कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक दिन जल्द, 8वें वेतन आयोग के पास पहुंची पेंशन स्ट्रक्चर बदलने की मांग

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देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों को इस समय आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सिफारिशों का बहुत ही बेसब्री से इंतजार है। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक सही रास्ते पर चलता रहा, तो उम्मीद की जा रही है कि वेतन आयोग साल 2027 की पहली छमाही तक अपनी विस्तृत सिफारिशें सरकार को सौंप सकता है।

लेकिन इन सबके बीच, 8वें वेतन आयोग के अंतिम नतीजों के आने से ठीक पहले केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन से जुड़ा एक बहुत बड़ा और बेहद अहम बदलाव होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

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मीडिया रिपोर्ट्स में कर्मचारी संगठनों और यूनियन प्रतिनिधियों के हवाले से यह बड़ा दावा किया गया है कि सरकार के स्तर पर एक ऐसी नई व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों को अपनी पेंशन संरचना (Pension Structure) चुनने की पूरी आजादी और स्वतंत्रता मिल सके। हालांकि, इस दिशा में अभी तक कोई आधिकारिक सरकारी मुहर या घोषणा नहीं लगी है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों का पूरा भरोसा है कि आने वाले दो से चार महीनों के भीतर इस मामले में कोई सकारात्मक बात सामने आ सकती है।

जानिए क्या है मौजूदा पेंशन ढांचा और क्यों उठ रही है बदलाव की मांग?

मौजूदा नियमों पर नजर डालें तो 1 जनवरी 2004 या उसके बाद सरकारी सेवा में कदम रखने वाले देश के अधिकांश केंद्रीय कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के दायरे में आते हैं। इस योजना का नियम यह है कि इसमें सरकार और कर्मचारी दोनों मिलकर बराबर का योगदान करते हैं। हालांकि, इसमें सबसे बड़ा पेंच यह है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को मिलने वाली पेंशन पूरी तरह शेयर बाजार के प्रदर्शन और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर ही निर्भर करती है।

आपको याद दिला दें कि इससे पहले देश में पुरानी पेंशन योजना यानी ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) लागू हुआ करती थी, जिसमें कर्मचारी को उसके आखिरी मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर एक फिक्स और गारंटीड पेंशन मिलने की पूरी सुरक्षा मिलती थी।

इसके अलावा, हाल ही के दिनों में सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का भी ऐलान किया है, जिसमें एनपीएस (NPS) और ओपीएस (OPS) दोनों की चुनिंदा खूबियों को मिलाकर एक बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

पेंशन विकल्पों में अपनी पसंद चुनने की खुली छूट चाहती हैं यूनियनें

अब देश भर के तमाम बड़े कर्मचारी संगठन खुलकर चाहते हैं कि सरकार कर्मचारियों को बाजार में उपलब्ध अलग-अलग पेंशन विकल्पों में से अपनी पसंद का ढांचा चुनने की पूरी छूट दे, ताकि रिटायरमेंट के बाद उन्हें अधिक वित्तीय सुरक्षा और भविष्य की स्पष्टता मिल सके।

ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने भी इस बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे को 8वें वेतन आयोग के सामने बहुत प्रमुखता के साथ उठाया है।

कर्मचारी यूनियनों का साफ और स्पष्ट मानना है कि एनपीएस के तहत मिलने वाली पेंशन सीधे तौर पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर टिकी होने के कारण कर्मचारियों के दिलों में हमेशा एक डर और असुरक्षा का माहौल बनाए रखती है। यही एक मुख्य वजह है कि एक निश्चित और गारंटीड पेंशन तथा ओपीएस जैसी सुरक्षा की मांग लगातार जोर पकड़ती जा रही है। इसके साथ ही, वीआरएस यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से जुड़े आज के कड़े नियमों में भी ढील देने और जरूरी बदलाव करने की पुरजोर मांग उठाई जा रही है।

कब तक सामने आ सकती हैं 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

आठवें वेतन आयोग की तरफ से अपनी आखिरी सिफारिशें अगले साल की पहली छमाही तक सौंपे जाने की पूरी उम्मीद है। जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल ही इस नए वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया था। इसके बाद इसी साल फरवरी के महीने में आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की थी, जिसके जरिए देश भर के केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और तमाम संगठनों से सुझाव मांगे गए थे। फिलहाल वेतन आयोग अलग-अलग कर्मचारी यूनियनों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है और इन सभी दौर के विचार-विमर्श पूरे होने के बाद ही आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार के सामने पेश करेगा।