मंडी में फसल बेचते समय तौल पर्ची पर कौन-सी जानकारी जरूर जांचनी चाहिए? जान लें वरना अटक सकता है भुगतान
मंडी में फसल बेचते समय किसान की सबसे बड़ी कमाई का हिसाब तौल पर्ची पर ही टिका होता है। तौल पर्ची वह कागज है जिसमें फसल का वजन, दर और कुल रकम दर्ज होती है, और भुगतान भी अक्सर उसी के आधार पर होता है। अगर पर्ची पर कोई जानकारी गलत या अधूरी रह जाए तो बाद में भुगतान को लेकर विवाद हो सकता है, और किसान को अपना हक साबित करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए पर्ची लेते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
तौल पर्ची पर सबसे पहले किसान का नाम, फसल का नाम और तौल की तारीख सही होनी चाहिए। इसके बाद कुल वजन, खाली वाहन का वजन और शुद्ध वजन अलग-अलग साफ-साफ लिखा होना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि असल में कितनी फसल तौली गई है। अगर पर्ची पर सिर्फ एक ही वजन लिखा है तो बाद में यह समझना मुश्किल हो जाता है कि हिसाब कैसे लगा है।
पर्ची पर दर और कुल रकम भी दर्ज होनी चाहिए। धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की दिशा इस समय सामान्य श्रेणी के लिए 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए के लिए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन यह एक न्यूनतम दिशा है, मंडी में मिलने वाली असल कीमत इससे अलग हो सकती है।
तौल पर्ची की जांच मौके पर ही करना सबसे सुरक्षित तरीका है, क्योंकि मंडी से निकलने के बाद सबूत जुटाना मुश्किल हो जाता है। तौल के समय कांटे के पास खड़े रहकर वजन देखना, पर्ची पर अपना नाम और फसल का नाम पढ़ना, और रकम का मोटा हिसाब मन में ही लगा लेना अच्छी आदत है। अगर पर्ची पर कोई काट-छांट या धुंधला अंक दिखे तो उसी समय नई पर्ची मांगना बेहतर होता है।
कई किसान पर्ची को बिना पढ़े जेब में रख लेते हैं और घर जाकर देखते हैं, तब तक शिकायत करना कठिन हो जाता है।
अगर तौल या भुगतान में गड़बड़ी का शक हो तो सबसे पहले मंडी के संबंधित अधिकारी या समिति से लिखित में शिकायत करें, और अपनी पर्ची की कॉपी साथ रखें। शिकायत में तारीख, फसल, वजन और रकम साफ-साफ लिखें, ताकि जांच में आसानी हो। मौखिक शिकायत की तुलना में लिखित शिकायत का रिकॉर्ड मजबूत होता है।