LPG Cylinder: अचानक सरकार ने लिया चौंकाने वाला फैसला! तेल कंपनियों को मिला ये सख्त आदेश

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बिजनेस डेस्क: वेस्ट एशिया (पश्चिम एशिया) में लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। अपनी ऊर्जा सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को एक कड़ा और जरूरी निर्देश जारी किया है। सरकार ने कहा है कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति या संकट से निपटने के लिए कंपनियां अपने पास कम से कम 30 दिनों का एलपीजी (LPG) रिजर्व स्टॉक यानी बैकअप हर हाल में तैयार रखें।

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सरकार का मुख्य मकसद यह है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी इमरजेंसी आती है, तो भी देश के आम नागरिकों को रसोई गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े। सिर्फ एलपीजी ही नहीं, सरकार कच्चे तेल (Crude Oil) का भी एक्स्ट्रा स्टॉक जमा करने पर तेजी से काम कर रही है ताकि देश की रफ्तार पर कोई ब्रेक न लगे।

आसमान छूती ईंधन की कीमतें और कंपनियों का भारी नुकसान

इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर भाग रही हैं। तनाव और युद्ध की स्थिति शुरू होने से पहले, यानी फरवरी के महीने में जो कच्चा तेल भारत को 69.01 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर मिल रहा था, वह मई में बढ़कर 106.83 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

क्रूड ऑयल की कीमतों में आई इस भारी उछाल की वजह से भारतीय तेल कंपनियों पर बोझ बहुत ज्यादा बढ़ गया है और उन्हें हर दिन लगभग 550 करोड़ रुपए का भारी-भरकम नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसी भारी दबाव का नतीजा है कि आम जनता की जेब पर भी असर पड़ा है और पिछले महज 10 दिनों के भीतर ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।

देश में LPG की मांग और घरेलू उत्पादन का मौजूदा गणित

अगर बात देश में रसोई गैस की खपत की करें, तो इस समय भारत में एलपीजी की दैनिक (रोजाना) मांग लगभग 72,000 मीट्रिक टन बनी हुई है, जो कि पहले 80,000 मीट्रिक टन के आसपास हुआ करती थी।

इस मांग के मुकाबले हमारी घरेलू रिफाइनरियां हर दिन करीब 52,000 मीट्रिक टन एलपीजी का उत्पादन खुद कर रही हैं। अब जो बाकी की जरूरत बच जाती है, उसे पूरा करने के लिए और विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए घरेलू रिफाइनरियों के कामकाज को और ज्यादा बेहतर और तेज करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।

समुद्र के रास्ते में फंसे भारत के कई जहाज, सरकार की बढ़ी चिंता

वेस्ट एशिया के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) इलाके में बढ़ते तनाव का सीधा असर समुद्री व्यापार पर पड़ा है। इस रास्ते में भारत के 13 बड़े जहाज फंस गए हैं, जिसने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।

फंसे हुए इन जहाजों में 1 एलपीजी कैरियर (LPG गैस लाने वाला जहाज) और 5 कच्चे तेल (Crude Oil) के बड़े टैंकर शामिल हैं। पोत परिवहन मंत्रालय (Shipping Ministry) इस पूरे घटनाक्रम और गंभीर स्थिति पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है, ताकि इन जहाजों और उन पर मौजूद भारतीय क्रू की सुरक्षित वापसी जल्द से जल्द सुनिश्चित की जा सके।