखे गए प्रमुख सुझावों में भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने भी यह मांग प्रमुखता से शामिल की है कि वेतन और पेंशन का संशोधन हर 5 साल पर होना चाहिए.

संगठन का दावा है कि वह देश भर के लाखों पेंशनर्स का प्रतिनिधित्व करता है. वहीं दूसरी तरफ, नेशनल काउंसिल-JCM स्टॉफ साइड ने भी अपने आधिकारिक मेमोरेंडम में यह बात कही है कि नियमित और तय अंतराल पर वेतन संशोधन होना बेहद जरूरी है, ताकि कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन बदलती हुई आर्थिक परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठा सके. यानी कर्मचारी संगठनों की ओर से इस मुद्दे को इस बार सबसे आगे रखा गया है.

ऑटोमैटिक रिविजन मैकेनिज्म और नए सुझाव

रेलवे सीनियर सिटिजन वेलफेयर सोसाइटी ने अपने सुझाव में महंगाई और वेतन संशोधन के बीच के लंबे अंतर को लेकर गहरी चिंता जताई है.

संगठन का मानना है कि महंगाई भत्ता (DA) कर्मचारियों को कुछ हद तक राहत जरूर देता है, लेकिन वेतन आयोग के बीच लंबा गैप होने के कारण उनकी वास्तविक आय पर लगातार दबाव बना रहता है. इसी समस्या से निपटने के लिए संगठन ने महंगाई या किसी निश्चित कॉस्ट इंडेक्स से जुड़े ऑटोमैटिक रिविजन मैकेनिज्म का शानदार सुझाव दिया है. इसके लागू होने पर वेतन और पेंशन के लिए कर्मचारियों को लंबे समय तक अगले वेतन आयोग का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.

FNPO का 728 पेज का मेमोरेंडम और बड़ा प्रस्ताव

फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) ने 8वें वेतन आयोग के सामने एक और भी बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव सुझाया है.

अपने 728 पेज के लंबे-चौड़े मेमोरेंडम में उन्होंने 10 साल वाले पुराने पे कमीशन साइकिल को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है. संगठन ने एक ‘परमानेंट वेज रिव्यू Body’ (Permanent Wage Review Body) बनाने का प्रस्ताव रखा है, जो कुछ तय और खास आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर समय-समय पर वेतन की समीक्षा कर सके.

FNPO ने यह भी सुझाव दिया है कि जब डीए (DA) बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच जाए, तो फिटमेंट रिव्यू जैसी प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाना चाहिए. हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये सभी मांगें और सुझाव विभिन्न कर्मचारी संगठनों की तरफ से दिए गए हैं, और इन पर कोई भी अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों तथा सरकार की प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा.

7वें वेतन आयोग के समय भी उठा था यह बड़ा मुद्दा

हर 5 साल में वेतन संशोधन की यह मांग कोई नई बात नहीं है. इससे पहले 7वें वेतन आयोग के गठन के समय भी कर्मचारी संगठनों ने इस मुद्दे कोजोर-शोर से उठाया था. उस दौरान भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने याद दिलाया था कि वर्ष 1997 से पहले देश की कुछ चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) में वेतन संशोधन का अंतर केवल 5 साल का ही हुआ करता था, जिसे बाद में बदलकर 10 साल कर दिया गया था. संगठन ने तब भी कम अवधि में वेतन संशोधन की व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया था, जिससे साफ पता चलता है कि पे रिविजन साइकिल को छोटा करने की यह मांग लंबे समय से कर्मचारियों के एजेंडे में शामिल रही है.

भले ही हर 5 साल में वेतन और पेंशन में संशोधन करने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कितना पड़ेगा, इसका कोई सटीक आंकड़ा इन सुझावों में नहीं दिया गया है, लेकिन NCJCM स्टॉफ साइड ने अपने मेमोरेंडम में देश की मजबूत होती आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए यह विश्वास दिलाया है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में इस अतिरिक्त प्रभाव को आसानी से संभाला जा सकता है. फिलहाल, 8वें पे कमीशन के पाले में कई बेहतरीन सुझाव आ चुके हैं. अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आयोग 5 साल के रिविजन साइकिल, स्टेबल सैलरी रिव्यू सिस्टम या महंगाई से जुड़े ऑटोमैटिक मैकेनिज्म में से किस व्यवस्था को हरी झंडी दिखाता है और सरकार इस पर क्या अंतिम फैसला लेती है.