गांव में डेयरी कारोबार शुरू करना है? दूध की बिक्री से पहले रोजाना लागत का हिसाब लगाएं
गांव में डेयरी कारोबार शुरू करने का विचार कई किसानों के मन में आता है, क्योंकि दूध की मांग रोज रहती है। लेकिन दूध बेचने से पहले रोजाना लागत का हिसाब लगाना सबसे जरूरी काम है। अगर लागत का पता ही न हो, तो यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कारोबार फायदे में है या नुकसान में। इसलिए पहले दिन से ही हर खर्च को लिखना शुरू करना चाहिए।
डेयरी की लागत में सबसे बड़ा हिस्सा चारे और दाने का होता है।
रोजाना लागत निकालने का आसान तरीका यह है कि हर खर्च को एक डायरी में लिखें और दिन के अंत में कुल जोड़ निकालें। उदाहरण के लिए, अगर चारे पर ₹300, दाने पर ₹200, मजदूरी पर ₹150 और बिजली-पानी पर ₹50 खर्च होता है, तो एक दिन की कुल लागत ₹700 बनती है।
इस हिसाब से यह भी पता चलता है कि किस खर्च में कमी की जा सकती है। मिसाल के तौर पर, अपना हरा चारा उगाने से खरीदे हुए चारे का खर्च कम हो सकता है। इसी तरह दूध को समय पर और साफ बर्तनों में रखने से खराब होने का नुकसान कम होता है। छोटे-छोटे खर्चों पर ध्यान देने से ही महीने के अंत में फर्क दिखता है।
दूध की कीमत का गणित कैसे समझेंदूध की कीमत आमतौर पर सहकारी व्यवस्था में फैट और एसएनएफ के आधार पर तय होती है।
यह भी जानना जरूरी है कि डेयरी से जुड़ी पुरानी केंद्रीय सब्सिडी योजना अब चालू नहीं है। नाबार्ड की डेयरी उद्यमिता विकास योजना वित्तीय वर्ष 2020-21 में बंद हो गई थी, इसलिए किसी भी व्यक्ति के यह कहने पर कि केंद्र सरकार की ओर से डेयरी पर सीधी सब्सिडी मिल रही है, उसकी पुष्टि संबंधित विभाग या बैंक से जरूर करनी चाहिए।
डेयरी शुरू करने से पहले आसपास दूध की मांग, खरीदने वाली डेयरी की दूरी और भुगतान की व्यवस्था के बारे में जानकारी ले लें। एक या दो पशुओं से शुरुआत करके अनुभव लेना अक्सर बड़े निवेश से बेहतर रहता है। पशु खरीदते समय उसकी सेहत और दूध देने की क्षमता की जांच किसी अनुभवी व्यक्ति या पशु चिकित्सक से कराना अच्छा रहता है।
अंत में यही बात सबसे काम की है कि डेयरी कारोबार में धैर्य चाहिए।