जितनी बढ़ेगी उम्र, उतना ही मोटा मिलेगा पैसा! 8वें वेतन आयोग से पेंशनर्स ने मांगी अब तक की सबसे बड़ी सौगात

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जैसे-जैसे देश में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो रही हैं, वैसे-वैसे देश के लाखों पेंशनर्स के चेहरे पर उम्मीद की नई किरण दिखने लगी है। पेंशनर्स एसोसिएशन ने अब कर्मचारी यूनियनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सरकार के सामने अपनी मांगें पुरजोर तरीके से उठानी शुरू कर दी हैं। जहां एक तरफ मौजूदा सरकारी कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी, भत्तों और फिटमेंट फैक्टर में बड़े बदलाव की आस लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे बुजुर्ग यानी रिटायर्ड कर्मचारी भी अपने बुढ़ापे को आर्थिक रूप से सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं।

उम्र के साथ बढ़ता जाएगा पैसा: क्या है ‘एज-लिंक्ड’ पेंशन फॉर्मूला?

इस बार पेंशनर्स संगठनों की तरफ से जो सबसे अनोखी और मुख्य मांग सामने आई है, वो है ‘एज-लिंक्ड पेंशन सिस्टम’ यानी उम्र के हिसाब से पेंशन का बढ़ना। इस खास प्रस्ताव के मुताबिक, रिटायर्ड कर्मचारियों की उम्र जैसे-जैसे ढलती जाएगी, उनकी पेंशन की रकम वैसे-वैसे धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी। इस फॉर्मूले के पीछे की सोच बेहद नेक है, क्योंकि बुजुर्गों को बढ़ती उम्र के साथ महंगे इलाज, दवाओं और रोजमर्रा के खर्चों के लिए किसी और पर निर्भर न रहना पड़े और उनका बुढ़ापा सुरक्षित रहे।

जानिए किस उम्र में कितनी पेंशन देने की है तैयारी

पेंशनर्स ग्रुप्स की ओर से सरकार के सामने जो नया पेंशन स्ट्रक्चर का खाका पेश किया गया है, उसके तहत बुजुर्गों की बढ़ती उम्र के साथ उनकी आखिरी सैलरी का ज्यादा से ज्यादा प्रतिशत देने की वकालत की गई है। इस नए और प्रस्तावित स्ट्रक्चर को कुछ इस तरह समझा जा सकता है।

  • 65 साल की उम्र होने पर आखिरी सैलरी का 70 फीसदी हिस्सा पेंशन के रूप में मिलना चाहिए।
  • 70 साल की उम्र पार करते ही यह बढ़कर 75 फीसदी हो जाना चाहिए।
  • 75 साल की उम्र में बुजुर्गों को 80 फीसदी पेंशन मिलनी चाहिए।
  • 80 साल की उम्र के पड़ाव पर पहुंचते ही यह 85 फीसदी हो जानी चाहिए।
  • 85 साल की उम्र में पेंशन को और बढ़ाकर 90 फीसदी कर दिया जाए।
  • 90 साल या उससे ज्यादा उम्र के सुपर सीनियर पेंशनर्स के लिए तो आखिरी सैलरी का पूरा 100 फीसदी हिस्सा पेंशन के रूप में देने की मांग की गई है।

इस प्रस्ताव की वकालत करने वाले संगठनों का साफ कहना है कि ज्यादा उम्र होने पर बुजुर्गों की मेडिकल और पर्सनल केयर पर होने वाला खर्च कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में अपनी इज्जत और आर्थिक आजादी बनाए रखने के लिए यह पेंशन सपोर्ट बेहद जरूरी है।

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पेंशनर्स की झोली में आ सकती हैं कुछ और बड़ी सौगातें

उम्र के हिसाब से पेंशन बढ़ाने के अलावा, 8वें वेतन आयोग से पेंशनर्स ने कई और ऐतिहासिक सुधारों की भी लंबी लिस्ट सौंप दी है। इसमें एक बड़ी मांग यह है कि मिनिमम यानी न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर सीधे आखिरी सैलरी का (या सर्विस के आखिरी 10 महीनों की औसत सैलरी का) कम से कम 67 फीसदी तय किया जाए। इसके साथ ही, पेंशनर्स के संगठनों ने मौजूदा फिटमेंट फैक्टर के फॉर्मूले की समीक्षा करने की भी मांग की है। उनका तर्क है कि पुराना फॉर्मूला आज के महंगाई के दौर और आर्थिक हालातों से बिल्कुल मैच नहीं खाता है। इसके अलावा, महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) के सिस्टम को दोबारा परखने और फैमिली पेंशन के नियमों को और मजबूत करने की भी मांग की जा रही है ताकि कर्मचारी के न रहने पर उसके परिवार को पूरा सहारा मिल सके।

1 करोड़ से ज्यादा लोगों की किस्मत का होगा फैसला

अगर सरकार 8वें वेतन आयोग में पेंशनर्स की इन मांगों को हरी झंडी दे देती है, तो देश के एक बहुत बड़े वर्ग की तकदीर बदल जाएगी। आंकड़ों की बात करें तो इस फैसले का सीधा असर करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 56 लाख पेंशनर्स पर पड़ेगा, जिसमें भारतीय रेलवे और रक्षा क्षेत्र (डिफेंस) के रिटायर्ड जांबाज भी शामिल हैं। जैसे-जैसे इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ रही है, ऐसा लग रहा है कि पेंशन से जुड़े ये नए रिफॉर्म्स इस बार के वेतन आयोग की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक हेडलाइन बनने जा रहे हैं।